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करवा चौथ 2025: भारत भर में व्रत, सामुदायिक उत्सव और कब निकलेगा चाँद

भारत में शादीशुदा महिलाएँ करवा चौथ के अवसर पर पूरे दिन उपवासी रहती हैं, और व्रत चाँद के दर्शन के बाद ही टूटता है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि को मनाया जाता है। करवा चौथ का व्रत महिलाओं के लिए अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है।

 बिहार की राजधानी पटना में, 2025 में करवा चौथ का चाँद 7:48 बजे रात को दिखाई देगा। यह समय पटना के हजारों महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके साथ ही उनका उपवास समाप्त होता है। लेकिन भारत के विभिन्न शहरों में चाँद के दर्शन का समय अलग-अलग होता है, और यह समय महिलाओं को उनके व्रत की समाप्ति के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

करवा चौथ: उपवास और पूजा का महत्व

करवा चौथ का मुख्य उद्देश्य उपवास और पूजा के माध्यम से पति की लंबी उम्र की कामना करना है। महिलाएँ सुबह सूर्योदय के बाद उपवास शुरू करती हैं, और पूरे दिन पानी और खाना नहीं खातीं। वे चाँद के दर्शन करने तक उपवासी रहती हैं। उपवासी रहने के बाद महिलाएँ चाँद को देख कर, उसे छलनी में देखकर पूजा करती हैं और फिर व्रत तोड़ती हैं।

यह दिन महिलाओं के लिए एक अवसर है जब वे अपने पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं। महिलाएँ आम तौर पर इस दिन पारंपरिक कपड़े पहनती हैं, अक्सर लाल या सुनहरे रंग की साड़ियाँ पहनना पसंद करती हैं और हाथों में मेहंदी लगवाती हैं। इस अवसर पर घरों में हरियाली और खुशी का माहौल होता है, जहां महिलाएँ आपस में मिलकर व्रत के दौरान की कहानियाँ साझा करती हैं।

करवा चौथ में चाँद का उदय

करवा चौथ का सबसे महत्वपूर्ण क्षण चाँद का उदय होता है। जब चाँद दिखाई देता है, तभी महिलाएँ अपना उपवास तोड़ सकती हैं। चाँद का समय हर शहर में अलग-अलग होता है, जो स्थान के अनुसार भिन्न होता है। इसलिए, विभिन्न स्थानों पर महिलाओं का चाँद के आने का समय अलग-अलग होता है।

कुछ शहरों में चाँद जल्दी उगता है, जबकि अन्य शहरों में देर से दिखाई देता है। चाँद का यह समय स्थान, समय क्षेत्र और ऊँचाई जैसी कई बातों पर निर्भर करता है। इसलिए, हर शहर का अपना विशेष समय होता है, जब महिलाएँ अपना उपवास समाप्त करती हैं।

प्रमुख शहरों में करवा चौथ 2025 के चाँद के उदय का समय

भारत भर में करवा चौथ के दौरान चाँद के उदय का समय विभिन्न शहरों में भिन्न होता है। यहाँ कुछ प्रमुख शहरों में चाँद के उगने का समय दिया गया है, जो महिलाओं के लिए व्रत समाप्ति का संकेत होता है:

