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थाइलैंड और कंबोडिया सीमा विवाद में जबरदस्त तनाव, F-16 से एयरस्ट्राइक और राजनयिकों की वापसी

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थाइलैंड और कंबोडिया के बीच पुराना सीमा विवाद एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। गुरुवार, 24 जुलाई को दोनों देशों की सेनाएं प्राचीन प्रसात ता मुएन थॉम मंदिर के पास आमने-सामने आ गईं। गोलीबारी के बाद थाइलैंड ने कंबोडिया के सैन्य ठिकानों पर F-16 airstrike किया। जवाब में कंबोडिया ने थाई फिल्मों और वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाते हुए अपने सभी राजनयिकों को वापस बुला लिया है।

थाइलैंड का जवाबी हमला, F-16 ने किए सैन्य ठिकानों पर वार

थाई सेना ने पुष्टि की है कि छह F-16 लड़ाकू विमान सीमा क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। इनमें से एक ने कंबोडिया के सैन्य बेस को नष्ट किया। थाईलैंड के डिप्टी मिलिट्री प्रवक्ता कर्नल रिचा सुक्सुवनन ने कहा कि यह हमला पहले से तय योजना के तहत किया गया। उनका दावा है कि यह कार्रवाई हाल ही में थाई नागरिकों पर हुए हमलों की प्रतिक्रिया में की गई, जिनमें दो नागरिकों की मौत हुई थी।

दूसरी ओर, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने अपने सोशल मीडिया पर कहा कि थाईलैंड ने उनके सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जो ओड्डार मीनचे और प्रीह विहार प्रांतों में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि कंबोडिया हमेशा शांति का पक्षधर रहा है, लेकिन इस सशस्त्र आक्रमण के जवाब में बल प्रयोग करना जरूरी हो गया है।

सीमा पर गोलीबारी और आमने-सामने की स्थिति

Thailand Cambodia border clash की यह घटना उस वक्त शुरू हुई जब थाई सेना ने दावा किया कि कंबोडिया के सैनिक एक निगरानी ड्रोन और छह सशस्त्र जवानों के साथ उनकी चौकी के पास पहुंचे। इसके बाद दोनों तरफ से फायरिंग हुई। घटना के वीडियो में देखा गया कि सीमावर्ती गांवों के निवासी बंकरों में छिपते नजर आए। धमाकों की आवाजों से पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

बारूदी सुरंग से एक सैनिक घायल, थाइलैंड ने फिर साधा निशाना

इस झड़प से एक दिन पहले उबोन रत्चाथानी प्रांत में एक बारूदी सुरंग विस्फोट में थाई सेना का एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया और चार अन्य सैनिकों को भी चोटें आईं। थाईलैंड का दावा है कि यह सुरंग हाल ही में कंबोडिया द्वारा बिछाई गई थी और यह रूसी तकनीक से बनी है। हालांकि कंबोडिया ने इस आरोप को खारिज किया है और दावा किया है कि विस्फोट उसके अपने क्षेत्र प्रीह विहार में हुआ।

ऐतिहासिक जड़ें और पुरानी रंजिश

Preah Vihear dispute की जड़ें औपनिवेशिक काल तक जाती हैं। 1907 में फ्रांस द्वारा बनाए गए नक्शे में प्रेह विहेयर मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा बताया गया था, जिसे थाईलैंड ने कभी नहीं स्वीकारा। 2008 में जब इस मंदिर को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया गया, तो थाईलैंड ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना। तब से इस क्षेत्र में समय-समय पर तनाव देखने को मिलता रहा है।

प्रसात ता मुएन थॉम मंदिर थाइलैंड के सुरिन प्रांत में स्थित है, लेकिन कंबोडिया भी इस पर दावा करता है। यह स्थान रणनीतिक और सांस्कृतिक रूप से दोनों देशों के लिए अहम है।

राजनयिक संबंधों में दरार

गुरुवार की घटना के बाद थाइलैंड ने कंबोडिया के राजदूत को निष्कासित कर दिया और अपनी पूर्वोत्तर सीमाओं की कई चौकियां बंद कर दीं। जवाब में, कंबोडिया ने थाई फिल्मों, गैस, ईंधन और कृषि उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी है। साथ ही बैंकॉक स्थित अपने दूतावास से सभी कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया गया है।

इसके अलावा कंबोडिया ने थाईलैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में मुकदमा दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है, जैसा कि मई 2025 में एक सैनिक की मौत के बाद किया गया था।

चीन की बढ़ती भूमिका और सैन्य रणनीति

इस पूरे मामले में चीन एक अहम अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। हाल ही में कंबोडिया में रीम नौसेना बेस का निर्माण और वहां चीनी जहाजों की उपस्थिति से यह संकेत मिला है कि चीन इस क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ा रहा है।

कंबोडिया ने हाल ही में युवाओं के लिए 18 महीने का अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है, जिसे थाइलैंड के साथ बढ़ते तनाव के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। अनुमान है कि इस नीति को लागू करने में चीन द्वारा मिले हथियार और वित्तीय समर्थन की अहम भूमिका है।

थाइलैंड की राजनीतिक स्थिति भी अस्थिर

यह विवाद थाइलैंड की आंतरिक राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा को संवैधानिक अदालत ने निलंबित कर दिया है। कारण था कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन के साथ उनकी एक लीक फोन कॉल, जिसमें वह तनाव कम करने की बात करते हुए उन्हें “अंकल” कहती हैं। इस बातचीत को थाईलैंड की संप्रभुता के खिलाफ बताया गया, जिससे देश में भारी राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर असर और भारत की नजर

यह संकट दक्षिण-पूर्व एशिया की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। भारत, जो इन दोनों देशों का समुद्री पड़ोसी है, स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 2024 में 21 लाख से अधिक भारतीयों ने थाईलैंड की यात्रा की थी। अगर यह सीमा तनाव बढ़ता है तो टूरिज्म और व्यापार दोनों पर असर पड़ेगा।

कंबोडिया द्वारा अंतरराष्ट्रीय अदालत का सहारा लेना और चीन की सक्रियता इस विवाद को वैश्विक स्तर पर खींच सकती है। थाइलैंड ने बातचीत के लिए 2000 में हुए संयुक्त सीमा समिति (JBC) समझौते का हवाला देकर समाधान का प्रस्ताव दिया था, जिसे कंबोडिया ने खारिज कर दिया।

स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। थाइलैंड और कंबोडिया दोनों अपने-अपने दावों पर अड़े हुए हैं। राजनयिक समाधान की संभावनाएं कमजोर दिख रही हैं और सैन्य टकराव का खतरा बढ़ रहा है। दक्षिण एशिया और ASEAN देशों की नजरें अब इन दो पड़ोसी देशों पर टिकी हैं।

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