KKN गुरुग्राम डेस्क | मई का महीना भारत में हमेशा से झुलसाने वाली गर्मी और लू के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन मई 2025 ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है। इस बार न सिर्फ तापमान सामान्य से नीचे बना रहा, बल्कि इस महीने में 125 वर्षों की दूसरी सबसे अधिक बारिश भी दर्ज की गई है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, यह परिवर्तन पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) जैसे मौसमी कारकों के कारण हुआ है।
पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवात का प्रभाव
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मई के पहले दो सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियां उत्तर भारत में सक्रिय रहीं। उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तरी बांग्लादेश तक एक ट्रफ लाइन (कम दबाव की रेखा) बनी हुई है। इसके साथ-साथ हरियाणा और उत्तर प्रदेश के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण भी देखा गया, जिसकी वजह से तेज हवाएं और हल्की से मध्यम बारिश हुई।
ये मौसमी घटनाएं गर्मी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी ने भी बारिश को बढ़ावा दिया है। इसका सीधा असर उत्तर भारत के तापमान पर देखने को मिल रहा है, जहां लू जैसे हालात अभी तक नहीं बने हैं।
दिल्ली-एनसीआर में रिकॉर्डतोड़ बारिश
दिल्ली के सफदरजंग वेधशाला में 16 मई तक 91.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में मात्र 10.8 मिमी बारिश होती है। यानी सामान्य से लगभग 744% अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसके चलते दिल्ली में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के स्तर तक केवल एक दिन (16 मई) ही गया, अन्यथा पूरा महीना अपेक्षाकृत ठंडा रहा।
उत्तर भारत में राहत की फुहारें
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गर्मी की स्थिति सामान्य से काफी कम रही। जयपुर, चंडीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में गरज-चमक के साथ बारिश हुई, जिससे तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री नीचे रहा।
राजस्थान के श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में जरूर तापमान 45.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा, लेकिन यह एक अपवाद रहा, क्योंकि राज्य के अन्य हिस्सों में बादल, हवाएं और बूंदाबांदी बनी रही।
मध्य भारत में भी मौसम सुहाना
इंदौर, भोपाल और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी तापमान सामान्य से 3-5 डिग्री नीचे रहा। इंदौर में अधिकतम तापमान 36.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4 डिग्री कम था। वहीं अहमदाबाद में 38.8 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ उच्च आर्द्रता देखी गई।
दक्षिण भारत में मानसूनी आहट
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में प्री-मॉनसून बारिश सामान्य से अधिक रही। आंध्र प्रदेश में मार्च 1 से 16 मई तक 85.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 35% अधिक है। मौसम विभाग ने दक्षिण भारत में 20 मई तक गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। इससे किसानों को फायदा होने की संभावना है।
लू से राहत लेकिन चुनौतियां बरकरार
जहां एक ओर आम जनता को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं यह मौसम किसानों और योजना निर्माताओं के लिए नई चुनौतियां लेकर आया है। लगातार वर्षा और ठंडक फसल चक्र को प्रभावित कर सकती है, विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन फसलों पर इसका असर देखा जा सकता है। इसके अलावा, जलभराव और बाढ़ जैसे खतरे भी इस समय उभर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन का संकेत?
मई 2025 का यह असामान्य मौसम भारत में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के बढ़ते प्रभाव की ओर संकेत करता है। मौसम में ऐसे अप्रत्याशित बदलाव यह दर्शाते हैं कि पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान मॉडल अब पूरी तरह भरोसेमंद नहीं रह गए हैं। इन परिस्थितियों में मौसम विज्ञान, कृषि और शहरी योजना में नए दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
आगे क्या?
भारतीय मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून समय से पहले, यानी 27 मई तक केरल में प्रवेश कर सकता है। यह किसानों के लिए राहत की खबर है क्योंकि इससे धान, गन्ना, और मक्का जैसी खरीफ फसलों की बुआई समय पर शुरू हो सकेगी।
वहीं उत्तर भारत में मई के अंत तक ही लू की स्थिति बनने की संभावनाएं जताई गई हैं। तब तक तापमान सामान्य से कम बना रहेगा।
मई 2025 ने भारत में मौसम की पारंपरिक परिभाषा को बदल दिया है। जहां इस महीने को लू और गर्म हवाओं के लिए जाना जाता था, वहीं अब बारिश और ठंडक इसकी पहचान बन रही है। यह बदलाव एक ओर जहां राहत देता है, वहीं दूसरी ओर यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि भविष्य में मौसम की अनिश्चितता से कैसे निपटा जाए। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में ऐसे असामान्य मौसम अब सामान्य होते जा रहे हैं – और हमें इसके अनुरूप तैयार रहने की जरूरत है।
