बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। विपक्ष के नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शनिवार को एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाया। एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने दावा किया कि आवासीय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर जनता से 4,000 करोड़ रुपये वसूले गए हैं।
Article Contents
तेजस्वी यादव का आरोप
सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। उनका कहना था कि लोगों को बुनियादी प्रमाण पत्र दिलाने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि Residential Certificate और Caste Certificate जैसे जरूरी दस्तावेज़ों के लिए भी जनता से पैसा वसूला गया।
तेजस्वी के मुताबिक, केवल इन प्रमाण पत्रों के जरिये ही करीब 4,000 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए। उन्होंने इसे एक सुनियोजित रणनीति बताया जिसका मकसद चुनावों में धन का इस्तेमाल करना है।
प्रमाण पत्रों में भ्रष्टाचार की कहानी
तेजस्वी यादव ने समझाया कि आम आदमी के लिए प्रमाण पत्र लेना अब बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान Residential Certificate के लिए रिश्वत देना आम बात हो गई। इसी तरह, Caste Certificate पाने के लिए भी लोगों से भारी रकम वसूली गई।
ये दस्तावेज़ छात्रों, नौकरी चाहने वालों और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने वालों के लिए बेहद ज़रूरी हैं। लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने इसे आमदनी का जरिया बना लिया। तेजस्वी ने इसे जनता के साथ सीधा अन्याय करार दिया।
भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का वादा
तेजस्वी यादव ने सभा में फिर दोहराया कि उनकी पार्टी जनता को भ्रष्टाचार-मुक्त और अपराध-मुक्त सरकार देगी। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसी व्यवस्था मिलनी चाहिए जहां ईमानदारी सर्वोच्च हो। उनका आरोप था कि एनडीए गठबंधन जनता की सेवा के बजाय पैसा बटोरने में लगा है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि सत्ता में आने पर उनकी पार्टी भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाएगी। प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी ताकि जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।
चुनावी तैयारी से जोड़ दिया आरोप
तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा इस वसूले गए धन का इस्तेमाल चुनाव में करेगी। उनका दावा था कि 4,000 करोड़ रुपये की यह राशि चुनाव प्रचार और प्रबंधन के लिए जमा की जा रही है।
उन्होंने तर्क दिया कि अगर सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार रोकना चाहती तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करती। लेकिन इसके बजाय उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है क्योंकि वे राजनीतिक हित साधते हैं।
बिहार की राजनीति में नया विवाद
बिहार की राजनीति हमेशा से तीखे आरोप-प्रत्यारोप से भरी रही है। विपक्ष के नेता के तौर पर तेजस्वी यादव लगातार सरकार को भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दों पर घेरते रहे हैं। इस बार उनका हमला और तीखा रहा क्योंकि मामला सीधे आम जनता से जुड़ा है।
Residential Certificate और Caste Certificate लगभग हर घर की जरूरत होते हैं। इसीलिए 4,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लोगों तक गहरी पैठ बना सकता है।
आम जनता पर असर
तेजस्वी यादव ने कहा कि इस भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा बोझ गरीब परिवारों पर पड़ा है। कई परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए Residential Certificate चाहिए होता है। छात्रों को Scholarship और Reservation के लिए Caste Certificate चाहिए।
अगर इन दस्तावेज़ों के लिए भी रिश्वत देनी पड़े, तो यह सीधे गरीबों और युवाओं के भविष्य पर हमला है। तेजस्वी ने इस बिंदु को जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार ने बिहार के विकास को रोक दिया है।
विपक्ष की रणनीति
तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को उठाकर एक बार फिर खुद को जनता का नेता साबित करने की कोशिश की है। उनका मकसद है NDA सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरना और जनता का समर्थन हासिल करना।
उनकी रणनीति साफ है – सरकार को Anti-People और Pro-Corruption साबित करना। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि बदलाव लाकर ही बिहार की तस्वीर सुधारी जा सकती है।
NDA की संभावित प्रतिक्रिया
एनडीए सरकार इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर सकती है। अब तक सरकार हमेशा विपक्ष के आरोपों को बेबुनियाद बताती रही है। लेकिन 4,000 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम का आरोप जनता के बीच चर्चा का विषय बन सकता है।
संभावना है कि सरकार को विस्तृत जवाब देना पड़ेगा क्योंकि यह मामला आम जनता की रोज़मर्रा की ज़रूरत से जुड़ा है।
तेजस्वी यादव की दृष्टि
अपने भाषण में तेजस्वी ने साफ किया कि बिहार को नई सोच की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अपराध की जड़ें एक-दूसरे से जुड़ी हैं। यदि बिहार को आगे बढ़ाना है तो इन दोनों को खत्म करना ही होगा।
उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी पारदर्शी शासन लेकर आएगी। प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाएं बिना घूस और बिना देरी के लोगों तक पहुंचाई जाएंगी।
तेजस्वी यादव का यह हमला बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ चुका है। आवासीय और जाति प्रमाण पत्र के नाम पर 4,000 करोड़ रुपये की वसूली का उनका दावा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
उन्होंने जनता से वादा किया कि उनकी सरकार Corruption-Free और Crime-Free Bihar बनाने की दिशा में काम करेगी। आने वाले चुनावों में यह मुद्दा बड़ा चुनावी एजेंडा बनने की संभावना है।



