जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तान की नापाक हरकत एक बार फिर सामने आई है। 12 अगस्त की देर रात पाकिस्तानी घुसपैठियों ने LoC पार कर भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने समय रहते विफल कर दिया। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान एक भारतीय जवान शहीद हो गया।
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गोलीबारी की आड़ में घुसपैठ
सेना के सूत्रों के मुताबिक यह घटना सामान्य घुसपैठ से अलग थी, क्योंकि इस बार घुसपैठियों को पाकिस्तान की ओर से भारी गोलाबारी का कवर मिल रहा था। यह तरीका अक्सर पाकिस्तान की Border Action Team (BAT) अपनाती है, जो अपने ‘डर्टी ट्रिक्स’ और हाई-रिस्क ऑपरेशन्स के लिए कुख्यात है।
भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए घुसपैठियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। खराब मौसम और अंधेरे का फायदा उठाकर घुसपैठिए वापस पाकिस्तानी क्षेत्र में लौट गए।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बड़ी हरकत
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान जाने के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर लक्षित हवाई हमले किए थे।
इसके बाद पाकिस्तान के ड्रोन हमलों और सीमा पर तनाव के बीच, इस्लामाबाद ने नई दिल्ली से संपर्क कर युद्धविराम पर सहमति जताई थी। लेकिन उरी सेक्टर की यह घुसपैठ उसी युद्धविराम का खुला उल्लंघन मानी जा रही है।
जवान की शहादत और सेना की चेतावनी
भारतीय सेना ने इस कार्रवाई में एक जवान खो दिया, जिसकी बहादुरी से यह घुसपैठ नाकाम हुई। सेना ने साफ संदेश दिया है कि किसी भी घुसपैठ या फायरिंग का जवाब तुरंत और कड़े तरीके से दिया जाएगा।
LoC पर लगातार खतरा
कई बार युद्धविराम के बावजूद, LoC पर पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी और घुसपैठ की कोशिशें जारी रहती हैं। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का मकसद घाटी में अशांति फैलाना और सुरक्षा व्यवस्था को अस्थिर करना है।
भारतीय सेना लगातार LoC पर हाई-अलर्ट पर है और निगरानी के लिए एडवांस सर्विलांस सिस्टम और पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है।
उरी सेक्टर की यह घटना पाकिस्तान के आक्रामक इरादों और भारतीय सेना की सतर्कता दोनों को दिखाती है। एक जवान की शहादत इस बात का प्रतीक है कि सीमा की सुरक्षा में कितनी कुर्बानियां दी जाती हैं। सेना का स्पष्ट संदेश है—हर नापाक कोशिश का जवाब मिलेगा, और वह भी तुरंत।



