Home Society मीनापुर का गोरीगामा पंचायत बना कैंसर जोन

मीनापुर का गोरीगामा पंचायत बना कैंसर जोन

कृष्णमाधव सिंह

मुजफ्फरपुर। इसे सरकार की उदासिनता कहें या लोगो की विवशता। किंतु, ये सच है कि बिहार का एक पंचायत केंसर जोन बनता जा रहा है और स्वास्थ्य महकमा हाथ पर हाथ धरे बैठी है। दरअसल, मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर थाना क्षेत्र का गोरीगामा पंचायत कैंसर का जबरदस्त प्रकोप झेलने को विवश है। पिछले दस वर्षो में इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने से 21 लोगो की मौत हो गई है। वही पांच अन्य आज भी इस रोग की चपेट में है।

इसी वर्ष फरबरी महीने में मुखिया अनामिका ने बीडीओ को पत्र लिख कर जांच की मांग की तब जाकर प्रशासन की नींद खुला। जांच के दौरान चौका देने वाला खुलाश हुआ  है। जांच अधिकारी ने पंचायत के दो दर्जन से अधिक बच्चे, युवती व बृद्ध की कैंसर से मौत होने की पुष्टि करके खलबली मचा दी है।

कैंसर से मरने वालों में टेंगराहां दक्षिण टोला कें 35 वर्षिय उदय लक्षमी, 45 वर्षिय नगीना देवी, 62 वर्षिय राम किशोर सिंह, 43 वर्षिय फुल देवी, 42 वर्षिय गीता देवी, 42 वर्षिय कारो देवी, 47 वर्षीय गणेश सिंह, 50 वर्षिय नागेंन्द्र सिंह, 49 वर्षिय कुशमी देवी, टेंगराहां नया टोला कें 45 वर्षिय गगन देव साह, 65 वर्षिय यदु सिंह, 40 वर्षिय महेश सिंह, 40 वर्षिय दुलारी देवी, 15 वर्षिय नीतु कुमारी, 22 वर्षिय ममता देवी, 30 वर्षिय जगन्नाश साह, 7 वर्षिय वंदना कुमारी तथा गोरीगामा गांव के 85 वर्षिय शिव शंकर सिंह, 60 वर्षिय कपील देव नारायण सिंह, 60 वर्षिय वालेश्वर सिंह, 70 वर्षिय लक्षमेश्वर सिंह, 60 वर्षिय उदय नारायण सिंह व 46 वर्षिय संजय सिंह का नाम शामिल हैं।

वही, आज भी 55 वर्षिय राम नरेश सिंह, 50 वर्षिय बिन्देश्वर साह, 60 वर्षिय नंद किशोर राय, 45 वर्षिय गीता देवी व 35 वर्षिय अजय कुमार कैंसर से पीड़ीत है और जीवन व मौत के बीच झुल रहें हैं। बावजूद इसके इनकी सुधि लेने वाला कोई नही है।

मुखिया अनामिका से प्राप्त शिकायत के आलोक में मुजफ्फरपुर के सिर्विल सर्जन डॉ. ललीता सिंह ने जांच के आदेश भी दिये। जांच के दौरान पाया गया कि यहां का पेयजल दूषित है। जो, गांव में कैंसर फैलने का प्रधान कारण बन गया है। किंतु, इसके बाद भी आज तक गांववालो को शुध्द पेयजल मुहैय्या कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नही की गई है।

बतातें चलें कि गांव में दो करोड़ रुपये की लागत से एक जलमिनार निर्माणाधीन है। इसी प्रकार विधायक योजना मद सें लगाये गये अधिकांश चापाकल या तो बंद है या फिर दूषित पेयजल ही दे रहा है। गोरीगामा पंचायत में 1978 सें ही अतिरिक्त स्वास्थय उपकेन्द्र लोगो के लिए बेकार पड़ा है।  फिलहाल, सप्ताह में सिर्फ एक दिन गुरूवार को आयुष के जानकार डॉ. महेंन्द्र प्रसाद व एएनएम कुमोद कुमारी के सहारें लोगो के स्वास्थ्य की देख रेख की कोरम को पुरा किया जाता है। गांव के शिवेन्द्र सिंह व संजय सिंह सहित एक दर्जन से अधिक लोगो ने सरकार से अबिलम्ब हस्तक्षेप करने की मांग की है।

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