होमEconomyअमेरिका के दबाव के बावजूद रूस से तेल खरीदेगा भारत, टैरिफ वार...

अमेरिका के दबाव के बावजूद रूस से तेल खरीदेगा भारत, टैरिफ वार में साफ जवाब

Published on

भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के बावजूद रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। Trump Tariff Pressure और पश्चिमी आलोचनाओं के बीच भारत की रिफाइनरियों ने रूस के साथ अपनी आपूर्ति को बरकरार रखा है। India Russia Oil Trade को लेकर अब यह स्थिति साफ हो गई है कि भारत ऊर्जा नीतियों में केवल आर्थिक और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देगा।

सूत्रों के अनुसार, भारतीय तेल रिफाइनरियों का निर्णय पूरी तरह मूल्य, गुणवत्ता, लॉजिस्टिक्स, भंडारण और दीर्घकालिक स्थिरता जैसे व्यावसायिक और तकनीकी कारकों पर आधारित होता है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ या किसी भी राजनीतिक बयान का इस फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

भारत ने अपनाई व्यावहारिक नीति, अंतरराष्ट्रीय दबाव से ऊपर रखा ऊर्जा संतुलन

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, तेल आयात के निर्णय में बाजार की हकीकत, रिफाइनिंग सिस्टम की अनुकूलता और लागत-लाभ संतुलन अहम भूमिका निभाते हैं। Indian Oil Refineries विभिन्न स्रोतों से आने वाले कच्चे तेल का मूल्यांकन करते हैं और उसके आधार पर ही आयात तय किया जाता है।

रूस, खासकर 2022 के बाद से, भारत के लिए एक भरोसेमंद और किफायती आपूर्तिकर्ता बना रहा है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार अस्थिर हो गया था, तब भी रूस से आयातित discounted crude भारत के लिए राहत लेकर आया।

पश्चिमी देशों के लगातार दबाव के बावजूद भारत ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया। भारत की नीति स्पष्ट रही है – ऊर्जा सुरक्षा किसी भी भू-राजनीतिक बयानबाज़ी से ऊपर है।

भारत ने वैश्विक नियमों के तहत किया Russian Oil Price Cap का पालन

सूत्रों के अनुसार, रूसी तेल पर कभी कोई सीधा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। इसके बजाय, G7 और यूरोपीय संघ (EU) ने एक Price Cap Framework लागू किया था, जिसका उद्देश्य रूस की आय को सीमित करना था लेकिन वैश्विक आपूर्ति को बनाए रखना भी जरूरी था।

Indian Oil Companies, विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों ने इस व्यवस्था के तहत 60 डॉलर प्रति बैरल की अधिकतम सीमा का पालन किया है। अब EU इस सीमा को घटाकर 47.6 डॉलर प्रति बैरल करने की तैयारी में है, जो सितंबर से लागू हो सकती है। भारत इस बदलाव पर नजर बनाए हुए है और व्यावसायिक निर्णय उसी के अनुसार होगा।

वैश्विक तेल संकट में भारत की भूमिका बनी उदाहरण

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक तेल बाजार चरम पर था, तब Brent Crude की कीमत 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। उस समय भारत ने strategic decision लेते हुए Russian discounted oil खरीदना शुरू किया, जिससे न केवल घरेलू महंगाई नियंत्रित रही, बल्कि वैश्विक बाजार में भी संतुलन बना।

यदि भारत ने उस समय रूसी तेल खरीदने से इनकार किया होता और OPEC+ की 5.86 मिलियन बैरल प्रति दिन की कटौती जारी रहती, तो वैश्विक कीमतें और भी ऊपर जा सकती थीं। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई, ईंधन संकट और आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती थी।

भारत ने अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित देशों से नहीं किया आयात

हालांकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन उसने उन देशों से आयात नहीं किया है जिन पर अमेरिका द्वारा औपचारिक प्रतिबंध लागू हैं। Iran और Venezuela जैसे देशों से भारत ने कोई तेल खरीदारी नहीं की, जबकि इन देशों के पास भी विशाल भंडार उपलब्ध हैं।

यह दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा नीति rule-based और संतुलित है। India Russia Oil Import पूरी तरह से international law compliance और economic merit पर आधारित है, न कि राजनीतिक प्रभाव में आकर किया गया फैसला।

