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आऱाध्या बच्चन ने दिल्ली हाई कोर्ट में गलत और भ्रामक कंटेंट हटाने की मांग की, सुनवाई 17 मार्च को

KKN गुरुग्राम  डेस्क | बॉलीवुड अभिनेता ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन की 13 वर्षीय बेटी आऱाध्या बच्चन ने अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और गलत कंटेंट को हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। आऱाध्या ने कोर्ट से सारांश निर्णय (summary judgment) की अपील की है, ताकि उनके खिलाफ फैलाई जा रही झूठी और हानिकारक जानकारी पर त्वरित कार्रवाई की जा सके। इस संबंध में गूगलबॉलीवुड टाइम्स और अन्य प्लेटफार्मों को कानूनी नोटिस भेजे गए हैं और मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2025 को तय की गई है।

यह मामला उस समय सामने आया जब आऱाध्या बच्चन के स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया और वीडियो शेयरिंग प्लेटफार्म्स पर झूठे आरोप और अफवाहें फैलाने वाली वीडियो क्लिप्स ने तूल पकड़ा। इस मामले में, दिल्ली हाई कोर्ट ने अप्रैल 2023 में गूगल को आदेश दिया था कि वह वह झूठी वीडियो हटाए, जिनमें आऱाध्या को गंभीर रूप से बीमार और यहां तक कि मृत बताने की अफवाह फैलायी गई थी।

कानूनी मामले की पृष्ठभूमि

आऱाध्या बच्चन, जो कि बॉलीवुड के एक प्रतिष्ठित परिवार की सदस्य हैं, हमेशा से ही मीडिया और जनता के बीच आकर्षण का केंद्र रही हैं। हालांकि, हाल के दिनों में उन पर फैलाए गए झूठे और भ्रामक कंटेंट ने एक नया मोड़ लिया, खासकर उनकी सेहत को लेकर। सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफार्म्स पर ऐसी वीडियो वायरल हो गईं, जिनमें यह दावा किया गया कि वह गंभीर रूप से बीमार हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अप्रैल 2023 में गूगल को आदेश दिया था कि वह इन वीडियो को तत्काल हटा दे, क्योंकि इस तरह की झूठी अफवाहें न केवल आऱाध्या के स्वास्थ्य को लेकर गलत जानकारी फैला रही थीं, बल्कि यह बाल अधिकारों का भी उल्लंघन कर रही थीं। न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर ने इस मामले में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि किसी भी बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर इस तरह की झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाना कानून में पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

गूगल और अन्य प्लेटफार्म्स को कानूनी नोटिस जारी

आऱाध्या ने हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट से फिर से अपील की है कि उन पर फैलाए गए गलत कंटेंट को तत्काल हटाया जाए। इसके तहत गूगल, बॉलीवुड टाइम्स, और अन्य प्लेटफार्म्स को कानूनी नोटिस भेजे गए हैं। अब, दिल्ली हाई कोर्ट ने इन प्लेटफार्म्स को समन जारी कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2025 को निर्धारित की है।

कोर्ट ने उन यूट्यूब चैनल्स को भी समन जारी किया है जिन्होंने ये झूठी और हानिकारक वीडियो अपलोड की थीं। इनमें बॉलीवुड टाइमबॉली पकौड़ाबॉली समोसा, और बॉलीवुड शाइन जैसे चैनल्स शामिल हैं। आऱाध्या के वकील का कहना है कि इन वीडियो ने न केवल आऱाध्या के प्राइवेट जीवन का उल्लंघन किया, बल्कि बच्चन परिवार की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाया। यह परिवार उच्च नैतिक मानकों के लिए जाना जाता है और इस तरह के वीडियो केवल संज्ञेय और शॉक वैल्यू उत्पन्न करने के लिए बनाए गए थे।

न्यायालय का आदेश और डिजिटल प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले ही गूगल को आदेश दिया था कि वह झूठी वीडियो को तुरंत हटा दे और भविष्य में ऐसी वीडियो के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, कोर्ट ने गूगल से उन लोगों की जानकारी भी मांगी थी जिन्होंने यह सामग्री अपलोड की थी। इसके अलावा, केंद्र सरकार को भी निर्देश दिया गया था कि वह ऐसी सामग्री को ब्लॉक करने के लिए कदम उठाए और डिजिटल प्लेटफार्मों को कानूनी दायित्व का पालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया था।

बच्चों की गोपनीयता और अधिकारों की रक्षा

यह मामला बाल अधिकारों और गोपनीयता की सुरक्षा से संबंधित है, क्योंकि आऱाध्या बच्चन एक नाबालिग हैं और उनका निजी जीवन कानूनी रूप से संरक्षित है। अदालत का यह आदेश बच्चों के प्रति समाज के दायित्व को भी स्पष्ट करता है, खासकर जब वह सार्वजनिक जीवन में होते हैं। आऱाध्या का स्वास्थ्य या निजी जीवन चर्चा का विषय बनना न केवल उनके अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह एक मानवीय गरिमा का भी उल्लंघन है।

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर ने इस मामले में कहा था कि हर बच्चे को सम्मान और गरिमा का अधिकार है, और यह न्यायिक प्रक्रिया इस तरह के मामलों में सख्ती से कदम उठाएगी। यह एक संदेश है कि अब बच्चों के प्रति इस प्रकार के कृत्यों को सहमति से और बिना परिणामों के नहीं छोड़ा जाएगा।

डिजिटल मीडिया में जानकारी की सत्यता की जांच

यह मामला सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफार्मों पर फैल रहे झूठे समाचारों और गलत जानकारी के बढ़ते प्रभाव को भी उजागर करता है। आजकल अधिकांश लोग अपने ज्ञान और जानकारी के स्रोत के रूप में यूट्यूब जैसे प्लेटफार्म्स का उपयोग करते हैं। हालांकि, इन प्लेटफार्मों पर झूठे और भ्रामक कंटेंट का प्रसार भी तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए यह आवश्यक है कि डिजिटल प्लेटफार्म्स को इस संबंध में जिम्मेदारी ली जाए और वे फैक्ट चेकिंग और सत्यता की जांच को लेकर कड़ी नीतियाँ लागू करें।

हालांकि, भारतीय सरकार ने इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड 2021 में लागू किया है, जिसमें यह कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफार्म्स को झूठे और हानिकारक कंटेंट को हटाना होगा, लेकिन इस तरह के मामलों में कानूनी कार्यवाही के लिए प्लेटफार्म्स की कार्रवाई अक्सर धीमी होती है।

आऱाध्या बच्चन का यह कानूनी कदम केवल उनके निजी जीवन की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफार्मों पर झूठी जानकारी और मीडिया के दुरुपयोग से बच्चों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि समाज को डिजिटल दुनिया में बच्चों के अधिकारों और गोपनीयता का सम्मान करना चाहिए।

यह निर्णय डिजिटल कंटेंट को लेकर भविष्य में अधिक नियमित और जिम्मेदार तरीके से काम करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। दिल्ली हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई में आऱाध्या बच्चन को न्याय मिलने की संभावना है, और यह मामले की कानूनी जटिलताओं और डिजिटल मीडिया पर इसके प्रभाव को भी उजागर करेगा।

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