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कैसे कभी खुशी कभी गम फिल्म का बोले चूड़ियां गाने ने पूरी फिल्म का Budget पार कर दिया

करण जौहर के निर्देशन में बनी फिल्म कभी खुशी कभी गम आज भी दर्शकों की फेवरिट फिल्मों में गिनी जाती है। रिलीज के 25 साल बाद भी इस फिल्म की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। फिल्म में शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, ऋतिक रोशन, जया बच्चन, काजोल और करीना कपूर जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। भव्य लोकेशन, शानदार म्यूजिक और पारिवारिक भावनाओं से भरपूर कहानी ने इसे एक यादगार फिल्म बना दिया।

यह फिल्म करण जौहर की दूसरी directorial फिल्म थी। इससे पहले वह कुछ कुछ होता है का निर्देशन कर चुके थे। इतनी बड़ी star cast और grand presentation के साथ यह उनके करियर की एक अहम फिल्म साबित हुई।

बोले चूड़ियां बना फिल्म की पहचान

फिल्म का एक गाना बोले चूड़ियां बोले कंगना आज भी खास पहचान रखता है। इस song में पूरी स्टार कास्ट एक साथ नजर आई थी। शादी और पारिवारिक समारोहों में यह गाना आज भी खूब बजता है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि इस एक गाने का खर्चा पूरी फिल्म के तय बजट से भी ज्यादा हो गया था।

इस दिलचस्प किस्से का खुलासा writer और director निखिल आडवाणी ने किया था। उन्होंने बताया कि उस दौर में फिल्में passion के दम पर बनती थीं, न कि सिर्फ spreadsheet और planning के आधार पर।

कुछ मिनटों में तय हुआ था फिल्म का Budget

निखिल आडवाणी ने बताया कि जब कभी खुशी कभी गम की स्क्रिप्ट यश जौहर को सुनाई गई थी, तब budget तय करने की प्रक्रिया बेहद सरल थी। यश जौहर ने निखिल को अपने ऑफिस बुलाया और फिल्म का बजट लिखने को कहा।

निखिल ने एक कागज पर तीन करोड़ रुपये लिखे और उन्हें थमा दिया। यश जौहर ने बिना किसी सवाल के उस budget को मंजूरी दे दी। इसी तरह फिल्म की शुरुआत हो गई। उस समय न लंबी मीटिंग हुई और न ही महीनों की planning।

बोले चूड़ियां बना पहला Set

निखिल आडवाणी के अनुसार फिल्म का पहला set ही बोले चूड़ियां गाने के लिए तैयार किया गया था। यह set बेहद भव्य था और उस पर काफी मेहनत की गई थी। गाने की शूटिंग के दौरान कई मुश्किलें सामने आईं।

काजोल को अपने भारी लहंगे की वजह से डांस करने में परेशानी हो रही थी। set पर करीब 200 dancers और लगभग 300 junior artists मौजूद थे। इतने बड़े पैमाने पर शूटिंग संभालना आसान नहीं था।

भव्यता की चाह में बढ़ता गया खर्च

करण जौहर हर चीज को grand दिखाना चाहते थे। इसी वजह से set के लिए झूमर भी खास तौर पर बनवाए गए थे। कोई भी चीज साधारण नहीं रखी गई थी। हर फ्रेम में शाही अंदाज नजर आना जरूरी था।

लगातार बढ़ते दबाव और काम के कारण करण जौहर एक समय set पर बेहोश भी हो गए थे। यह उस गाने की भव्यता और टीम पर पड़े मानसिक दबाव को दर्शाता है।

एक Song ने पार कर दिया पूरी फिल्म का Budget

निखिल आडवाणी ने बताया कि उसी शाम tea break के दौरान यश जौहर ने टीम को बुलाया। उन्होंने पूछा कि फिल्म का बजट कितना तय किया गया था। निखिल ने कहा कि उन्हें ठीक से याद नहीं है।

इसके बाद यश जौहर ने वही कागज निकाला, जिस पर तीन करोड़ रुपये लिखे थे। उन्होंने जोर से बजट पढ़ा और फिर बताया कि बोले चूड़ियां गाने के set पर इससे ज्यादा खर्च हो चुका है। यानी सिर्फ एक गाने का खर्च पूरी फिल्म के budget से ऊपर चला गया था।

यश जौहर ने वह कागज फाड़ दिया और कहा कि अब फिल्म बनाते रहो। उस वक्त न कोई घबराहट थी और न ही नाराजगी।

फिल्म बनाने का जुनून था अलग

निखिल आडवाणी के मुताबिक उस दौर के filmmakers में फिल्म बनाने का नशा अलग ही स्तर का था। यश जौहर एक फिल्म के लिए अपना घर बेचने तक के बारे में सोच सकते थे। यही हाल यश चोपड़ा का भी था।

उनका मानना था कि सिनेमा सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। उस समय फैसले दिल से लिए जाते थे, न कि सिर्फ आंकड़ों के आधार पर।

नई पीढ़ी में भी दिखती है वही सोच

निखिल आडवाणी का कहना है कि आज की पीढ़ी में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो उस दौर की filmmaking को दोबारा जिंदा कर सकते हैं। उनके अनुसार आदित्य चोपड़ा और करण जौहर ऐसे नाम हैं, जो सिनेमा को केवल business नहीं मानते।

कभी खुशी कभी गम इसी सोच का उदाहरण है। budget की सीमाएं टूटने के बावजूद फिल्म ने इतिहास रच दिया।

क्यों आज भी जुड़ते हैं दर्शक

फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसका emotional connect रहा। पारिवारिक रिश्ते, टकराव और मेल मिलाप की कहानी ने दर्शकों को जोड़े रखा। संगीत ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

बोले चूड़ियां गाना आज भी उत्सव और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इतने साल बाद भी इसकी भव्यता फीकी नहीं पड़ी है।

Bollywood का यादगार किस्सा

बोले चूड़ियां से जुड़ा यह किस्सा हिंदी सिनेमा के सबसे दिलचस्प किस्सों में शामिल है। यह उस दौर की filmmaking को दर्शाता है, जब जुनून और विश्वास सबसे बड़ी पूंजी हुआ करते थे।

कभी खुशी कभी गम सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस सोच की पहचान है, जहां एक song के लिए पूरी हदें पार कर दी गईं और वही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

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