क्या आपने कभी किसी ऐसे मांझी को देखा है, जो नदी नहीं… आत्मा को पार कराता हो? जिसकी नाव लकड़ी से नहीं, ध्यान से बनी हो? जिसका चप्पू शब्द नहीं… मौन हो…? यह कहानी है एक ऐसे रहस्यमयी मांझी की, जो ओशो की तरह हमें सिखाता है — तैरना नहीं, बहना सीखो… एक युवक जो अपने जीवन की उलझनों से थक चुका है, उस मांझी से मिलता है। और फिर शुरू होती है एक अद्भुत यात्रा — बाहर की नहीं, बल्कि भीतर की। यह कहानी सिर्फ सुनने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए है। अगर आप जीवन की गहराई को छूना चाहते हैं… तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें।
