Home Society सात फेरो के सातो वचन, प्यारी दुल्हनिया भूल ना जाना…

सात फेरो के सातो वचन, प्यारी दुल्हनिया भूल ना जाना…

​दिव्यांग और गरीबी की लडाई मे भारी पड़ा दो चुटकी सिंदूर/ मूकबधिर संजीत ने पेश किया आदर्श विवाह का नमूना/ हर जुबान पर हो रही है बेजुबान संजीत की चर्चा/ चेहराकला के पूनम ने मूकबधिर संजीत को चुना अपना जीवनसाथी

संतोष कुमार गुप्ता

मीनापुर। राज्य सरकार के दहेजबंदी कानून का सबसे बड़ा लाभ उनलोगो के लिए जिनका किस्मत गरीबी के दौर से गुजर रहा है। दुसरी बात यह कि शादी सामारोह को लोग अत्याधुनिक तरीके से सम्पन्न कराते है। किंतु दो चुटकी सिंदूर की क्या होता है कोई संजीत और पूनम से पूछे।

मीनापुर प्रखण्ड के मुस्तफागंज बाजार पर अखबार बेचने वाला मूकबधिर संजीत कुमार के लिए शनिवार की रात खास पल था। एक तरफ दिव्यांग संजीत तो दुसरी तरफ गरीबी की दलदल मे फंसी पूनम। किंतु दिव्यांग और गरीबी की लडाई मे दो चुटकी सिंदूर जीत गया। वैशाली के महुआ प्रखण्ड के चेहराकला गांव मे वधू पक्ष के दरवाजे पर ना पंडाल ना ही डीजे का शोर। दरवाजे पर अन्य दिनो की तरह बिजली का एक बल्व जल रहा है। गरीबी ऐसी की अगर वहां बिजली चली जाये तो जेनरेटर का भी कोई व्यवस्था नही है। शनिवार की रात जब संजीत की बाराती गंजबाजार से चेहराकला के लिए पहुंची तो गांव वाले इकट्ठा हो गये। आनन फानन मे गांव वाले अगल बगल से बेंच और चौकी की व्यवस्था कर वर पक्ष के लोगो को बैठने का व्यवस्था किया। गरीबी ऐसी की वधू पक्ष के लोग कुर्सी की व्यवस्था भी नही कर सके। आर्थिक मजबूरी के कारण वरमाला का सेज भी नही बनाया जा सका। बाराती दरवाजे पर पहुंचने के बाद ना ही वरमाला ना ही तिलक का रस्म हुआ। गांव से मांग कर लाये गये कुर्सी पर बैठाकर दुल्हा का परीछावन किया गया। इसके बाद सीधे मड़वा पर सात फेरो  के रस्म निभाये गये। दो चूटकी सिंदूर को साक्षी मान सात फेरो के सातो वचन पढे गये। चेहराकला के छठी कक्षा तक पढ चुकी पूनम ने मूकबधिर संजीत को अपना जीवनसाथी चुना। उसके चेहरे पर मुस्कान दिख रहे थे। पूनम के घर पर गरीबी की बानगी साफ तौर पर दिख रही थी। पिताजी नशे की गिरफ्त मे रहने के कारण उसका घर आर्थिक तंगी की चपेट मे आ गया था। पुरे रस्म मे पिताजी कहीं नजर भी नही आये। नाना सच्चिदानंद साह ने कन्यादान की रस्म निभायी। पुरे गांव वाले इस अनोखी शादी से खुश थे। मुस्तफागंज बाजार के चाय दुकानदार गरीबनाथ साह के बेटे संजीत कुमार को जुबान नही है। वह जन्म से ही मूकबधिर है। वावजूद वह पेपर बेचता ही नही है बल्कि अक्षर को देखकर इशारे मे बता देता है कि क्या लिखा है। वह चाय से लेकर जलेबी और पकौड़े भी बना लेता है। भले ही वह बेजुबान है किंतु उसने आदर्श विवाह की बानगी पेश की है।

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