  • पटना: 7:48 बजे शाम

  • दिल्ली: 8:13 बजे शाम

  • नोएडा: 8:12 बजे शाम

  • गुरुग्राम: 8:14 बजे शाम

  • शिमला: 8:06 बजे शाम

  • देहरादून: 8:05 बजे शाम

  • चंडीगढ़: 8:09 बजे शाम

  • जयपुर: 8:23 बजे शाम

  • लखनऊ: 8:02 बजे शाम

  • कानपुर: 8:06 बजे शाम

  • प्रयागराज: 8:02 बजे शाम

  • गोरखपुर: 7:52 बजे शाम

  • हरिद्वार: 8:05 बजे शाम

  • जम्मू: 8:11 बजे शाम

  • भुवनेश्वर: 7:58 बजे शाम

  • रायपुर: 8:01 बजे शाम

  • इंदौर: 8:34 बजे शाम

  • भोपाल: 8:26 बजे शाम

  • अहमदाबाद: 8:47 बजे शाम

  • गांधीनगर: 8:46 बजे शाम

  • मुंबई: 8:55 बजे शाम

  • चेन्नई: 8:38 बजे शाम

  • कोलकाता: 7:42 बजे शाम

जैसा कि देखा जा सकता है, मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में चाँद का उदय थोड़ा देर से होगा, जो 8:47 बजे और 8:55 बजे के आस-पास होगा। वहीं पटना और गोरखपुर जैसे शहरों में चाँद जल्दी उगेगा, जो 7:48 बजे और 7:52 बजे के आसपास होगा। ये समय में अंतर भारत के विभिन्न स्थानों में करवा चौथ के अनुभव को और भी खास बनाता है।

करवा चौथ में सामुदायिक भावना और परंपरा

करवा चौथ सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के बीच सामुदायिक और पारंपरिक संबंधों को भी मजबूत करता है। यह दिन महिलाओं के लिए एक साथ आने का अवसर होता है, जहाँ वे एक-दूसरे से मिलती हैं, आपस में अनुभव साझा करती हैं और अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करती हैं।

इस दिन महिलाएँ एक-दूसरे के साथ चाँद का इंतजार करती हैं, और परिवारों में खुशी का माहौल होता है। पति भी इस दिन अपनी पत्नी के साथ होते हैं, और व्रत पूरा होने के बाद उन्हें पानी और भोजन प्रदान करते हैं। चाँद का उदय एक खास क्षण होता है, जो इस दिन की कठिन तपस्या को समाप्त करता है।

करवा चौथ का सांस्कृतिक महत्व

करवा चौथ भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह विवाहिक रिश्तों की मजबूती और महिलाओं की श्रद्धा का प्रतीक भी है। शुरू में यह पर्व उत्तर भारत तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इसे देश के अन्य हिस्सों में भी मनाया जाने लगा है, और अब यह एक राष्ट्रीय पर्व बन चुका है।

यह उपवासी होना महिलाओं की समर्पण की भावना को दर्शाता है, और यह पति-पत्नी के बीच संबंधों की गहरी मजबूती को प्रदर्शित करता है। जैसा कि समय बदल रहा है, करवा चौथ को न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में मनाया जाने लगा है। सोशल मीडिया पर भी महिलाएँ इस दिन की तस्वीरें साझा करती हैं, जिससे यह पर्व और भी वैश्विक पहचान प्राप्त कर रहा है।

करवा चौथ की भविष्यवाणी

जैसे-जैसे भारत और दुनिया भर में भारतीय समुदायों की संख्या बढ़ रही है, करवा चौथ के उत्सव का भविष्य भी उज्जवल है। आने वाले वर्षों में यह पर्व और भी व्यापक रूप से मनाया जाएगा, और शायद और भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान प्राप्त करेगा। यह पर्व आधुनिक समय में भी अपनी पारंपरिक मान्यताओं और मूल्यों को बनाए रखेगा।

यह पर्व समय के साथ विकसित हुआ है, और इसके रूप में कुछ बदलाव भी आए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर महिलाएँ अपनी पारंपरिक पोशाक, मेहंदी और उत्सव की तस्वीरें साझा करती हैं, जिससे यह पर्व और भी रंगीन और आधुनिक हो गया है।

करवा चौथ 2025 एक महत्वपूर्ण दिन है, जब भारत भर की महिलाएँ उपवासी रहेंगी और अपने पतियों की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करेंगी। चाँद का उदय इस दिन का सबसे अहम क्षण होता है, जो महिलाओं को उनके व्रत को समाप्त करने का संकेत देता है। यह पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह विवाहिक रिश्तों की श्रद्धा, प्रेम और सम्मान का प्रतीक भी है। चाहे वह पटना हो, मुंबई हो या चेन्नई, हर शहर में करवा चौथ की महत्ता समान है और इस पर्व का जश्न पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है।

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