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चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव के बयान पर दिया जवाब, कहा- ताड़ी और नीरा को शराब से जोड़ना गलत

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KKN गुरुग्राम डेस्क | केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान हाल ही में अपने संसदीय क्षेत्र हाजीपुर में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से भी बातचीत की। इस दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने बिहार की राजनीति में चल रहे ताड़ी और नीरा के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव द्वारा किए गए बयान पर चिराग पासवान ने स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। तेजस्वी ने हाल ही में कहा था कि अगर उनकी सरकार बनी, तो ताड़ी पर लगे बैन को हटा लिया जाएगा।

इस पर चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी, “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट”, इस मुद्दे का समर्थन करती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि नीरा और ताड़ी को अल्कोहल की श्रेणी में नहीं लाना चाहिए, क्योंकि यह प्राकृतिक पदार्थ हैं।

चिराग पासवान का समर्थन

चिराग पासवान ने आगे कहा, “हमारी पार्टी हमेशा से इस बात का समर्थन करती रही है कि नीरा और ताड़ी जैसे प्राकृतिक पदार्थों को शराब की श्रेणी में नहीं लाया जा सकता। यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक प्रक्रिया से आता है, जिसे किसी भी प्रकार से शराब के साथ जोड़ना गलत है। हमारी पार्टी ने गठबंधन के अंदर भी इस मुद्दे को उठाया है और हम चाहते हैं कि इसे सही दृष्टिकोण से समझा जाए।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब उनकी पार्टी “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के समर्थन से सरकार बनाएगी, तो वह ताड़ी और नीरा के साथ जुड़े समुदाय की बातों का सम्मान करेंगे और उन्हें उचित तरीके से मान्यता देंगे।

नीरा और ताड़ी का महत्व

चिराग पासवान ने इस दौरान नीरा और ताड़ी के महत्व को भी रेखांकित किया। उनका कहना था कि बिहार के विभिन्न इलाकों में पीढ़ी दर पीढ़ी इन उत्पादों से जुड़े समुदाय रहते हैं, जिनका जीवन ताड़ी और नीरा पर निर्भर है। उन्होंने इसे एक सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दा भी बताया, और कहा कि इस विषय को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

तेजस्वी यादव का बयान

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने हाल ही में यह बयान दिया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई, तो वह ताड़ी और नीरा पर लगे प्रतिबंध को हटा लेंगी। तेजस्वी का कहना था कि बिहार में ताड़ी और नीरा पर बैन से कई लोग प्रभावित हो रहे हैं, और इसे जल्द से जल्द खत्म करना चाहिए।

तेजस्वी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया था, जिसके बाद चिराग पासवान ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा एक सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व का है, और इसे राजनीतिक फायदे के लिए नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

क्या है ताड़ी और नीरा का मुद्दा?

ताड़ी और नीरा, दोनों ही बिहार के ग्रामीण इलाकों में एक पारंपरिक पेय पदार्थ के रूप में इस्तेमाल होते हैं। ताड़ी एक प्रकार की खमीरयुक्त पेय है जो ताड़ के पेड़ से प्राप्त होती है, जबकि नीरा ताड़ी का एक शुद्ध रूप है, जो बिना खमीर के होता है। यह पेय बिहार के कई इलाकों में व्यापक रूप से सेवन किया जाता है और वहां के कुछ समुदायों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आजीविका का स्रोत है।

बिहार सरकार ने कई सालों पहले ताड़ी और नीरा पर बैन लगा दिया था, लेकिन यह मामला अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इस पर सरकार से बैन हटाने की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे शराब के रूप में वर्गीकृत करने के खिलाफ हैं।

आगामी राजनीति और चिराग पासवान की रणनीति

चिराग पासवान ने इस मुद्दे पर साफ किया कि उनकी पार्टी का मानना है कि ताड़ी और नीरा जैसे प्राकृतिक उत्पादों को शराब की श्रेणी में नहीं लाना चाहिए। उनका कहना था कि इस मुद्दे को सही तरीके से और पूरी समझ के साथ हल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनकी पार्टी “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” के समर्थन से सरकार बनाएगी, तो वह इस मामले में उचित कदम उठाएंगे।

इसके अलावा, चिराग पासवान ने तेजस्वी यादव और उनके बयान के बारे में कोई कठोर टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि इस मुद्दे को एक सामाजिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

चिराग पासवान का यह बयान इस बात को साबित करता है कि वह बिहार की राजनीति में सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। ताड़ी और नीरा के बारे में उनके विचार यह दर्शाते हैं कि वह इसे एक सांस्कृतिक और पारंपरिक मुद्दा मानते हैं, जो राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठाना चाहिए। इस बयान से यह भी साफ हो गया कि चिराग पासवान और उनकी पार्टी इस मुद्दे को हल करने के लिए तैयार हैं, लेकिन वह इसे एक जिम्मेदार तरीके से करना चाहते हैं, जिससे समाज के सभी वर्गों का सम्मान किया जा सके।

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