मीनापुर में फर्जीवाड़े के खिलाफत में होगा सर्वदलीय हुंकार

जांच अधिकारी के हीलाहवाला से जन प्रतिनिधियों में आक्रोश

मुजफ्फरपुर। मीनापुर में शिक्षक बहाली में फर्जीवाड़े को लेकर समुचित प्रशासनिक कार्रवाई के लिए अब सर्वदलीय समिति बनाने की

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कवायद तेज हो गई है। यह समिति विभाग व अधिकारियों पर नियम संगत कार्रवाई के लिए दबाव बनाएगी। जांच के नाम पर अधिकारी के द्वारा की जा रही हीलाहवाली से जन प्रतिनिधियों में आक्रोश है।
लिहाजा, भाकपा के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक जनकधारी प्रसाद कुशवाहा ने अब इस लड़ाई को एक मंच देने की पहल शुरू कर दी है। उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों से मिलकर साझा मंच बनाने और मिलकर आंदोलन करने की अपील की है। श्री कुशवाहा ने इस कड़ी में वर्तमान विधायक मुन्ना यादव सहित कई अन्य राजनीतिक पार्टी के नेताओं से संपर्क करने के बाद बताया कि अधिकांश लोगों ने साझा आंदोलन के लिए सहमति दे दी हैं। शीघ्र ही सभी दलों के साथ बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।

अधिकारी के गले का फांस बने ग्यारह शिक्षक

जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद भी मीनापुर के 11 शिक्षक पर एफआईआर करना तात्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के गले का फांस बनने लगा है। प्रखंड नियोजन समिति के सदस्य सह पंचायत समिति सदस्य सुबोध कुमार ने क्लीन चिट मिले 11 शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए कमर कस लिया है। श्री कुमार ने बुधवार को बताया कि यदि निर्दोश शिक्षको को न्याय नही मिला तो इसको लेकर अलग से आंदोलन होगा। बताते चले कि तात्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अपन कार्यालय पत्र से 26 दिसम्बर 2016 को 11 शिक्षकों को क्लीन चिट दी है। बावजूद तात्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने इसी वर्ष फरवरी में इन सब पर भी एफआईआर दर्ज कर दी। अब ये सभी शिक्षक हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं। इससे शिक्षा विभाग में बैठे आलाधिकारी सकते में है।

इन शिक्षको को मिला था क्लीनचिट

जिन शिक्षको को क्लीनचिट मिली हुई है, उनमें खरार विद्यालय के शिक्षक श्वेता श्रीवास्तव, मेथनापुर के सुरूची कुमारी, राघोपुर नबीन के लिपिका पोद्दार, चाकोछपरा के मुकेश कुमार, स्तालकपुर के मनोज कुमार, अलीनेउरा के अनिल कुमार, कर्मवारी के अमित कुमार, भेलाइपुर के चंदन कुमार, धारपुर के ललित कुमार, हजरतपुर के चन्द्रशेखर सिंह, मदारीपुर कर्ण के रंजीत कुमार को अधिकारी ने अपने जांच में क्लीनचिट देते हुए इन लोगो पर एफआईआर दर्ज नही करने का स्पष्ट आदेश दिया हुआ है। बावजूद इसके तात्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने इसी वर्ष फरबरी महीने में इन सभी पर एफआईआर दर्ज कर दिया है। आनन फानन में अधिकारी के द्वारा ली गयी यही फैसल अब उनके गले की फांस बनने लगा है।