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नेपाल की सियासत में भूचाल: PM KP Sharma Oli दुबई भागने की तैयारी में?

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नेपाल इन दिनों गहरी राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री KP Sharma Oli को लेकर खबरें हैं कि वे देश छोड़कर दुबई जा सकते हैं। लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों, हिंसा और मंत्रियों के इस्तीफों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री को बाहर ले जाने के लिए Himalaya Airlines को standby पर रखा गया है।

विरोध प्रदर्शनों की आग

काठमांडू और आसपास के जिलों में छात्रों का आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है। शुरुआत सोशल मीडिया ban से हुई थी, लेकिन अब मामला भ्रष्टाचार, लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और सरकारी नाकामी तक पहुंच गया है।

पुलिस फायरिंग में अब तक 19 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 300 से ज्यादा घायल हैं। सुरक्षा बलों द्वारा live firing किए जाने ने युवाओं के गुस्से को और भड़का दिया है। अब प्रदर्शनकारी साफ कह रहे हैं कि KP Sharma Oli का इस्तीफा ही उनका लक्ष्य है।

Oli के देश छोड़ने की तैयारी

खबरें हैं कि KP Sharma Oli ने अपनी कार्यकारी जिम्मेदारियां उप-प्रधानमंत्री को सौंप दी हैं। यह इशारा करता है कि वे नेपाल से बाहर जाने की प्लानिंग कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, काठमांडू उनके लिए अब unsafe माना जा रहा है।

Tribhuvan International Airport के कर्मचारियों को VIP movement संभालने के लिए high alert पर रखा गया है। एक अधिकारी ने बिना नाम बताए कहा कि नेताओं के देश छोड़ने की आशंका के चलते स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

हिंसा और हमले

नेपाल के हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के निजी आवास में आग लगा दी। Janakpur में पूर्व उप-प्रधानमंत्री Raghuveer Mahaseth के घर पर भी पथराव हुआ।

Nepali Congress अध्यक्ष Sher Bahadur Deuba का घर भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गया। उनकी संपत्ति में आग लगाई गई और कई गाड़ियों को फूंक दिया गया। यह साफ दिखाता है कि आंदोलन अब सिर्फ KP Oli तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र के खिलाफ गुस्सा भड़क चुका है।

मंत्रियों के इस्तीफे

गृहमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और कृषि मंत्री समेत कुल 10 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है। इससे Oli सरकार बेहद कमजोर स्थिति में आ गई है।

सरकार ने दबाव में आकर 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से प्रतिबंध हटाया, लेकिन तब तक हालात हाथ से निकल चुके थे। छात्रों और युवाओं का आक्रोश अब किसी भी राहत उपाय से शांत होने वाला नहीं है।

नेपाल की राजनीति का इतिहास

नेपाल में लोकतंत्र लागू होने के बाद आज तक कोई भी प्रधानमंत्री अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। गठबंधन सरकारें और आपसी खींचतान ने हर बार अस्थिरता पैदा की है। KP Sharma Oli की सरकार भी Nepal Congress के सहारे टिकी थी, लेकिन मौजूदा हालात में यह गठबंधन टूटता नजर आ रहा है।

लोगों का कहना है कि लगातार भ्रष्टाचार, नाकामी और जवाबदेही की कमी ने नागरिकों को पूरी तरह से निराश कर दिया है। यही वजह है कि आंदोलन अब nationwide रूप ले चुका है।

Oli की मुश्किलें और संभावित इस्तीफा

KP Sharma Oli ने अभी तक औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन जिम्मेदारियां सौंपना उनके अगले कदम की ओर इशारा करता है। यदि वे दुबई चले जाते हैं तो उनकी सरकार का पतन तय माना जा रहा है।

प्रदर्शनकारी साफ कर चुके हैं कि अब केवल Oli का इस्तीफा ही उन्हें स्वीकार होगा। आंशिक सुधार या राहत के ऐलान से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

यह संकट नेपाल के लोकतंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। बार-बार बदलती सरकारें और भ्रष्टाचार ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है। यदि Oli भागते हैं या इस्तीफा देते हैं तो एक बार फिर coalition bargaining और राजनीतिक अस्थिरता शुरू हो जाएगी।

देश की जनता अब केवल बदलाव चाहती है। सवाल यह है कि क्या नेपाल का राजनीतिक नेतृत्व इस बार जिम्मेदारी दिखाएगा या फिर देश को और गहरे संकट में धकेल देगा।

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