भारत के पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में बढ़ते टैरिफ विवाद पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि कोई देश भारत के साथ अपने व्यवहार में बदलाव लाता है, तो भारत को इस पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25%+25% यानी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। साथ ही ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भी भारत को घेरने की कोशिश की है।
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ट्रंप के टैरिफ वॉर पर शशि थरूर का बयान
शशि थरूर ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “जो कुछ भी हो रहा है वह चिंताजनक है। एक ऐसा देश, जिसके साथ हमारे अच्छे संबंध थे, अगर वही देश अपना व्यवहार बदलता है, तो हमें बहुत सोचने की जरूरत पड़ेगी।” थरूर का कहना था कि यदि अमेरिकी सरकार अपना दृष्टिकोण बदलती है, तो भारत को अपने आर्थिक और राजनीतिक कदमों पर फिर से विचार करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दो-तीन हफ्तों में भारत को अमेरिका के साथ बातचीत के जरिए इस मसले का समाधान ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए। “भारत को अपने राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखते हुए कदम उठाने होंगे, और दूसरे देशों को भी देखने की आवश्यकता होगी।”
भारत को अमेरिकी सामान पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की सलाह
शशि थरूर ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को अमेरिकी सामान पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने का विचार करना चाहिए। उनका मानना था कि किसी भी देश को भारत को धमकाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। थरूर ने कहा, “हम अमेरिका के साथ 90 बिलियन डॉलर का कारोबार करते हैं, और अगर अमेरिकी सामान की कीमतें 50 प्रतिशत बढ़ जाएं, तो भारतीय खरीदारों को यह सवाल उठाना होगा कि हमें अमेरिकी सामान क्यों खरीदना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो हमें भी उनके सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना चाहिए। हमारा औसत टैरिफ वर्तमान में 17 प्रतिशत है, लेकिन हमें इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ा देना चाहिए। हमें यह सवाल करना चाहिए कि क्या अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्ते की कद्र करता है। अगर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, तो हमें भी उनसे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए।”
ट्रंप का टैरिफ वॉर और उसके परिणाम
डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद उन्होंने भारत के रूस से तेल खरीदने पर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। फिर ट्रंप ने इन शुल्कों को और बढ़ाने की बात कही, और अंततः 25 प्रतिशत शुल्क और बढ़ाने का फैसला किया। इस फैसले ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को और जटिल बना दिया है।
इसके अलावा, ब्राजील भी उन देशों में शामिल है जिन्हें अमेरिका द्वारा इस तरह के भारी शुल्क का सामना करना पड़ा है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत और ब्राजील जैसे देशों को अमेरिकी नीति के कारण वैश्विक व्यापार में नुकसान उठाना पड़ेगा?
भारत का रुख और आगामी कदम
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जो भी जरूरी कदम उठाएगा, वह करेगा। हालांकि, अभी तक भारत की तरफ से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। शशि थरूर की सलाह के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत अमेरिकी सामान पर शुल्क बढ़ाने के विचार पर गंभीरता से काम कर सकता है।
भारत ने यह भी कहा है कि वह अपनी आर्थिक सुरक्षा और हितों के लिए किसी भी प्रकार की नीतिगत बदलाव करने से पीछे नहीं हटेगा। अब देखना यह है कि भारत इस टैरिफ विवाद के प्रति अपनी प्रतिक्रिया किस प्रकार देता है और क्या अमेरिका के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाया जाता है।
रूस से तेल खरीद पर अमेरिका की आपत्ति
इसके अलावा, अमेरिका ने भारत की रूस से तेल खरीद पर भी चिंता जताई है। भारत और रूस के बीच यह संबंध रणनीतिक महत्व रखते हैं, और भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका के प्रतिबंधों से भारत की स्थिति और भी जटिल हो सकती है, क्योंकि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल की खरीदारी जारी रखनी होगी।
भारत और अमेरिका के रिश्तों का भविष्य
अमेरिका और भारत के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते रहे हैं। दोनों देशों ने साथ मिलकर कई क्षेत्रों में काम किया है, लेकिन हाल के दिनों में व्यापारिक तनाव बढ़ने के साथ-साथ राजनीतिक संबंध भी प्रभावित हो रहे हैं। इस स्थिति में, शशि थरूर की सलाह और भारत का संभावित रुख अमेरिका के साथ भविष्य में संबंधों को नई दिशा दे सकता है।
भारत के लिए यह समय यह सोचने का है कि उसे अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए। क्या भारत अपने आर्थिक हितों को देखते हुए अमेरिकी नीतियों के खिलाफ खड़ा होगा, या वह बातचीत के माध्यम से इस संकट का हल निकालेगा?
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसलों ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई चुनौती दी है। शशि थरूर का यह बयान और उनके द्वारा दी गई सलाह, भारत को इस स्थिति पर सोचने और अपनी रणनीति तय करने का अवसर प्रदान करता है। भारत को अब यह तय करना होगा कि वह किस तरह से अपनी व्यापारिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस मुद्दे पर कदम उठाएगा।



