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करूर रैली में भगदड़: तमिलनाडु में 39 लोगों की मौत, कई घायल

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तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (टीवीके) द्वारा आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान शनिवार, 27 सितंबर 2025 को भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया है।

करूर रैली में हुआ दर्दनाक हादसा

रैली में जब विजय अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे थे, तब अचानक भगदड़ मच गई। अधिकारियों के अनुसार, रैली में उम्मीद से कहीं ज्यादा लोग जुट गए थे, जिससे हालात बिगड़ गए। इस भगदड़ में 39 लोगों की मौत हो गई, जिनमें आठ बच्चे और 16 महिलाएं शामिल हैं। घटना के बाद पुलिस और चिकित्सा टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल भेजने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।

रैली के दौरान बच्चे बेहोश होने लगे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने शोर मचाना शुरू किया, और विजय ने अपनी स्पीच रोक दी। विजय ने तुरंत पानी की बोतलें लोगों तक पहुंचाने और घायलों को अस्पताल भेजने की व्यवस्था की।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का शोक

मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सीएम ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना को लेकर न्यायिक जांच का आदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस घटना की सच्चाई जल्द ही सामने आएगी और उसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की। गृहमंत्री अमित शाह ने भी मुख्यमंत्री स्टालिन और राज्यपाल से फोन पर बातचीत की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

घटना के बाद की स्थिति

घायलों को तुरंत करूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अस्पताल में भारी भीड़ जमा हो गई, जहां मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के बाद उनके परिजनों को सौंपा जा रहा था। तमिलनाडु पुलिस के डीजीपी ने बताया कि रैली में 27,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे, जबकि पहले केवल 10,000 लोगों के जुटने का अनुमान था।

विजय ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका दिल टूट गया है और वह घायलों के लिए हर संभव सहायता करेंगे।

राजनैतिक नेताओं की प्रतिक्रिया

राजद नेता मनोज झा ने करूर में हुई इस भगदड़ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दुर्घटना नहीं, बल्कि मानव निर्मित संकट है। उन्होंने देश में ऐसे आयोजनों में भीड़ के प्रबंधन के लिए ठोस नीतियों की कमी को लेकर चिंता जताई। मनोज झा ने कहा कि ऐसे घटनाएं केवल तमिलनाडु में नहीं, बल्कि पूरे देश में हो रही हैं और यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि हम अभी तक भीड़ नियंत्रण के लिए प्रभावी योजनाएं बनाने में विफल रहे हैं।

भा.ज.पा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी हर संभव मदद प्रदान करेगी और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को हर तरह की मदद का आश्वासन दिया है।

प्रशासनिक और चिकित्सा मदद

तमिलनाडु के चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. सुगंती राजकुमारी ने कहा कि जिन दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, उनका इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और दवाइयां उपलब्ध हैं और घायलों को बेहतरीन इलाज दिया जा रहा है।

स्थानीय अधिकारियों ने भी पूरे घटनाक्रम का पुनरावलोकन किया है। पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा की जा रही है, क्योंकि इससे पहले TVK की रैलियों में इतनी भीड़ नहीं जुटी थी। इस बार रैली स्थल पर सुरक्षा के लिए 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन फिर भी स्थिति पर काबू पाना मुश्किल हो गया।

विजय का बयान और घटनाक्रम

विजय ने घटना के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह घटना बेहद दुखद है और वह इसके लिए जिम्मेदारी नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि जब वह रैली स्थल पर पहुंचे तो भीड़ पहले से ही बहुत बड़ी हो चुकी थी और उनके आने में देर हो गई, जिससे हालात और बिगड़ गए।

विजय ने यह भी कहा कि वह हमेशा से शांति बनाए रखने का पक्षधर रहे हैं और इस घटना को लेकर उनका दिल टूट चुका है। उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

जांच और कार्रवाई

तमिलनाडु पुलिस ने इस घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह भगदड़ उस समय मची जब अचानक लोग गिरने लगे और स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि आयोजन स्थल पर अधिक लोग जुट गए थे, जिसकी वजह से यह घटना घटी।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रैली की इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद क्या उचित सुरक्षा व्यवस्था थी और इस हादसे को रोका जा सकता था या नहीं।

स्थिति में सुधार

घटना के बाद से, करूर के अस्पतालों में चिकित्सा कर्मचारियों और राहत टीमों की भारी तैनाती की गई है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को ₹10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है, और घायलों के इलाज के लिए सभी संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

राज्य में इस घटना के बाद शोक की लहर दौड़ गई है और राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर पीड़ितों के परिवारों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

करूर की इस रैली में मची भगदड़ ने तमिलनाडु सहित पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना में हुई जानमाल की भारी क्षति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि भविष्य में राजनीतिक आयोजनों और बड़ी भीड़ वाले कार्यक्रमों के लिए अधिक सख्त सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण नीतियों की जरूरत है। इस घटना ने फिर से यह सवाल उठाया है कि जब इतनी बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं, तो क्या पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाते हैं?

अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। इस घटना के बाद तमिलनाडु में सुरक्षा उपायों को सुधारने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय हो सकते हैं।

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