KKN गुरुग्राम डेस्क | पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में Apple के CEO टिम कुक को भारत में iPhone निर्माण बंद करने की सलाह दी है। यह बयान ट्रंप ने कतर में एक स्टेट विजिट के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि Apple को अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अमेरिका में स्थापित करनी चाहिए।
ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मुझे कल टिम कुक से थोड़ी बहस हुई। वह भारत में हर जगह निर्माण कर रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि मैं नहीं चाहता कि आप भारत में निर्माण करें। अमेरिका में उत्पादन बढ़ाइए।”
भारत में Apple की बढ़ती मौजूदगी पर ट्रंप की आपत्ति
Apple ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में अपने प्रोडक्शन को तेज़ी से बढ़ाया है। मार्च 2025 तक, कंपनी ने भारत में करीब 22 बिलियन डॉलर मूल्य के iPhones असेंबल किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 60% की वृद्धि दर्शाता है।
Apple के भारत में प्रमुख पार्टनर्स हैं:
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Foxconn Technology Group – तमिलनाडु में प्रमुख फैक्ट्री
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Tata Electronics – Wistron की भारतीय यूनिट का अधिग्रहण
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Pegatron Corp. – दक्षिण भारत में सक्रिय ऑपरेशन्स
इन कंपनियों ने दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन सुविधाएं स्थापित की हैं और आने वाले वर्षों में इनका विस्तार करने की योजना है।
ट्रंप की आलोचना: भारत पर उच्च टैरिफ और व्यापार अवरोधों का आरोप
ट्रंप ने न केवल Apple की भारत में विस्तार योजनाओं की आलोचना की, बल्कि भारत के व्यापार ढांचे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “भारत में दुनिया के सबसे ऊंचे टैरिफ बैरियर्स हैं। अमेरिकी उत्पादों को वहां बेचना बेहद कठिन है।”
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि भारत ने हाल ही में अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ कम करने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन उन्होंने इसे पर्याप्त नहीं माना।
चीन से दूरी, भारत की ओर झुकाव: Apple की ग्लोबल रणनीति
Apple पिछले कुछ वर्षों से चीन पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान चीन में प्रोडक्शन बाधित हुआ, जिससे Apple को झटका लगा। इसके अलावा, अमेरिका और चीन के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने Apple को अपने प्रोडक्शन बेस को विविध करने के लिए प्रेरित किया।
भारत को इस समय चीन का विकल्प माना जा रहा है:
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कम लागत वाली श्रमशक्ति
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राजनीतिक स्थिरता
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केंद्र सरकार की PLI योजना जैसी प्रोत्साहन नीतियां
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तेजी से विकसित होता डिजिटल इकोसिस्टम
ट्रंप का राजनीतिक एजेंडा या आर्थिक दूरदर्शिता?
ट्रंप की “America First” नीति कोई नई बात नहीं है। उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने चीन पर भारी टैरिफ लगाए और अमेरिकी कंपनियों को घरेलू उत्पादन के लिए प्रेरित किया। अब वह भारत के खिलाफ भी ऐसे ही सुर में बोल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख आगामी राष्ट्रपति चुनावों से पहले एक राजनीतिक हथकंडा हो सकता है, जिससे वे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग वर्कर्स और उद्योगों को अपने पक्ष में कर सकें।
क्या अमेरिका में iPhone बनाना संभव है?
हालांकि ट्रंप चाहते हैं कि Apple अमेरिका में iPhones का उत्पादन करे, लेकिन व्यवहारिक तौर पर यह चुनौतीपूर्ण है:
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महंगी लेबर कॉस्ट: अमेरिका में श्रमिकों की लागत भारत और चीन की तुलना में कई गुना अधिक है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की पूरी सप्लाई चेन मौजूद नहीं है।
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टेक्निकल स्किल गैप: विशेष रूप से स्मार्टफोन असेंबली में प्रशिक्षित श्रमिकों की संख्या कम है।
Apple जैसी कंपनी को अपने मौजूदा मॉडल से हटकर अमेरिका में उत्पादन शुरू करने के लिए वर्षों लग सकते हैं।
भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया: वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी जगह मजबूत करना
भारत सरकार Apple जैसी कंपनियों को बनाए रखने और नए निवेश आकर्षित करने के लिए कई कदम उठा सकती है:
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PLI स्कीम में सुधार और विस्तार
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इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स में निवेश
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टैरिफ स्ट्रक्चर को व्यापारिक दृष्टिकोण से अनुकूल बनाना
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मैन्युफैक्चरिंग स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के ज़रिए वर्कफोर्स तैयार करना
डोनाल्ड ट्रंप का Apple को भारत में iPhone निर्माण बंद करने का निर्देश केवल एक व्यापारिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति और आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। Apple जैसी कंपनियों के लिए अब केवल लागत नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक स्थिरता, सरकारी दबाव, और वैश्विक रणनीति भी महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत फिलहाल Apple की मैन्युफैक्चरिंग रणनीति का एक अहम हिस्सा बना हुआ है, लेकिन अगर ट्रंप जैसे नेताओं का दबाव बढ़ता है, तो यह संतुलन बदल सकता है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि Apple किस दिशा में कदम बढ़ाता है—अमेरिका के दबाव में झुकता है या भारत में अपने विस्तार को जारी रखता है।
