KKN गुरुग्राम डेस्क | बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान ने नेटफ्लिक्स पर प्रसारित हो रहे ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के ताज़ा एपिसोड में एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनकी वर्ष 2003 में आई सुपरहिट फिल्म ‘तेरे नाम’ में उनके किरदार राधे मोहन का जो आइकॉनिक हेयरस्टाइल था, उसकी प्रेरणा किसी फिल्मी सितारे से नहीं बल्कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिली थी।
कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के साथ यह पहला एपिसोड था, जिससे शो के तीसरे सीज़न की धमाकेदार शुरुआत हुई। सलमान ने शो में कई दिलचस्प किस्से और अनसुने राज़ भी साझा किए, लेकिन सबसे खास रहा उनका यह खुलासा जिसने दर्शकों को चौंका दिया।
डॉ. अब्दुल कलाम से प्रेरित था सलमान खान का तेरे नाम वाला हेयरस्टाइल
शो के दौरान कपिल शर्मा ने जब सलमान से तेरे नाम के लुक के बारे में पूछा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“जो ‘तेरे नाम’ का लुक है, वो दरअसल अब्दुल कलाम साहब से इंस्पायर्ड था। उस समय राहुल रॉय का भी यही हेयरस्टाइल था, लेकिन मुझे लगता है छोटे शहरों का जो हीरो होता है, उनके लंबे बाल होते हैं। पुराने ज़माने के हीरोज को देख लो, सबके लंबे बाल थे। वहीं से ये आइडिया आया था।”
सलमान की इस बात को सुनकर न सिर्फ अर्चना पूरन सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, और शो की पूरी टीम चकित रह गई, बल्कि स्टूडियो की ऑडियंस में भी सरगर्मी सी फैल गई।
‘तेरे नाम’ का हेयरस्टाइल बना था राष्ट्रीय ट्रेंड
जब ‘तेरे नाम’ फिल्म रिलीज़ हुई थी, तब सिर्फ फिल्म की कहानी और गाने ही नहीं, बल्कि सलमान खान के लंबे बालों वाला हेयरस्टाइल भी हर युवा का सपना बन गया था। छोटे कस्बों, शहरों और यहां तक कि गांवों तक में युवाओं ने इस लुक को अपनाया।
देश भर के सैलून में ग्राहक “तेरे नाम हेयरकट” की डिमांड करने लगे। यह हेयरस्टाइल सिर्फ फैशन नहीं, एक भावनात्मक पहचान बन गया था — प्रेम में पागलपन, अकेलापन और विद्रोह की मिलीजुली छवि।
अब, जब यह सामने आया है कि उस लुक के पीछे प्रेरणा भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम थे, तो यह खुलासा भारतीय सिनेमा और राजनीति के बीच एक अनोखा रिश्ता दिखाता है।
कौन थे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम? सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, एक जीवनदर्शी
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें देश “मिसाइल मैन” और “जनता के राष्ट्रपति” के रूप में जानता है, भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे और उनके व्यक्तित्व ने करोड़ों लोगों को प्रभावित किया। उनके बालों की विशिष्ट स्टाइल — लंबे, साइड से बिखरे बाल — उनकी पहचान बन गई थी।
उनकी छवि इतनी शक्तिशाली थी कि एक बॉलीवुड सुपरस्टार ने भी उनसे प्रेरणा ली। यह दिखाता है कि असली प्रेरणा केवल फिल्मों से नहीं, बल्कि विचारशील व्यक्तित्वों से भी आ सकती है।
‘तेरे नाम’: एक इमोशनल लव स्टोरी जिसने दिलों में घर बना लिया
सलमान खान की फिल्म ‘तेरे नाम’, जो वर्ष 2003 में रिलीज़ हुई थी, एक गहन प्रेम कहानी थी जो आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है। फिल्म में सलमान के किरदार राधे मोहन का प्यार, पागलपन, और टूटन का चित्रण दर्शकों को झकझोर गया था।
फिल्म के गाने – तेरे नाम, तुमसे मिलना, ओढ़नी – आज भी सदाबहार हैं। सलमान के अभिनय को उनका अब तक का सबसे इमोशनल परफॉर्मेंस माना जाता है।
अब, जब यह ज्ञात हुआ है कि उनके किरदार की छवि में डॉ. कलाम की भूमिका रही है, तो यह फिल्म और भी भावनात्मक रूप से गहरी हो जाती है।
‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ की वापसी: फिर छाया कपिल का जादू
नेटफ्लिक्स पर प्रसारित हो रहा द ग्रेट इंडियन कपिल शो अब अपने तीसरे सीज़न में प्रवेश कर चुका है और सलमान खान के साथ इसकी शुरुआत बेहद जोरदार रही। शो में कपिल की कॉमिक टाइमिंग, सलमान की बेबाक बातें, और अर्चना-सिद्धू की उपस्थिति ने पुराने दिनों की याद ताज़ा कर दी।
सोशल मीडिया पर #SalmanOnKapil, #TereNaamLook, और #KalamInspiration जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। फैंस ने एपिसोड को इमोशनल और एंटरटेनिंग बताया।
अब दर्शकों में उत्सुकता है कि अगले एपिसोड में कौन मेहमान होगा और और क्या दिलचस्प खुलासे होंगे।
फिल्म, राजनीति और संस्कृति का मिलन: एक दुर्लभ उदाहरण
सलमान खान का यह बयान एक नई सोच को जन्म देता है — कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रेरणा का एक साधन है, और प्रेरणा कहीं से भी आ सकती है। एक वैज्ञानिक, एक शिक्षक और राष्ट्रपति का हेयरस्टाइल जब एक प्रेम-कहानी के नायक के रूप में उभरता है, तो यह सिर्फ कला नहीं, एक संस्कृति की आवाज़ बन जाता है।
यह साबित करता है कि डॉ. कलाम जैसे नेता सिर्फ किताबों या भाषणों तक सीमित नहीं हैं। उनकी छवि, उनका आचरण, और उनकी सोच आज भी हमारे कला और मनोरंजन के माध्यमों में जीवित है।
सलमान खान ने द ग्रेट इंडियन कपिल शो में जो खुलासा किया, वह सिर्फ एक हेयरस्टाइल की बात नहीं है। यह एक विचारधारा, एक भावना, और एक सम्मान की बात है — जो उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया।
यह बताता है कि फिल्में और उनके किरदार समाज से कैसे जुड़ते हैं। कभी-कभी पर्दे पर दिखने वाला हर दृश्य किसी गहरे विचार से प्रेरित होता है।
और जब किसी अभिनेता का अभिनय राष्ट्र के सबसे महान वैज्ञानिकों में से एक से प्रेरणा लेता है, तो वह सिर्फ एक सीन नहीं रह जाता — वह एक संस्कृतिक दस्तावेज़ बन जाता है।
