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लाल किला ब्लास्ट में मारे गए 34 वर्षीय अमर कटारिया की याद में परिवार शोक में डूबा

लाल किला के पास हुए धमाके में 34 वर्षीय अमर कटारिया की मौत हो गई। उनके पिता जगदीश कटारिया, जो इस दुखद घटना से अत्यधिक आहत हैं, ने बेटे की याद में आंसू बहाते हुए बताया कि धमाके से सिर्फ दस मिनट पहले ही उनकी बेटे से बात हुई थी। अमर ने उस दिन अपने परिवार के साथ डिनर की योजना बनाई थी और तय समय से पहले ही अपनी दवा की दुकान को बंद कर दिया था। वह अपने परिवार के साथ लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास इंतजार कर रहे थे। वह खुश और उत्साहित थे, लेकिन थोड़ी देर बाद जब उन्होंने फोन किया, तो एक अनजान महिला ने फोन उठाया और बताया कि वहां एक बड़ा धमाका हो गया है, और साथ में चीखें और शोर की आवाज भी सुनाई दे रही थी।

अंतिम क्षणों की यादें

जगदीश कटारिया ने बताया कि वह अपने बेटे से आखिरी बार बात कर रहे थे, जब वह खुश था और अपने परिवार के साथ डिनर का प्लान बना रहा था। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने उनके परिवार को चौंका दिया। कुछ ही देर बाद एक अनजान महिला ने उन्हें सूचना दी कि धमाके में उनका बेटा शामिल था। जगदीश कटारिया ने बताया कि यह पूरी घटना इतनी अचानक हुई कि परिवार को यकीन नहीं हो रहा था। जैसे ही इस हादसे की जानकारी उनके परिवार और दोस्तों को मिली, घर में शोक का माहौल छा गया। दोस्तों और रिश्तेदारों का आना-जाना शुरू हो गया, क्योंकि उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि अमर अब हमारे बीच नहीं रहे। अमर की पत्नी कीर्ति और मां भारती कटारिया का रो-रोकर बुरा हाल था।

अमर की जिंदगी और करियर

अमर कटारिया की उम्र सिर्फ 34 साल थी और उन्होंने एमबीए की पढ़ाई की थी। पहले वह एक नौकरी करते थे, लेकिन कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने दवा के कारोबार में कदम रखा और छह महीने पहले अपनी खुद की दवा की दुकान शुरू की थी। उनका यह कदम काफी सफल रहा और वह धीरे-धीरे अपने कारोबार को स्थापित कर रहे थे। उनके पिता ने बताया कि अमर को घूमने का बहुत शौक था और वह अपने परिवार को समय-समय पर विदेश यात्रा पर ले जाते थे। अगली यात्रा की योजना भी बनाई जा रही थी, लेकिन इससे पहले ही वह हमसे जुदा हो गए।

अमर अपने पीछे अपनी पत्नी कीर्ति और तीन साल के बेटे विहान को छोड़ गए हैं। उनका परिवार अब इस कठिन घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बनकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। अमर की पहचान उनके हाथ पर बने टैटू और उनके कपड़ों से की गई थी, जिसे उनके पिता ने पहचाना और पुष्टि की।

गायब सामान और आरोप

अमर के ससुर स्वदेश सेठी ने बताया कि ऑफिस से निकलते वक्त अमर के पास लैपटॉप बैग था, लेकिन वह अभी तक बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अमर के गले में सोने की चेन थी, जो अब गायब है। स्वदेश सेठी का कहना था कि यह कुछ और सवाल उठाता है, और परिवार को यकीन नहीं हो रहा है कि इन चीजों का क्या हुआ।

परिवार और दोस्तों के लिए अमर का योगदान

अमर कटारिया के दोस्तों और परिवार के लोग उन्हें एक मददगार और सहायक व्यक्ति के रूप में याद करते हैं। उनके दोस्तों का कहना था कि अमर हमेशा हर मुश्किल घड़ी में अपने परिवार और दोस्तों के साथ खड़ा रहता था। उनके दोस्त सचिन ने कहा, “मैंने अपना जिगरी और मददगार दोस्त खो दिया।” अमर के परिवार के सदस्य जीत ने बताया कि वह न केवल दवा के कारोबार में सक्रिय थे, बल्कि समाजिक कार्यों में भी भाग लेते थे। वह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करते थे और हमेशा दूसरों के लिए कुछ न कुछ अच्छा करने की सोचते थे।

अमर के जाने से उनका परिवार और मित्र समाज में एक अच्छे इंसान को खो चुके हैं, जो हमेशा दूसरों के लिए खड़ा रहता था। अमर के योगदान ने उनके परिवार और समुदाय के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ी है।

मामले की जांच और परिवार की उम्मीदें

जगदीश कटारिया और उनका परिवार अब न्याय की उम्मीद कर रहे हैं और धमाके की पूरी सच्चाई जानने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमाके के पीछे क्या कारण थे और अमर का लैपटॉप और सोने की चेन कहां गई। परिवार को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें जवाब मिलेगा और उनके बेटे के नाम पर न्याय होगा।

लाल किला के पास हुए इस धमाके ने न केवल अमर के परिवार को बल्कि पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। यह घटना इस बात का उदाहरण बन गई है कि किसी भी घटना की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके। अमर की असमय मौत ने उनके परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है, लेकिन वह उनके यादों और योगदानों को हमेशा अपने दिलों में संजोकर रखेंगे।

अंत में, अमर कटारिया का जीवन हमें यह सिखाता है कि हर व्यक्ति का जीवन अनमोल होता है और हमें अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए कि हम हमेशा दूसरों के लिए अच्छा काम करें, जैसे अमर ने किया। उनका योगदान और उनकी यादें हमेशा उनके परिवार और दोस्तों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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