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रवांडा के साथ मिल कर भारत कृषि क्षेत्र में करेगा सुधार

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भारत का अफ्रिका के साथ रिश्ता सदियों पुराना है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सर्व प्रथम अफ्रिका में ही अंग्रेजो के खिलाफ हूंकार भरी थी। इसी कड़ी में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन अफ्रीकी देशों की यात्रा पर सभी की नजरे टिक गई है।

इसमें पीएम मोदी की रवांडा यात्रा को राजनीतिक के जानकार बहुत ही महत्वपूर्ण मान रहें हैं। भारत के पीएम मोदी और रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागमे के बीच होने वाली बातचीत का नतीजा सार्थक रहा तो इसका असर दोनो देश के व्यापार एवं कृषि के क्षेत्र पर पड़ना तय माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने रवांडा के लिये 20 करोड़ डॉलर के कर्ज की पेशकश करके दुनिया में भारत के बढ़ते कद का भी संकेत दे दिया है।
भारतीय पीएम की पहली रवांडा यात्रा
पीएम मोदी की दो दिवसीय रवांडा यात्रा अपने आप में बेहद ही महत्वपूण मानी जा रही है। अव्वल तो ये कि भारत के आजादी के सात दशक बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली रवांडा यात्रा है। दूसरा ये कि रवांडा ने भारत में और भारत ने रवांडा में अपना दूतावास खोलने पर सहमत हो गया है। यानी, अब दोनो देश के बीच अब संबंध प्रगाढ़ होना तय माना जा रहा है। एक बात और गौर करने वाली है कि दोनों देशों ने चमड़ा एवं इससे संबद्ध क्षेत्र और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में कई समझौतों पर हस्ताक्षर करके अपनी निकटता के स्पष्ट संकेत दे दिएं हैं।
अफ्रिकी देशो तक पहुंच बनाने की कोशिश
भारत ने कई औद्योगिक पार्क के विकास एवं रवांडा में किगाली विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिये 10 करोड़ डॉलर और कृषि के लिये इसके अतिरिक्त 10 करोड़ डॉलर का कर्ज देने की पेशकश करके विश्व के पटल पर भारत के बढ़ते साख का संकेत दे दिया है। संसाधान सम्पन्न इस महाद्वीप में भारत की पहुंच कायम करने के इरादे से मोदी ने अफ्रीका के तीन देशों की अपनी यात्रा के पहले चरण में रवांडा में हैं। बतातें चलें कि इससे पहले किगाली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पर प्रधानमंत्री का विमान उतरते ही रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागमे ने उनका भव्य स्वागत करके दुनिया को मैत्री का संदेश पहले ही दिया था। यहां आपको बता दें कि रवांडा अफ्रीका की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। प्रधानमंत्री इसके बाद युगांडा की यात्रा पर निकलेंगे।
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