होमNationalमनोज तिवारी का भारतीय सेना को सलाम: 'ऑपरेशन सिंदूर' पर आधारित गाना...

मनोज तिवारी का भारतीय सेना को सलाम: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित गाना ‘सिंदूर की ललकार’ हुआ रिलीज

Published on

KKN गुरुग्राम डेस्क | भोजपुरी सुपरस्टार, गायक और भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने भारतीय सेना के अदम्य साहस और शौर्य को समर्पित करते हुए ‘सिंदूर की ललकार’ नामक एक नया देशभक्ति गीत रिलीज किया है। यह गाना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित है, जिसमें भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पीओके में आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त किया था।

मनोज तिवारी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर गाने का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा –

“यह गाना हमारी महान भारतीय सेना को समर्पित है। जय हिंद।”

उन्होंने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ एक तस्वीर भी साझा की और बताया कि यह गाना राष्ट्र की वीर बेटियों और बेटों को समर्पण है।

ऑपरेशन सिंदूर: क्या है इसकी पृष्ठभूमि?

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकियों के 9 ठिकानों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया गया।

इस कार्रवाई का नाम ‘सिंदूर’ इसलिए रखा गया क्योंकि यह भारतीय महिलाओं के सिंदूर के प्रतीक के तौर पर शहादत और सम्मान को दर्शाता है। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की सटीकता, बहादुरी और देशभक्ति का प्रतीक बन गया।

गाने का भावनात्मक संदेश और प्रस्तुति

सिंदूर की ललकार’ गाने की शुरुआत एक आतंकवादी द्वारा छुट्टियां मना रहे एक परिवार को दूरबीन से देखने से होती है। इसके बाद घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू होती है, जिसमें आतंकियों द्वारा हमले, शोक में डूबीं महिलाएं, चीख-पुकार और फिर भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई को दिखाया गया है।

गाने में दर्शाए गए भाव:

  • पीड़ित परिवारों का दर्द और आंसू

  • सेना का प्रतिशोध और वीरता

  • राष्ट्र के लिए एकजुटता का संदेश

  • आतंकवाद के खिलाफ सशक्त प्रतिक्रिया

गीत का निर्माण: शब्दों और संगीत का मेल

  • गीतकार व संगीतकार: किशोर दुलरुआ

  • संगीत संयोजन: गौतम यादव

  • स्वर: मनोज तिवारी

  • रिलीज प्लेटफॉर्म: सोशल मीडिया और यूट्यूब

गाने के बोल अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक हैं, जो सीधे दिल को छू जाते हैं। संगीत और शब्दों का संयोजन ऐसा है कि यह हर देशभक्त की भावना को झकझोरता है।

पवन सिंह की प्रस्तुति: ‘सिंदूर’ से पहले ही जीत चुके दिल

मनोज तिवारी के इस गीत से पहले भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह ने भी ‘सिंदूर’ नामक देशभक्ति गाना 11 मई को अपने यूट्यूब चैनल ‘Pawan Singh Official’ पर रिलीज किया था। इस गाने में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस भावुक भाषण को भी शामिल किया था, जिसमें पीएम ने कहा:

“साथियों, इस आतंकी हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना भाई, किसी ने अपना जीवन साथी…”

गाने में पीड़ा और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत मिश्रण था। पवन सिंह की दमदार आवाज, गहरी संवेदना और गाने की प्रस्तुति ने इसे वायरल बना दिया।

जनता की प्रतिक्रिया: भावुक और गर्वित

सिंदूर की ललकार’ के रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर यह गाना वायरल हो गया है। ट्विटर (अब एक्स), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लोग इसे शेयर कर रहे हैं और सेना को सलाम कर रहे हैं।

कुछ प्रतिक्रियाएं:

  • “गाने ने रोंगटे खड़े कर दिए, जय हिंद ??”

  • “ऐसा गाना सिर्फ दिल से निकले हुए शब्दों से ही बन सकता है”

  • “मनोज तिवारी जी, आपने भारतीय सेना के जज़्बे को सही मायनों में सम्मान दिया है”

सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व

मनोज तिवारी और पवन सिंह जैसे कलाकारों द्वारा बनाए गए देशभक्ति गीत न केवल मनोरंजन का माध्यम हैं, बल्कि ये जनता में देशप्रेम और एकजुटता की भावना को भी मजबूत करते हैं।

मनोज तिवारी – एक कलाकार और नेता:

एक सांसद के रूप में उनकी जिम्मेदारी और एक गायक के रूप में उनका जज्बा दोनों मिलकर उन्हें जनता के और करीब लाते हैं। इस गीत के ज़रिए वे सेना और जनता के बीच एक सेतु का काम कर रहे हैं।

गानों के माध्यम से देशभक्ति का संचार

इतिहास गवाह है कि जब भी देश पर संकट आया है, संगीत ने लोगों को जोड़ा है। ‘सिंदूर की ललकार’ और ‘सिंदूर’ जैसे गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना का एक हिस्सा हैं। ये उन कहानियों को जीवित रखते हैं जो हमें निरंतर देश के प्रति सजग और गर्वित बनाए रखती हैं।

सिंदूर की ललकार’ केवल एक गाना नहीं, बल्कि देश के वीर जवानों के बलिदान को श्रद्धांजलि है। यह गाना दिखाता है कि जब भारत पर संकट आता है, तब हमारा हर नागरिक—कलाकार हो या आमजन—अपने-अपने तरीके से राष्ट्र को नमन करता है।

इस गीत ने यह सिद्ध कर दिया है कि देशभक्ति की भावना न संगीत की सीमा जानती है, न भाषा की। यह गाना आने वाले वर्षों तक भारतीय सेना के अदम्य साहस की याद दिलाता रहेगा

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

More like this

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में चौकाने वाला खुलाशा, क्या हर गांव में था स्कूल?

आज भी उपलब्ध है थॉमस मुनरो और विलियम एडम की रिपोर्ट KKN ब्यूरो। ब्रिटिश शासन...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार में शराबबंदी: सामाजिक सुधार या भ्रष्टाचार की नई अर्थव्यवस्था?

क्या शराबबंदी सफल हुई या उसने भ्रष्टाचार को नया ईंधन दिया? KKN ब्यूरो। एक  अप्रैल...

दल-बदल की राजनीति पर लगाम कब?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल: विचारधारा बड़ी या सत्ता? कौशलेन्द्र झा KKN ब्यूरो। भारतीय राजनीति में...

श्रेष्ठता का भ्रम: जब गाली, दोषारोपण और अपमान बन जाते हैं सामाजिक फैशन

क्या दूसरों को नीचा दिखाकर कोई वास्तव में बड़ा बन सकता है? KKN ब्यूरो। आज...

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...

“हाँ इश्क है” के लोकार्पण समारोह में जुटे कवि और साहित्य प्रेमी, पटना में दिखा साहित्य का रंग

पटना में रविवार को साहित्य, कविता और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक यादगार आयोजन देखने...
00:07:59

कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़...

मिडिल ईस्ट: महायुद्ध की दहलीज़ पर विभाजन और तड़पता हुआ क्षेत्र

KKN ब्यूरो। संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़रायल ने अपने सबसे बड़े सैन्य अभियान...

मिट्टी की खुशबू से मोबाइल की रिंगटोन तक: पांच दशक में बदलता ग्रामीण समाज

जब शाम ढलती थी और पूरा गांव एक आंगन में सिमट आता था KKN ब्यूरो।...