होमHealthचाय में चीनी की बजाय गुड़, देसी खांड और शहद डालने के...

चाय में चीनी की बजाय गुड़, देसी खांड और शहद डालने के फायदे

Published on

भारत में ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत चाय से करते हैं। हालांकि, जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज हो जाता है, तो चीनी से परहेज करने की सलाह दी जाती है, लेकिन चाय में मीठा करने की आदत बहुत से लोगों के लिए छोड़ना मुश्किल होता है। ऐसे में, लोग चीनी की बजाय गुड़, देसी खांड और शहद जैसे प्राकृतिक और हेल्दी विकल्पों की तलाश करते हैं। यह तीनों विकल्प आम तौर पर सेहतमंद माने जाते हैं, लेकिन क्या ये वाकई हेल्दी हैं? क्या ये चीनी से बेहतर विकल्प साबित होते हैं? न्यूट्रिशन कोच प्रणव मोहन ने इस सवाल का उत्तर ढूंढने के लिए इन तीनों विकल्पों पर एक ग्लूकोज टेस्ट किया और यह जानने की कोशिश की कि इनमें से कौन सा विकल्प सबसे कम शुगर स्पाइक करता है।

ग्लूकोज टेस्ट से इन तीनों विकल्पों की तुलना

प्रणव मोहन ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में तीनों विकल्पों को चाय में डालकर टेस्ट किया। उन्होंने यह जानने के लिए ग्लूकोज मीटर का उपयोग किया कि इन तीनों में से कौन सा मीठा विकल्प शुगर लेवल में सबसे कम वृद्धि करता है। टेस्ट के दौरान, उन्होंने बिना चीनी वाली चाय और सफेद चीनी वाली चाय के परिणामों की तुलना की। बिना चीनी वाली चाय में शुगर स्पाइक केवल 3 mg/dl था, जो काफी कम था। वहीं, जब सफेद चीनी डाली गई तो शुगर स्पाइक 21 mg/dl हो गया, जो एक कप चाय के हिसाब से बहुत ज्यादा था।

गुड़: सफेद चीनी से बेहतर विकल्प

इसके बाद प्रणव ने चीनी की जगह गुड़ का उपयोग किया। गुड़ डालने से शुगर स्पाइक 16 mg/dl हुआ, जो सफेद चीनी की तुलना में कम था। प्रणव बताते हैं कि गुड़ में कई विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं और यह अनरिफाइंड होता है। यही वजह है कि गुड़ सफेद चीनी के मुकाबले थोड़ा बेहतर विकल्प साबित होता है, क्योंकि इसमें अधिक पोषक तत्व होते हैं और यह शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।

देसी खांड: गुड़ से भी बेहतर विकल्प

जब प्रणव ने चाय में एक चम्मच देसी खांड डाला, तो शुगर स्पाइक 13 mg/dl हुआ, जो गुड़ से भी कम था। देसी खांड का उपयोग करने से शुगर स्पाइक कम हुआ, क्योंकि यह कम प्रक्रिया से तैयार होता है और इसमें अधिक पोषक तत्व होते हैं। देसी खांड को रिफाइन नहीं किया जाता, जिससे इसमें प्राकृतिक तत्व बच जाते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।

शहद: एक मध्यम विकल्प

अंत में, प्रणव ने शहद का टेस्ट किया। उन्होंने चाय में दो चम्मच शहद डाला और देखा कि शुगर स्पाइक 18 mg/dl हुआ। यह सफेद चीनी से थोड़ा कम था, लेकिन गुड़ और देसी खांड से ज्यादा था। शहद एक प्राकृतिक स्वीटनर है और इसमें कई लाभकारी गुण होते हैं, लेकिन इसके बावजूद यह शुगर स्पाइक में कुछ बढ़ोतरी करता है।

कौन सा विकल्प है सबसे अच्छा?

