Home Health भुने चने में मिलाया जा रहा खतरनाक रसायन, बढ़ा कैंसर का खतरा

भुने चने में मिलाया जा रहा खतरनाक रसायन, बढ़ा कैंसर का खतरा

बाजार में बेचे जा रहे भुने चनों में औरामाइन नामक खतरनाक रसायन मिलाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह एक सिंथेटिक डाई है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कपड़े और चमड़े के रंगाई में किया जाता है। इस रसायन के कारण भुने चने का रंग पीला और आकर्षक दिखता है, लेकिन इसके स्वास्थ्य पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। इस मामले में राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने स्वास्थ्य मंत्री और फूड प्रोसेसिंग मंत्री को पत्र लिखकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस खतरनाक रसायन के उपयोग को तुरंत रोकने और इस पर राष्ट्रीय स्तर पर चेतावनी जारी करने की अपील की है।

औरामाइन: एक कैंसरजन रसायन

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, औरामाइन एक पीली रंगत वाली सिंथेटिक डाई है, जो आमतौर पर टेक्सटाइल, चमड़ा और कागज उद्योगों में उपयोग की जाती है। यह रसायन पानी में घुलनशील होता है और उत्पादों को सुनहरा रंग देने का काम करता है। हालांकि, यह रसायन मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, और इसे खाद्य पदार्थों में मिलाना पूरी तरह से अवैध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एजेंसी IARC ने इसे संभावित कैंसरजन के रूप में पहचान लिया है। इसका सेवन शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है, खासकर यदि यह लंबे समय तक सेवन किया जाए।

भुने चने में औरामाइन क्यों मिलाया जा रहा है?

भुने चनों में औरामाइन मिलाने का मुख्य कारण इसे अधिक आकर्षक दिखाना है। यह रसायन चनों को चमकदार पीला रंग देता है और उन्हें कुरकुरा बनाता है। इसका इस्तेमाल करके उत्पादक चनों को बाजार में अधिक आकर्षक बना सकते हैं, जिससे उनकी बिक्री में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, औरामाइन का प्रयोग करने से चने का आकार भी थोड़ा बढ़ सकता है। चूंकि लोग आमतौर पर आकर्षक दिखने वाले उत्पादों को पसंद करते हैं, इसलिए भुने चने में इस रसायन का प्रयोग किया जा रहा है।

स्वास्थ्य पर खतरे

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर औरामाइन किसी खाद्य पदार्थ में इस्तेमाल किया जाए, तो इसके परिणामस्वरूप शरीर में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। लंबे समय तक औरामाइन से युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन लिवर, किडनी, और ब्लैडर में कैंसर का कारण बन सकता है। इसके अलावा, यह नर्वस सिस्टम और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। नियमित रूप से ऐसे केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शरीर में टॉक्सिसिटी बढ़ सकती है और अंगों को अस्थायी या स्थायी नुकसान हो सकता है। ऐसे रसायनों से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे कई मल्टी-ऑर्गन प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं।

राज्यसभा सांसद का पत्र और सरकार से अपील

प्रियंका चतुर्वेदी ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखे गए अपने पत्र में बताया कि भुने चने में औरामाइन रसायन का मिलाया जाना खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन है। यह न केवल भारतीयों की सेहत के लिए खतरा है, बल्कि उनके विश्वास को भी तोड़ता है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इस मामले में जल्द से जल्द राष्ट्रीय स्वास्थ्य अलर्ट जारी किया जाए। साथ ही, उन्होंने संदिग्ध उत्पादों की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सामाजिक मीडिया पर बढ़ी चिंता

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी कई लोग भुने चने में औरामाइन मिलाने का दावा कर रहे हैं। यह मामला तेजी से चर्चा में आया है, और लोगों में खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह खबर लोगों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम जो रोजाना खा रहे हैं, क्या वह सच में सुरक्षित है या फिर उसमें किसी तरह का घातक केमिकल मिलाया गया है?

भुने चने खरीदते वक्त सावधानी बरतें

इस मुद्दे को देखते हुए, उपभोक्ताओं को भुने चने खरीदने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हमेशा अच्छे ब्रांड और उच्च गुणवत्ता वाले चनों को ही खरीदें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि चने सुरक्षित हैं, उत्पाद के लेबल और ब्रांड की जांच करें। भरोसेमंद और प्रमाणित उत्पादों को ही खरीदना उचित होगा।

आखिरकार क्या कदम उठाए जाने चाहिए?

खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण के लिहाज से यह जरूरी है कि सरकार इस पर तुरंत एक्शन ले और इस रसायन को खाद्य पदार्थों में मिलाने पर कड़ी सजा दे। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को इस तरह के खतरनाक पदार्थों से बचने के लिए जागरूक किया जाए। इससे खाद्य सुरक्षा के नियमों को और भी कड़ा किया जा सकेगा और उपभोक्ताओं का विश्वास बना रहेगा।

भुने चनों में मिलाए जा रहे औरामाइन रसायन के कारण कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा उत्पन्न हो सकता है। यह खाद्य सुरक्षा के उल्लंघन के रूप में एक गंभीर चिंता का विषय है। इस रसायन के सेवन से होने वाले खतरों के बारे में समाज को जागरूक करना और सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग करना आवश्यक है। उपभोक्ताओं को भी खाद्य पदार्थों के चयन में सजग रहना चाहिए, ताकि वे अपने स्वास्थ्य को नुकसान से बचा सकें।

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