अमेरिका और ट्रंप के दबाव पर भारत का संयमित रुख

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा फिर से टैरिफ वार शुरू करने की आशंका जताई गई है। उनके चुनावी बयानों में उन देशों के खिलाफ कठोर रुख की बात कही गई है जो अमेरिका की नीतियों के खिलाफ जाकर रूस से व्यापार कर रहे हैं।

भारत ने अब तक किसी प्रकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि Indian oil refineries को स्वतंत्रता प्राप्त है और वे अपने निर्णय व्यावसायिक आधार पर लेती हैं।

नई दिल्ली का संदेश स्पष्ट है – भारत किसी भी एकतरफा दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है, और उसकी Energy Sovereignty उसके लिए सर्वोच्च है।

भारत की रिफाइनिंग क्षमता और आपूर्ति प्रणाली

भारत वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े तेल उपभोक्ताओं में से एक है। रोजाना खपत 5 मिलियन बैरल से अधिक है। भारत की रिफाइनिंग क्षमता व्यापक है और राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियों जैसे IOC, BPCL और HPCL इस आपूर्ति श्रृंखला का संचालन करती हैं।

इन कंपनियों ने Urals और ESPO ग्रेड के रूसी कच्चे तेल को अपने प्रोसेसिंग सिस्टम के अनुकूल पाया है। इससे उन्हें उत्पादन लागत को कम रखने में मदद मिली है और घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली है।

रणनीतिक संतुलन के साथ ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण भी जारी

हालांकि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखे हुए है, लेकिन वह energy diversification की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। Qatar से LNG, अमेरिका से शेल आधारित ईंधन, और ब्राज़ील और अफ्रीका जैसे नए विकल्पों की तलाश जारी है।

फिर भी सरकार का रुख स्पष्ट है – जब तक किसी आपूर्तिकर्ता पर औपचारिक और मान्य प्रतिबंध नहीं होता, तब तक भारत उसे व्यापार से बाहर नहीं करेगा। यही कारण है कि Russia अभी भी India के energy partner के रूप में महत्वपूर्ण बना हुआ है।

भारत ने यह साफ कर दिया है कि उसकी तेल नीति राजनीतिक दबाव पर नहीं, बल्कि economic logic और strategic foresight पर आधारित है। अमेरिका के tariff threats और ट्रंप के तीखे बयानों के बावजूद भारत का रुख स्थिर है।

India Russia Oil Trade न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक बाजार के लिए भी संतुलन बनाए रखने वाला रहा है। भारत ने जहां Price Cap जैसे अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क का पालन किया, वहीं प्रतिबंधित देशों से दूरी बनाकर वैश्विक कानूनों का सम्मान भी किया।

इस नीति का मूल है – स्वतंत्र निर्णय, आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्थिरता में योगदान। ऊर्जा क्षेत्र में भारत की नीति आने वाले वर्षों में भी यही संकेत देती है कि राजनीति नहीं, नीति और मूल्य भारत का मार्गदर्शन करेंगे।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

क्या अमेरिका पर भरोसा करने का दौर खत्म हो रहा है? भारत की नई चुनौती

दुनिया की राजनीति में अमेरिका की ताकत पर शायद ही कोई सवाल उठाता है,...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

More like this

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

चुनाव आयोग पर क्यों मचा है हंगामा? 14 आपत्तियों से उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सत्ता पक्ष की असहजता की पूरी पड़ताल

भारत में चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। चुनाव वह बुनियादी व्यवस्था...

ट्रंप के दौर में क्या अमेरिका की वैश्विक साख घटी? आंकड़े क्या कहते हैं

KKN ब्यूरो। एक समय था जब दुनिया के किसी संकट पर एक सवाल लगभग...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

विश्वकर्मा पूजा: मशीन पर फूल चढ़ाने की परंपरा या इंसान के हुनर को सलाम?

ऋग्वेद के ‘विश्वकर्मन्’ से आधुनिक कारखाने तक पहुंची परंपरा में आखिर छिपा संदेश क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

ध्वनि प्रदूषण: जुलूस आगे बढ़ता रहा… लेकिन, कानों में पड़ने वाला शोर वहीं रह गया

डीजे की धुन पर नाचते बच्चों को देखकर भीड़ तालियां बजाती है। किसी को...