भारत के प्रमुख हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन 2 अक्टूबर 2025 को तड़के हुआ। वह 89 वर्ष के थे और लंबे समय से उम्र संबंधित बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका निधन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में अपनी बेटी के घर हुआ। पंडित छन्नूलाल मिश्र का परिवार इस समय शोक में डूबा हुआ है।
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पंडित छन्नूलाल मिश्र की जीवित विरासत
पंडित छन्नूलाल मिश्र भारतीय शास्त्रीय संगीत के उन कुछ दिग्गजों में से थे जिन्होंने इस कला रूप को न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका गायन संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा गूंजता रहेगा। उनका योगदान भारतीय संगीत जगत में अतुलनीय था।
पंडित मिश्र की बेटी नम्रता मिश्रा ने मीडिया से कहा कि उनके पिता पिछले 17-18 दिनों से उम्र संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती थे और अंततः गुरुवार सुबह लगभग 4 बजे उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शाम 5 बजे वाराणसी में किया जाएगा। पंडित मिश्र के परिवार में उनके बेटे रामकुमार मिश्र (जो एक प्रसिद्ध तबला वादक हैं) और तीन बेटियां हैं।
पंडित मिश्र का योगदान और उनकी पहचान
पंडित छन्नूलाल मिश्र को भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रतिष्ठित और समर्पित कलाकार माना जाता था। वे न केवल संगीत के प्रति अपने गहरे प्यार के लिए प्रसिद्ध थे, बल्कि उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके संगीत ने न केवल भारतीय श्रोताओं को, बल्कि विदेशों में भी भारतीय संगीत की सुंदरता का अहसास कराया।
उनका गायन भारतीय संगीत की शुद्धता और लय के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता था। पंडित मिश्र के संगीत की शैली उनके गहरे ज्ञान, अनुभव और भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति उनके सम्मान का प्रतीक थी। उनके द्वारा प्रस्तुत रागों और गायन की विशिष्टता ने उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रभावशाली और प्रमुख गायकों में स्थान दिलवाया।
देशभर से श्रद्धांजलियां
पंडित छन्नूलाल मिश्र के निधन की खबर मिलते ही, देश भर से श्रद्धांजलियां आनी शुरू हो गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पंडित मिश्र को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पंडित मिश्र के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा, “प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। वे जीवनभर भारतीय कला और संस्कृति के समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उनका योगदान भारतीय शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ भारतीय परंपरा को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने में था। यह मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे हमेशा उनका आशीर्वाद और स्नेह मिला। शोक की इस घड़ी में मैं उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ओम शांति!”
सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी पंडित मिश्र को श्रद्धांजलि दी और लिखा, “भारतीय शास्त्रीय संगीत के मर्मज्ञ, ‘पद्म विभूषण’ प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का निधन अत्यंत दुःखद और शास्त्रीय संगीत विधा की अपूरणीय क्षति है। आपने अपना पूरा जीवन भारतीय शास्त्रीय संगीत के उत्थान में समर्पित कर दिया। आपका गायन कला साधकों के लिए प्रेरणा है। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति और उनके शोकाकुल परिवारों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!”
पंडित मिश्र का संगीत और शिक्षाओं का प्रभाव
पंडित छन्नूलाल मिश्र का संगीत सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य हिस्सा था। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनका संगीत न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी भारतीय कला को पहचान दिलाने का माध्यम बना।
वह हमेशा शास्त्रीय संगीत के कच्चे और सच्चे रूपों को जीवित रखते थे, और उनकी गायकी में रागों की गहराई और भावनाओं का अद्भुत मिश्रण था। उनके कृतित्व ने शास्त्रीय संगीत के शुद्ध रूप को संरक्षित रखा।
उनकी शिक्षाएं और उनकी कड़ी मेहनत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। पंडित छन्नूलाल मिश्र ने न केवल संगीत की प्रस्तुति की, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की विधाओं को सीखने और समझने का एक नया दृष्टिकोण भी दिया।
पंडित मिश्र के परिवार का योगदान
पंडित छन्नूलाल मिश्र का परिवार भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को बनाए रखने में उनका साझीदार रहा है। उनका बेटा रामकुमार मिश्र, एक प्रसिद्ध तबला वादक, उनके संगीत से प्रेरित होकर उसी दिशा में अपने करियर को आगे बढ़ा रहे हैं। पंडित मिश्र की तीन बेटियों ने भी संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और परिवार की कला परंपरा को संरक्षित किया।
पंडित मिश्र का सम्मान और पुरस्कार
पंडित छन्नूलाल मिश्र को भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण जैसे सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा, उनकी संगीत यात्रा ने उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया।
उनकी गायकी की विशेषता यह थी कि वह संगीत के शुद्ध रूप को सहजता और भावनाओं के साथ प्रस्तुत करते थे। उनका संगीत ना सिर्फ एक कला था, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव भी था, जो श्रोताओं को गहरे मानसिक और आत्मिक स्तर पर जोड़ता था।
भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अप्रतिम धरोहर
पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एक अप्रतिम क्षति है। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनका गायन और उनके सिद्धांत भारतीय संगीत के इतिहास में अनमोल धरोहर बनकर रहेंगे।
उनका योगदान न केवल उनकी कला के रूप में, बल्कि उनके जीवन के रूप में भी लोगों को प्रेरणा देता रहेगा। पंडित मिश्र ने संगीत की दुनिया में जो स्थान बनाया है, वह आज भी कई संगीतकारों के लिए एक आदर्श और मार्गदर्शन के रूप में कार्य करता है।
पंडित छन्नूलाल मिश्र का निधन भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका संगीत, उनकी शिक्षाएं और उनका योगदान भारतीय कला के इतिहास में अमर रहेगा। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकता, लेकिन उनका संगीत हमेशा हमारे साथ रहेगा। उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार और अनुयायियों को इस कठिन समय को सहन करने की शक्ति मिले।
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जीवन एक प्रेरणा था, जो हम सभी के लिए एक गहरी सीख छोड़ गया है। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा और भारतीय शास्त्रीय संगीत की धरोहर को वह आगे बढ़ाते रहेंगे।



