होमEntertainmentपानीपुरी खाने का अनोखा अंदाज सोशल मीडिया की सुर्खिया बनी

पानीपुरी खाने का अनोखा अंदाज सोशल मीडिया की सुर्खिया बनी

Published on

“खबरो का सभी अपडेट एक साथ पढ़ने के लिए प्लेस्टोर से KKN Live का न्यूज एप डाउनलोड कर सकतें हैं।”

पानीपुरी या गोलगप्पे तो आपने भी खाए होंगे। पर, एक साथ कई गोलगप्पे खाए हैं क्या? जीहां, एक महिला ने गोलगप्पे खाने की सारी परिभाषाएं ही बदल दीं है।

अब उस महिला के गोलगप्पे खाने का वीडियो वायरल होने लगा है और सोशल मीडिया में वह चर्चा का विषय बन चुकी है। विडियो में एक महिला अजीबोगरीब तरीके से गोलगप्पे खा रही है। दरअसल यह विडियो किसी पानीपुरी खाने के कॉम्पिटिशन का है। इसमें कई लोग एक साथ पानीपुरी खा रहे हैं लेकिन इस महिला ने जो किया है, वह काफी मजेदार है। बाकी लोगों की तरह पानीपुरी को सही तरीके से खाने की बजाय महिला एक बार में कई गोलगप्पों को तोड़कर उसमें आलू का मसाला और पानी मिला लेती है और एक बार में ही कई गोलगप्पे मुंह में डलते हुए देखी जा रही है। यहां आपको बताना जरुरी है कि यह वीडियो पिछले साल का है और हाल में ही वायरल हुआ है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मीनापुर 2030: अगले पांच साल में यह इलाका किस दिशा में जाएगा? बाढ़, सड़क, खेती, रोजगार और बदलते गांवों की पूरी दास्तान

मीनापुर का भविष्य किसी एक चुनाव या एक परियोजना से तय नहीं होगा मीनापुर के...

मीनापुर के गांवों को स्मार्टफोन ने कितना बदला? खेती, पढ़ाई और रोजगार की नई कहानी

मीनापुर के गांव में अब जेब में सिर्फ फोन नहीं, पूरा बाजार है मीनापुर के...

हिंद केसरी यादव: मीनापुर की राजनीति में वह नाम, जिसने आंदोलन को सड़क से सदन तक पहुंचाया

पांचवीं पुण्यतिथि पर दरहीपट्टी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा—अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना...

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

More like this

चुनाव आयोग पर क्यों मचा है हंगामा? 14 आपत्तियों से उठे सवाल, ज्ञानेश कुमार की भूमिका और सत्ता पक्ष की असहजता की पूरी पड़ताल

भारत में चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं हैं। चुनाव वह बुनियादी व्यवस्था...

विश्वकर्मा पूजा: मशीन पर फूल चढ़ाने की परंपरा या इंसान के हुनर को सलाम?

ऋग्वेद के ‘विश्वकर्मन्’ से आधुनिक कारखाने तक पहुंची परंपरा में आखिर छिपा संदेश क्या...

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, भारत की चलती-फिरती कहानी है

हिंदी दिवस पर विशेष: क्या आप जानते हैं कि हिंदी को ‘राष्ट्रभाषा’ नहीं, ‘राजभाषा’...

क्या नकारात्मक सोच इंसान को उसी अंधेरे में धकेल देती है, जिसे वह दुनिया में खोज रहा होता है?

हर घटना में षड्यंत्र, हर परंपरा में खामी, हर व्यक्ति में स्वार्थ और हर...

एनर्जी ड्रिंक से पैकेटबंद खाने तक: सुविधा के नाम पर शरीर के साथ कितना बड़ा सौदा?

बाजार की चमकदार पैकेजिंग के भीतर छिपी चीनी, नमक, वसा और कैफीन शरीर को...

डायबिटीज लाइलाज है या इलाज का तरीका पुराना पड़ चुका है?

भारत में 101 मिलियन लोगों को डायबिटीज, 136 मिलियन प्री-डायबिटीज की जद में; दुनिया...

डैम, मानव सभ्यता की प्यास बुझाने वाला वरदान या आने वाली पीढ़ियों के लिए खड़ा किया जा रहा जल-खतरा?

नदियों को बांधकर इंसान ने पानी, बिजली और खेती पर नियंत्रण हासिल किया। लेकिन...

पढ़ाई महंगी, नौकरी और परीक्षा पर भरोसा भी संकट में

कैंपस से सड़क तक बढ़ती बेचैनी सिर्फ बेरोजगारी की कहानी नहीं; यह उस पीढ़ी...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में चौकाने वाला खुलाशा, क्या हर गांव में था स्कूल?

आज भी उपलब्ध है थॉमस मुनरो और विलियम एडम की रिपोर्ट KKN ब्यूरो। ब्रिटिश शासन...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

दल-बदल की राजनीति पर लगाम कब?

लोकतंत्र का सबसे बड़ा सवाल: विचारधारा बड़ी या सत्ता? कौशलेन्द्र झा KKN ब्यूरो। भारतीय राजनीति में...

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...