होमNationalकहानी खिचड़ी की : कैसे शुरू हुई खिचड़ी बनाने की परंपरा

कहानी खिचड़ी की : कैसे शुरू हुई खिचड़ी बनाने की परंपरा

Published on

आजकल खिचड़ी चर्चा का विषय बन गई है। नेताओं से लेकर मीडिया और सोशल मीडिया तक में खिचड़ी पर ही बातें हो रही हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले खिचड़ी बनाने की परंपरा की शुरूआत भगवान शिव ने की थी। ऐसा माना जाता है कि बाबा गोरखनाथ, जो भगवान शिव का ही रुप थे उन्होंने ही सबसे पहले खिचड़ी बनाना शुरू किया था। मान्यता के अनुसार त्रेता युग में हिमांचल के कांगड़ा की ज्वाला देवी ने भगवान शिव के अवतारी बाबा गोरखनाथ को भोजन के लिए आमंत्रित किया। बाबा गोरखनाथ ने उनकी दावत तो स्वीकार कर ली। लेकिन उन्होंने तामसी भोजन बनता देखा तो कहा कि वह सिर्फ खिचड़ी ही खाते हैं।
बाबा गोरखनाथ ने ज्वाला माता से कहा कि वह भिक्षा मांगने जा रहे हैं। खप्पर भरते ही लौट आएंगे। तब भिक्षा में मिले अनाज से खिचड़ी बनाई जाएगी। इसके बाद वह भिक्षा लेने निकल पड़े। इसी दौरान वह गोरखपुर पहुंचे और वहां खप्पर रखकर ध्यान मुद्रा में बैठ गए। लोगों ने एक दिव्य योगी को देखा तो दान-पुण्य के उद्देश्य से खप्पर में अनाज चढ़ाने लगे। लेकिन उस खप्पर की विशेषता थी कि कितना भी अनाज चढ़ा दिया जाए वह कभी भरता ही नहीं था।
धीरे-धीरे उनकी ख्याति बढ़ती गई। मान्यताओं के अनुसार सबसे पहली खिचड़ी बाबा गोरखनाथ ने ही बनाई। चूंकि बाबा गोरखनाथ का खप्पर कभी भरा नहीं इसलिए वह ज्वाला देवी के पास नहीं लौटे। हालांकि ज्वाला देवी स्थान पर आज भी गोरखनाथ बाबा की खिचड़ी के इंतजार में पानी खौल रहा है।
उधर, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के बाबा गोरखनाथ मंदिर में हर साल मकर संक्रांति के दिन से एक महीना खिचड़ी मेला लगता है। यही नहीं देशभर में मकर संक्रांति, खिचड़ी पर्व के रुप में मनाया जाता है। गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने देश भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। मान्यताओं के मुताबिक सबसे पहले नेपाल से खिचड़ी आती है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

ब्रह्मपुत्र पर चीन की चाल? महाडैम के नीचे क्या छिपा है

ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते में क्या कोई ऐसा खतरा तैयार हो रहा है, जिसका...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

More like this

चुनाव आयोग पर क्यों मचा है हंगामा? 14 आपत्तियों से उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सत्ता पक्ष की असहजता की पूरी पड़ताल

भारत में चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। चुनाव वह बुनियादी व्यवस्था...

विश्वकर्मा पूजा: मशीन पर फूल चढ़ाने की परंपरा या इंसान के हुनर को सलाम?

ऋग्वेद के ‘विश्वकर्मन्’ से आधुनिक कारखाने तक पहुंची परंपरा में आखिर छिपा संदेश क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

क्या नकारात्मक सोच इंसान को उसी अंधेरे में धकेल देती है, जिसे वह दुनिया में खोज रहा होता है?

हर घटना में षड्यंत्र, हर परंपरा में खामी, हर व्यक्ति में स्वार्थ और हर...

एनर्जी ड्रिंक से पैकेटबंद खाने तक: सुविधा के नाम पर शरीर के साथ कितना बड़ा सौदा?

बाजार की चमकदार पैकेजिंग के भीतर छिपी चीनी, नमक, वसा और कैफीन शरीर को...

डायबिटीज लाइलाज है या इलाज का तरीका पुराना पड़ चुका है?

भारत में 101 मिलियन लोगों को डायबिटीज, 136 मिलियन प्री-डायबिटीज की जद में; दुनिया...

डैम, मानव सभ्यता की प्यास बुझाने वाला वरदान या आने वाली पीढ़ियों के लिए खड़ा किया जा रहा जल-खतरा?

नदियों को बांधकर इंसान ने पानी, बिजली और खेती पर नियंत्रण हासिल किया। लेकिन...

पढ़ाई महंगी, नौकरी और परीक्षा पर भरोसा भी संकट में

कैंपस से सड़क तक बढ़ती बेचैनी सिर्फ बेरोजगारी की कहानी नहीं; यह उस पीढ़ी...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में चौकाने वाला खुलाशा, क्या हर गांव में था स्कूल?

आज भी उपलब्ध है थॉमस मुनरो और विलियम एडम की रिपोर्ट KKN ब्यूरो। ब्रिटिश शासन...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

दल-बदल की राजनीति पर लगाम कब?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल: विचारधारा बड़ी या सत्ता? कौशलेन्द्र झा KKN ब्यूरो। भारतीय राजनीति में...

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...