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Afghanistan Earthquake 2025: अफगानिस्तान में भूकंप से तबाही, मृतकों की संख्या 250 पार

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रविवार देर रात अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में आए भीषण Afghanistan Earthquake 2025 ने तबाही मचा दी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। घायलों की संख्या 500 से ज्यादा बताई जा रही है। सोमवार सुबह सरकारी समाचार एजेंसी बख्तर ने यह जानकारी साझा की। अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि दूरदराज के इलाकों तक पहुंच अभी भी मुश्किल है।

बचाव कार्य और सरकारी बयान

प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मृतकों और घायलों की पुष्टि की है। बचाव दल सीमित संसाधनों के साथ पहाड़ी और दुर्गम गांवों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण सूचनाएं देर से मिल रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती आंकड़े केवल उन क्षेत्रों से मिले हैं जहाँ पहुंच आसान थी। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री भेजी जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

शुरुआती रिपोर्ट और हकीकत

अफगानिस्तान के राष्ट्रीय रेडियो और टीवी ने पहले पूर्वी नंगरहार प्रांत में नौ लोगों की मौत और 20 के घायल होने की सूचना दी थी। हालांकि बाद में साफ हुआ कि नुकसान कहीं ज्यादा बड़ा है। कुनार और आसपास के जिलों के कई गांव पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। मिट्टी और कमजोर ईंट से बने घर तुरंत ढह गए। बचे हुए लोगों ने भयावह दृश्यों का वर्णन किया।

USGS Earthquake Report

संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS Earthquake Report) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.0 मापी गई। यह श्रेणी विनाशकारी मानी जाती है। रिपोर्ट के अनुसार इसका Jalalabad Earthquake Epicenter शहर से 27 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। गहराई केवल 8 किलोमीटर थी, जिससे झटके और ज्यादा खतरनाक हो गए। भारतीय समयानुसार रात 12 बजकर 47 मिनट पर झटके महसूस किए गए। करीब 20 मिनट बाद 4.5 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी आया, जिसका केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था।

सीमा पार भी महसूस हुए झटके

भूकंप इतना शक्तिशाली था कि असर अफगानिस्तान से बाहर भी महसूस हुआ। पाकिस्तान के कई शहरों में झटके महसूस किए गए। भारत की राजधानी दिल्ली और NCR में भी लोग आधी रात को घरों से बाहर निकल आए। वहां के निवासियों ने बताया कि इमारतें हिलने लगीं और लोग घबराकर खुले स्थानों की ओर भागे।

लोगों में दहशत और डर

भूकंप का समय देर रात का था, जब अधिकतर लोग सो रहे थे। अचानक आए झटकों से लोग बिस्तरों से कूद पड़े। जलालाबाद में लोगों ने बताया कि बच्चे रोने लगे और परिवार घरों से बाहर निकल आए। NCR वासियों ने भी सोशल मीडिया पर अपनी दहशत साझा की।

दूरदराज़ गांवों की तबाही

कुनार के ग्रामीण इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है। मिट्टी और लकड़ी के घर पूरी तरह ढह गए। कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल अभी भी जीवित लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। खराब सड़कें और उपकरणों की कमी राहत कार्य में बड़ी बाधा बनी हुई है।

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिंता

इतनी बड़ी तबाही ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। मानवीय संगठनों ने चिंता जताई है। पड़ोसी देश हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। सीमा पार झटकों ने इस आपदा के क्षेत्रीय असर को उजागर किया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस इलाके में आए भूकंप कई देशों को प्रभावित करते हैं।

हिमालयी क्षेत्र की भूवैज्ञानिक हलचल

वैज्ञानिकों के अनुसार यह भूकंप भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराव का परिणाम है। लाखों वर्ष पहले इन्हीं प्लेट्स के टकराव से हिमालय का निर्माण हुआ था। लेकिन ये प्लेट्स अब भी गतिशील हैं और क्षेत्र को अस्थिर बनाए हुए हैं। यह झटका भूगर्भीय गतिविधियों की एक और चेतावनी है।

हाल के वर्षों में बढ़ी गतिविधियां

पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी हिमालयी क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील है। घनी आबादी और कमजोर निर्माण व्यवस्था स्थिति को और खतरनाक बना देती है।

मानवीय संकट और चुनौतियां

तबाही के बाद अब अफगान जनता मानवीय संकट का सामना कर रही है। विस्थापित परिवारों को आश्रय, भोजन और दवाइयों की जरूरत है। अस्पतालों में घायलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्यकर्मी सीमित साधनों में काम कर रहे हैं। राहत शिविर लगाए जा रहे हैं लेकिन पहुंच अब भी चुनौती है।

तैयारी और चेतावनी की कमी

इस भूकंप ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की तैयारी की कमी उजागर कर दी है। शुरुआती चेतावनी प्रणाली अब भी सीमित है। ग्रामीण समुदायों को भूकंप से बचाव के उपायों की पूरी जानकारी नहीं है। विशेषज्ञ कहते हैं कि भूकंप-रोधी मकानों और क्षेत्रीय सहयोग की सख्त जरूरत है।

दिल्ली NCR में दहशत

भारत की राजधानी दिल्ली और NCR में भी झटके गहरे असर छोड़ गए। लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। कई परिवार बच्चों को लेकर खुले स्थानों पर चले गए। देर रात तक लोग घरों में लौटने से डरते रहे।

आफ्टरशॉक का खतरा

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आफ्टरशॉक का खतरा बना हुआ है। 4.5 तीव्रता का झटका इसका उदाहरण है। कमजोर इमारतों में रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने को कहा गया है। बचाव एजेंसियों ने क्षतिग्रस्त इमारतों में न जाने की अपील की है।

Afghanistan Earthquake Death Toll लगातार बढ़ रहा है और हालात गंभीर हैं। 250 से अधिक लोगों की मौत और 500 से ज्यादा घायल इस त्रासदी की गंभीरता को दिखाते हैं। झटके अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान और भारत के NCR तक महसूस किए गए। विशेषज्ञ मानते हैं कि हिमालयी पट्टी में ऐसी गतिविधियां भविष्य में और खतरनाक हो सकती हैं। राहत कार्य जारी है, लेकिन यह आपदा क्षेत्रीय तैयारी और सहयोग की बड़ी जरूरत को फिर से रेखांकित करती है।

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