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ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

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KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से लेकर राज्य सरकारों की योजनाओं तक, गांवों को शहरों से जोड़ने का काम हुआ है। लेकिन इन सड़कों पर एक नई समस्या खड़ी हो गई है—अनियोजित और अवैज्ञानिक स्पीड ब्रेकर। गांवों में कहीं स्कूल के सामने, कहीं पंचायत भवन के पास, तो कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति के घर के सामने सड़क को काटकर स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं। इनमें से अधिकांश न तो तकनीकी मानकों के अनुरूप होते हैं और न ही इनके निर्माण की वैधानिक अनुमति ली जाती है। नतीजा यह है कि सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, वाहनों का रखरखाव खर्च बढ़ रहा है, ईंधन की बर्बादी हो रही है और यात्रियों के शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

क्या स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए कोई नियम है?

जी हां…। भारत में स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए Indian Roads Congress (IRC) ने विस्तृत मानक तय किए हैं। वर्तमान में IRC:99-2018 दिशा-निर्देश लागू हैं। इनके अनुसार स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई, चौड़ाई, स्थान, संकेतक और रंग तक निर्धारित हैं। मानकों के अनुसार स्पीड ब्रेकर केवल वहीं बनाए जाने चाहिए जहां वास्तव में गति नियंत्रण आवश्यक हो, जैसे: स्कूल के सामने, अस्पताल के पास, भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र, दुर्घटना संभावित स्थान और पैदल पार पथ। इसके अलावा स्पीड ब्रेकर के पहले चेतावनी संकेत और रिफ्लेक्टिव पेंट भी जरूरी हैं।

ग्रामीण इलाकों में समस्या क्यों बढ़ रही है?

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर निम्न स्थितियां देखने को मिलती हैं: स्थानीय दबाव में सड़क पर मिट्टी या कंक्रीट डालकर स्पीड ब्रेकर बना देना। पंचायत या स्थानीय स्तर पर बिना तकनीकी स्वीकृति निर्माण। सड़क निर्माण एजेंसियों द्वारा मानक की अनदेखी और दुर्घटना रोकने के नाम पर मनमाने ढंग से अवरोध खड़े कर देना। कई मामलों में तो स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई निर्धारित मानक से कई गुना अधिक होती है, जिससे दोपहिया वाहन चालक उछल जाते हैं और दुर्घटनाएं होती हैं।

स्पीड ब्रेकर से कितना नुकसान होता है?

  1. ईंधन की बर्बादी- हर स्पीड ब्रेकर पर वाहन को धीमा करना और फिर गति पकड़नी पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार ब्रेक और एक्सीलरेशन से ईंधन खपत बढ़ती है। ग्रामीण सड़कों पर यदि हर कुछ सौ मीटर पर स्पीड ब्रेकर हो तो लाखों लीटर अतिरिक्त ईंधन खर्च होता है।
  2. वाहन को नुकसान- सबसे अधिक प्रभावित होते हैं: शॉक एब्जॉर्बर, सस्पेंशन सिस्टम, टायर, चेसिस और ब्रेक सिस्टम। विशेषकर ट्रैक्टर, एम्बुलेंस और स्कूल वाहनों को अधिक नुकसान होता है।
  3. मानव शरीर पर प्रभाव- चिकित्सकों के अनुसार लगातार झटके से: कमर दर्द, रीढ़ की समस्याएं, गर्दन दर्द, गर्भवती महिलाओं को परेशानी और बुजुर्गों में जोड़ों की समस्या बढ़ सकती है।

क्या सभी स्पीड ब्रेकर वैध होते हैं?

बिल्कुल नहीं…। देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों ने बार-बार कहा है कि IRC मानकों के विपरीत बने स्पीड ब्रेकर हटाए जाने चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी निर्देश दिया कि अवैध स्पीड ब्रेकरों को हटाकर केवल मानक अनुरूप संरचनाएं बनाई जाएं। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को IRC मानकों का कड़ाई से पालन कराने का आदेश दिया था।

कौन देता है अनुमति?

सामान्यतः जिन संस्थाओं की स्वीकृति आवश्यक होती है, उनमें जिला सड़क सुरक्षा समिति, जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर निकाय और ट्रैफिक पुलिस। कई राज्यों में बिना जिला सड़क सुरक्षा समिति की अनुमति स्पीड ब्रेकर बनाना अवैध माना जाता है।

शिकायत कहां करें?

यदि आपके गांव या क्षेत्र में अवैध या खतरनाक स्पीड ब्रेकर बना है तो आप शिकायत कर सकते हैं: 1. जिला पदाधिकारी (DM) जिला सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष प्रायः डीएम होते हैं। 2. लोक निर्माण विभाग (PWD) यदि सड़क पीडब्ल्यूडी की है। 3. ग्रामीण कार्य विभाग यदि सड़क ग्रामीण कार्य विभाग के अधीन है। 4. ट्रैफिक पुलिस अवैध निर्माण की सूचना दे सकते हैं। 5. मुख्यमंत्री जन शिकायत पोर्टल अधिकांश राज्यों में ऑनलाइन शिकायत की सुविधा है। 6. जन सुनवाई एवं RTI RTI लगाकर पूछ सकते हैं कि स्पीड ब्रेकर की स्वीकृति कब मिली? किस अधिकारी ने अनुमति दी? तकनीकी ड्राइंग क्या है? यदि कोई रिकॉर्ड नहीं है तो निर्माण अवैध साबित हो सकता है।

जिम्मेदार कौन है?

कानूनी रूप से जिम्मेदारी उस एजेंसी की होती है जिसने निर्माण कराया, अनुमति दी या निरीक्षण नहीं किया। हाल के कई प्रशासनिक आदेशों में कहा गया है कि बिना अनुमति स्पीड ब्रेकर बनाने वाले अभियंताओं और एजेंसियों पर कार्रवाई की जा सकती है तथा लागत की वसूली भी हो सकती है।

सरकार को क्या करना चाहिए?

  1. राज्यव्यापी सर्वेक्षण- सभी ग्रामीण और शहरी सड़कों पर बने स्पीड ब्रेकरों का ऑडिट हो।
  2. अवैध स्पीड ब्रेकर हटाए जाएं- जो IRC मानकों के अनुरूप नहीं हैं उन्हें तुरंत हटाया जाए।
  3. वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं- हर जगह स्पीड ब्रेकर ही समाधान नहीं है। इसके स्थान पर रम्बल स्ट्रिप, चेतावनी बोर्ड, फ्लैशिंग लाइट, स्पीड कैमरा और रोड मार्किंग का उपयोग किया जा सकता है।
  4. जिम्मेदारी तय हो- बिना अनुमति निर्माण कराने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
  5. जनभागीदारी बढ़े- ग्राम पंचायतों को सड़क सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए।

समाधान कम और समस्या अधिक

ग्रामीण सड़कों पर बने अवैज्ञानिक स्पीड ब्रेकर आज सड़क सुरक्षा का समाधान कम और नई समस्या अधिक बन चुके हैं। सुरक्षा के नाम पर बनाए गए ये अवरोध कई बार दुर्घटना, वाहन क्षति और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन जाते हैं। कानून और तकनीकी मानक मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा। जरूरत इस बात की है कि सड़क सुरक्षा को भावनाओं नहीं, बल्कि विज्ञान और मानकों के आधार पर लागू किया जाए। यदि सरकार, प्रशासन और स्थानीय निकाय समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाते, तो ग्रामीण भारत की नई सड़कें विकास का माध्यम बनने के बजाय लोगों की परेशानी का कारण बनती रहेंगी।

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