प्रणव मोहन बताते हैं कि अगर आप दिन में एक कप चाय पीते हैं, तो गुड़ या देसी खांड सबसे बेहतर विकल्प हो सकते हैं। दोनों में ही सफेद चीनी के मुकाबले कम शुगर स्पाइक होती है। लेकिन अगर आपका शुगर लेवल पहले से ही बढ़ा हुआ है, तो बिना चीनी वाली चाय ही सबसे अच्छा विकल्प है।

जो लोग दिन में कई कप चाय पीते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि गुड़, देसी खांड या शहद, इन सभी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में बेहतर यह होगा कि या तो बिना चीनी वाली चाय पिएं या फिर जीरो कैलोरी स्वीटनर्स जैसे स्टीविया या मॉन्क फ्रूट का उपयोग करें, जो ब्लड शुगर पर कोई असर नहीं डालते।

गुड़, देसी खांड और शहद तीनों ही सफेद चीनी से बेहतर विकल्प हैं, क्योंकि ये शुगर स्पाइक को कम करते हैं और शरीर के लिए अधिक फायदेमंद होते हैं। हालांकि, यदि आपकी सेहत या शुगर लेवल को नियंत्रित करना जरूरी है, तो बिना चीनी वाली चाय या जीरो कैलोरी स्वीटनर्स का चुनाव करना सबसे अच्छा रहेगा। इन प्राकृतिक विकल्पों का सेवन करने से आप अपने स्वाद का भी आनंद ले सकते हैं और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर विकल्प चुन सकते हैं।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

अरुणाचल में चीन की नई चाल? भारत की सैन्य तैयारी और शौर्य कमांडो का बड़ा खुलासा

क्या अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन का दबाव बढ़ रहा है? क्या भारत...

मुजफ्फरपुर में गैस पाइपलाइन विस्फोट: 1 की मौत, 6 घायल; 4 मंजिला इमारत क्षतिग्रस्त

जांच के घेरे में निर्माण कार्य और आपात प्रतिक्रिया बिहार के मुजफ्फरपुर में सोमवार, 2...

क्या सच में जाएगी एमएलसी की कुर्सी, संविधान में क्या है प्रावधान

बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता को लेकर अटकलबाजी आरंभ बिहार की राजनीति में...

बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज अब भाजपा के साथ

सम्राट सरकार को समर्थन से बिहार में बदलेगा सियासी समीकरण? बिहार विधान परिषद के चुनाव...

More like this

दूसरों को जलाने की आग आखिरकार अपने ही घर को राख क्यों कर देती है?

घृणा का जहर कितना खतरनाक किसी के प्रति घृणा, द्वेष, जलन और नफरत पालना पहली...

बिहार में अर्नब का कितना असर? 31 अक्टूबर तक बारिश के आसार

जानिए तूफान की असली ताकत बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब अब बिहार में...

दूसरों की कमियां खोजते-खोजते खुद क्यों खो जाता है इंसान?

विज्ञान ने खोली नकारात्मक सोच की परतें कभी-कभी एक इंसान सुबह उठता है और उसकी...

दुर्गा पूजा के मंत्रों का शरीर और मस्तिष्क पर क्या असर होता है?

कल्पना कीजिए—एक व्यक्ति आंखें बंद करके ‘ॐ’ का उच्चारण कर रहा है। उसके सामने...

दुर्गा पूजा के विधान में छिपा है विज्ञान: पौधों से मनोविज्ञान तक, क्या कहती है दुनिया की रिसर्च?

दुर्गा पूजा में नौ दिनों की साधना है, मंत्र हैं, पुष्प हैं, धूप-दीप हैं,...

दुर्गा पूजा के पांच अनसुने आध्यात्मिक रहस्य: नौ पौधों में देवी का स्वरूप, प्रकृति में शक्ति और मनुष्य के भीतर का महिषासुर

दुर्गा पूजा में हम देवी की प्रतिमा के सामने सिर झुकाते हैं, पुष्प चढ़ाते...

मीनापुर 2030: अगले पांच साल में यह इलाका किस दिशा में जाएगा? बाढ़, सड़क, खेती, रोजगार और बदलते गांवों की पूरी दास्तान

मीनापुर का भविष्य किसी एक चुनाव या एक परियोजना से तय नहीं होगा मीनापुर के...

मीनापुर के गांवों को स्मार्टफोन ने कितना बदला? खेती, पढ़ाई और रोजगार की नई कहानी

मीनापुर के गांव में अब जेब में सिर्फ फोन नहीं, पूरा बाजार है मीनापुर के...

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...