होमPoliticsपाकिस्तान में इमरान के संघर्ष का वह 22 साल

पाकिस्तान में इमरान के संघर्ष का वह 22 साल

Published on

मैदान चाहें खेल का हो या राजनीति का… बुलंदियों का परचम, जैसे इमरान खान का ही इंतजार कर था…। हालांकि, सफलता के शीर्ष तक पहुंचने में इमरान को 22 साल का लम्बा वक्त लग गया।

अब तक कप्तान के नाम से पाकिस्तान में मसहूर इमरान खान अब पाक के वजीरे आजम बनने के बेहद करीब पहुंच चुकें हैं। पाक के आवाम को उनसे बहुत उम्मीद है। दूसरी ओर सेना और कट्टरपंथी उन्हें अपना कटपुतली बनाने को उतावली हो रही है। ऐसे में इमरान खान की असली परीक्षा होना अभी बाकी है।
खेल के मैदान पर भी करना पड़ा था इंतजार
इमरान खान को खेल के मैदान में भी सफलता के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ा था। क्रिकेट के मैदान में 19 साल की उम्र में कदम रखने के बावजूद उम्र के 40वें साल में जाकर विश्व कप जीत पाए थे। आपको याद ही होगा कि वर्ष 1971 में इमरान ने इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में टेस्ट मैच के दौरान पदार्पण किया था। उस वक्त दो पारियों में 28 ओवर करने के बावजूद उन्हें एक भी सफलता हाथ नहीं लगी। तीन साल बाद वर्ष 1974 में इंग्लैंड के खिलाफ ही उन्हें अपना पहला टेस्ट विकेट मिला था और 10 से ज्यादा विकेट लेने में उन्हें 6 साल का इंतजार भी करना पड़ा था। हालांकि, 1992 में अपने उम्र के 40वें साल में पहुंचने के बाद विश्व कप जीतने वाले वे पहले पाकिस्तानी कप्तान बन कर दुनिया में अपने सफलता का डंका बजाया था।
राजनीति के पीच पर भी मिली शुरूआती असफलता
वर्ष 1996 में इमरान खान ने राजनीति की ओर रुख किया। पाकिस्तान के सबसे बड़े स्टार होने के बावजूद उनका सियासी सफर मुश्किलों से भरा रहा। 1996 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का गठन करने के अगले साल वह चुनाव मैदान में उतरे और बुरी तरह से विफल रहे। नेशनल अंसेबली के दो सीटों से चुनाव लड़ने के बावजूद वह एक से भी नहीं जीत सके। हालांकि, वर्ष 2002 में उन्हें मियांवाली सीट से जीत हासिल हुई। इसके बाद इमरान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत का है अभाव
पाकिस्तान में इमरान खान की सरपरस्ती में तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी बेशक सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। बावजूद इसके सरकार बनाने के लिए उन्हें गठबंधन की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, यह काम अब बहुत मुश्किल नहीं है। कारण ये कि पाक सेना का बरदहस्त इमरान को प्राप्त है और पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई इमरान खान को पाकिस्तान का वजीरे आजम बनाने की जुगत में लग चुकी है।
दोस्तों आप सबसे पहले KKN Live के इस पेज को फॉलो कर लें। लाइक और शेयर भी जरुर करें। मुझे आपके कमेंट का भी इंतजार रहेगा।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मीनापुर के गांवों को स्मार्टफोन ने कितना बदला? खेती, पढ़ाई और रोजगार की नई कहानी

मीनापुर के गांव में अब जेब में सिर्फ फोन नहीं, पूरा बाजार है मीनापुर के...

हिंद केसरी यादव: मीनापुर की राजनीति में वह नाम, जिसने आंदोलन को सड़क से सदन तक पहुंचाया

पांचवीं पुण्यतिथि पर दरहीपट्टी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा—अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना...

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

क्या अमेरिका पर भरोसा करने का दौर खत्म हो रहा है? भारत की नई चुनौती

दुनिया की राजनीति में अमेरिका की ताकत पर शायद ही कोई सवाल उठाता है,...

More like this

हिंद केसरी यादव: मीनापुर की राजनीति में वह नाम, जिसने आंदोलन को सड़क से सदन तक पहुंचाया

पांचवीं पुण्यतिथि पर दरहीपट्टी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा—अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना...

मीनापुर की असली कहानी क्या है? आजादी, राजनीति, बागमती और बदलते गांव का पूरा सच

मीनापुर को अगर सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले का एक प्रखंड या बिहार की एक विधानसभा...

मीनापुर में परिणाम बदलने वाले मुद्दे: जाति से बाढ़ तक, सड़क से रोज़गार तक आखिर किस सवाल ने बदली बाजी?

मीनापुर में विकास की परिकथा सिर्फ कुछ आंकड़ों से नहीं बनता। उसके पीछे एक...

मीनापुर की राजनीति: 1951 से 2025 तक सत्ता बदलती रही, लेकिन क्या बदला राजनीति का मिजाज?

मीनापुर की राजनीति को अगर सिर्फ पिछले 10 या 15 वर्षों के चुनाव से...

चुनाव आयोग पर क्यों मचा है हंगामा? 14 आपत्तियों से उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सत्ता पक्ष की असहजता की पूरी पड़ताल

भारत में चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। चुनाव वह बुनियादी व्यवस्था...

क्या एक विधायक पांच साल में अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है?

KKN ब्यूरो। विधायक के पास अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए 5 वर्षों में 20...

मीनापुर में जदयू का ‘संवाद’ या संगठन के भीतर उठती बेचैनी?

मनीष वर्मा के सामने खुली कार्यकर्ताओं की परत-दर-परत पीड़ा KKN ब्यूरो। मीनापुर में रविवार का...

ट्रंप के दौर में क्या अमेरिका की वैश्विक साख घटी? आंकड़े क्या कहते हैं

KKN ब्यूरो। एक समय था जब दुनिया के किसी संकट पर एक सवाल लगभग...

वह सुबह, जब पहाड़ नदी बन गया

26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे हिमालय में कुछ ऐसा टूटा, जिसकी गूंज सैकड़ों...

नेपाल की बाढ़ में चीन की चाल? ग्लेशियर टूटने का सच, हिमालय का बढ़ता खतरा और भारत के लिए आने वाली बड़ी आफत

नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने सैकड़ों जिंदगियां निगल लीं।...

फरक्का जलसंधि: बिहार की बाढ़, बंगाल का बंदरगाह और बांग्लादेश का पानी—30 साल बाद फिर क्यों खड़ा हुआ सबसे पेचीदा सवाल?

1996 की गंगा जलसाझेदारी संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। बिहार में...

चीन का खतरा: सीमा पर सैनिकों से ज्यादा खतरनाक है सड़क, गांव और ब्रह्मपुत्र पर बनता नया सामरिक जाल

अरुणाचल में 60 किलोमीटर घुसपैठ का दावा निकला भ्रामक, लेकिन खतरा पूरी तरह काल्पनिक...

नेपाल की सुलगती सरहद: सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक बेचैनी और भारत के लिए बढ़ती चुनौती

जब पड़ोसी देश में आग लगती है, तो धुआं सीमाएं नहीं पहचानता... KKN ब्यूरो। भारत...

मीनापुर के प्रथम विधायक जनक सिंह की 112वीं जयंती पर ‘अग्रदूत’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

मीनापुर के प्रथम विधायक को श्रद्धांजलि, 'अग्रदूत' पुस्तक बनी उनकी विरासत का दस्तावेज़ KKN ब्यूरो।...

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...