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राजीव गांधी की पुण्यतिथि : एक आतंकवादी हमले में खोया भारत ने अपना सबसे युवा प्रधानमंत्री

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KKN  गुरुग्राम डेस्क | 21 मई 1991 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। श्रीपेरंबुदूर, तमिलनाडु में एक आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की जान गई, जिसकी योजना लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) ने बनाई थी। यह राजनीतिक हत्याकांड न केवल भारत की राजनीति की दिशा बदल गया, बल्कि यह दक्षिण एशिया के इतिहास में सबसे चर्चित हत्याओं में से एक बन गया।

क्या राजीव गांधी को अपने अंत का पूर्वाभास था?

पत्रकार नीना गोपाल ने अपनी किताब The Assassination of Rajiv Gandhi में लिखा है कि उन्होंने राजीव गांधी से उनकी मृत्यु के कुछ घंटे पहले इंटरव्यू लिया था। उस बातचीत में राजीव ने दक्षिण एशिया के कई नेताओं की हिंसक मौतों का जिक्र करते हुए कहा था:

“क्या आपने देखा है कि दक्षिण एशिया में जब कोई नेता कुछ बड़ा हासिल करने की कोशिश करता है, तब उसे गिरा दिया जाता है या उसकी हत्या हो जाती है? इंदिरा गांधी, शेख मुजीब, भुट्टो, भंडारनायके—सभी को देखिए।”

कुछ ही घंटों बाद, वही हुआ जिसकी उन्हें आशंका थी।

एलटीटीई के इंटरसेप्ट संदेशों में था राजीव की हत्या का जिक्र

1987 में श्रीलंका में तमिल उग्रवाद को रोकने के लिए राजीव गांधी ने भारतीय शांति सेना (IPKF) को भेजा था। इस निर्णय से एलटीटीई की नाराजगी चरम पर थी। 1990 से 1991 के बीच भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एलटीटीई के कई इंटरसेप्ट संदेशों को पकड़ा, जिनमें राजीव गांधी की हत्या की योजना का उल्लेख था।

कर्नल आर. हरिहरन के अनुसार, इन संदेशों में स्पष्ट निर्देश थे:

  • “राजीव गांधी अवरंड मंडलई अड्डीपोडलम” (राजीव गांधी के काफिले को उड़ा दो)

  • “डंप पन्नीडुंगो” (मार दो)

  • “मारनाई वेचीडुंगो” (हत्या कर दो)

इन संदेशों के बावजूद, राजीव गांधी की सुरक्षा में लापरवाही बरती गई, विशेषकर जब वे तमिलनाडु के दौरे पर थे।

21 मई की रात: श्रीपेरंबुदूर में क्या हुआ?

राजीव गांधी उस दिन रात लगभग 10 बजे श्रीपेरंबुदूर पहुंचे थे। वहां वे समर्थकों का अभिवादन कर रहे थे, फूलमालाएं स्वीकार कर रहे थे। उसी दौरान एक लड़की कविता सुनाती दिखी, और राजीव रुक गए। तभी एक महिला “धनु”, जो आत्मघाती दस्ते की सदस्य थी, चंदन की माला लेकर सामने आई।

राजीव के पैर छूने के बहाने वह झुकी और अपने शरीर से बंधे RDX विस्फोटक का बटन दबा दिया। धमाके में राजीव गांधी सहित कई लोगों की मौत हो गई।

कॉन्स्टेबल अनुसूया ने बाद में गवाही दी कि धमाके से ठीक पहले राजीव ने भीड़ को नियंत्रित करने का इशारा किया था, मानो उन्हें कुछ अजीब महसूस हुआ हो।

खुफिया इनपुट के बावजूद सुरक्षा में चूक क्यों?

इस हत्या को और भी दुखद बना देता है यह तथ्य कि खुफिया एजेंसियों ने पहले से ही संभावित हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन उनके दौरे पर सुरक्षा के मानक न्यूनतम थे।

उस समय केंद्र सरकार का पतन हो चुका था और चंद्रशेखर सरकार के बाद मध्यावधि चुनाव घोषित हुए थे। इस राजनीतिक अस्थिरता के बीच राजीव गांधी की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया, जो कि एक भारी भूल साबित हुई।

भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री: एक ऐतिहासिक जनादेश

राजीव गांधी ने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री पद संभाला। वे केवल 40 वर्ष के थे, जो उन्हें भारत का सबसे युवा प्रधानमंत्री बनाता है।

1984 के आम चुनावों में, कांग्रेस पार्टी ने 543 में से 414 सीटें जीतीं, जो आज तक का रिकॉर्ड है। उस जीत का उत्सव 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में तीन दिन तक रौशनी के साथ मनाया गया था

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद और ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की बहस

फरवरी 1986 में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवादित स्थल के ताले खोले जाने के फैसले को लेकर भी राजीव गांधी की भूमिका पर बहस होती रही है। कई विश्लेषकों ने इसे ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की रणनीति बताया, जबकि कुछ का मानना है कि यह निर्णय बिना प्रधानमंत्री की जानकारी के लिया गया था।

आईएएस वजाहत हबीबुल्ला, जो उस समय प्रधानमंत्री कार्यालय में थे, ने अपनी किताब My Years with Rajiv Gandhi: Triumph and Tragedy में लिखा:

“जब मैंने राजीव गांधी से इस निर्णय के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ कहा—नहीं, मुझे इस फैसले के बारे में आदेश पारित होने और क्रियान्वयन के बाद ही पता चला।”

राजीव गांधी की विरासत: एक आधुनिक भारत की नींव

राजीव गांधी का कार्यकाल कई सुधारों और विवादों का मिश्रण रहा। उन्होंने:

  • डिजिटल इंडिया की नींव रखी

  • टेलीकॉम क्रांति की शुरुआत की

  • पंचायती राज को सशक्त करने का प्रयास किया

हालांकि, उनके कार्यकाल में बोफोर्स घोटालाअसम समझौता, और पंजाब में उग्रवाद जैसे मुद्दों ने भी विवादों को जन्म दिया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

राजीव गांधी की हत्या के दूरगामी प्रभाव हुए:

  • देशभर में चुनाव अभियान स्थगित कर दिए गए

  • LTTE को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया

  • VIP सुरक्षा प्रणाली पर नए सिरे से विचार हुआ

  • SPG (Special Protection Group) की भूमिका और ताकत बढ़ाई गई

राजीव गांधी की 34वीं पुण्यतिथि पर भारत एक ऐसे नेता को याद करता है जिसने आधुनिक भारत का सपना देखा था और जिसकी जिंदगी एक आतंकवादी हमले में असमय समाप्त हो गई

उनकी हत्या आज भी सुरक्षा चूक, कूटनीतिक नीति, और राजनीतिक साहस पर गहन विचार का विषय है। यह घटना हमें लोकतंत्र की नाजुकताशांति स्थापना की कीमत, और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मज़बूत करने की आवश्यकता की याद दिलाती है।

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