होमBiharडॉ. विकास दिव्यकीर्ति नें बिहार के छात्रों के लिए यूपीएससी तैयारी में...

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति नें बिहार के छात्रों के लिए यूपीएससी तैयारी में जरूरी टिप्स

Published on

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति, जो यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग में एक प्रमुख और लोकप्रिय शिक्षक के रूप में जाने जाते हैं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बिहार के छात्रों को यूपीएससी की तैयारी के दौरान किन कमजोरियों पर काम करना चाहिए, इस पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने तकनीकी शिक्षा, अंग्रेजी भाषा में सुधार और आधुनिक कौशल को सीखने की महत्ता पर जोर दिया। डॉ. दिव्यकीर्ति की शिक्षण शैली और उनके द्वारा दिए गए छोटे मोटिवेशनल वीडियो इंटरनेट पर वायरल होते रहते हैं, जो न सिर्फ यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए बल्कि सामान्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायक होते हैं।

बिहार के छात्रों के लिए सुझाव

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने बीबीसी हिंदी से एक इंटरव्यू में बताया कि बिहार के छात्रों में कोई खास कमी नहीं है, बल्कि कुछ चीजें हैं जिन पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अक्सर बिहार के छात्र सांस्कृतिक बोझ (cultural baggage) के साथ आते हैं, जिससे उन्हें नई और आधुनिक चीजों को अपनाने में थोड़ी परेशानी होती है। उनका मानना है कि छात्रों को तकनीकी कौशल में महारत हासिल करनी चाहिए और नए सॉफ़्टवेयर को सीखने में पीछे नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को अंग्रेजी में सहजता विकसित करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि यह आजकल के पेशेवर और शैक्षिक जीवन में आवश्यक हो गया है।

तकनीकी कौशल में महारत

डॉ. दिव्यकीर्ति ने बिहार के छात्रों को यह सलाह दी कि उन्हें तकनीकी कौशल सीखने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। वर्तमान समय में तकनीकी ज्ञान किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए बेहद जरूरी हो गया है, खासकर UPSC जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में। छात्रों को नए सॉफ़्टवेयर और तकनीकी उपकरणों के बारे में जानने की कोशिश करनी चाहिए, जो उनकी परीक्षा की तैयारी को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। इस संदर्भ में, डॉ. दिव्यकीर्ति ने यह भी कहा कि छात्रों को तकनीकी परिवर्तन को अपनाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे अवसर के रूप में देखना चाहिए।

अंग्रेजी भाषा में सुधार

एक और महत्वपूर्ण बिंदु जो डॉ. दिव्यकीर्ति ने उठाया, वह था अंग्रेजी भाषा में सुधार। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हुए अंग्रेजी में सहजता विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए। अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि यह रोजगार और करियर के कई अवसरों को खोलने में मदद करती है। डॉ. दिव्यकीर्ति ने यह भी कहा कि “अंग्रेजी के प्रति विरोधी भावना से कुछ हासिल नहीं होगा।” यूपीएससी और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में अंग्रेजी का महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए इसकी दक्षता बढ़ाना छात्रों के लिए आवश्यक है।

बिहार के छात्रों की सफलता और योगदान

डॉ. दिव्यकीर्ति ने बिहार के छात्रों की तारीफ करते हुए कहा कि बिहार के छात्र यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में अपनी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी निभा रहे हैं। उनका कहना था कि बिहार के छात्रों ने हमेशा परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, और यह उनके समर्पण और मेहनत का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के छात्र देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ रहे हैं, चाहे वह मीडिया हो या प्रशासनिक सेवाएं। बिहार के छात्रों की बढ़ती संख्या को UPSC परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वालों के रूप में देखना यह साबित करता है कि वे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहे हैं।

सिविल सेवाओं का आकर्षण और कारण

डॉ. दिव्यकीर्ति ने यह भी बताया कि सिविल सेवाओं के प्रति बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों में विशेष आकर्षण है। उन्होंने कहा कि यह आकर्षण जाति या समाज से परे है। बिहार और उत्तर प्रदेश में, सिविल सेवाओं में जाना लोगों के लिए शक्ति, सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है। वे मानते हैं कि सिविल सेवा में अच्छा वेतन, नौकरी की सुरक्षा, सम्मान और पावर जैसी विशेषताएँ छात्रों को आकर्षित करती हैं।

जाति नहीं, बल्कि करियर की दिशा महत्वपूर्ण

डॉ. दिव्यकीर्ति ने यह भी कहा कि सिविल सेवा के प्रति इस आकर्षण को जाति के आधार पर नहीं देखा जा सकता। यह ख्वाहिश हर जाति के लोगों में समान है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बिहार और उत्तर प्रदेश में पावर और सम्मान की भूख ज्यादा रहती है, जो इन राज्यों के छात्रों को सिविल सेवाओं की ओर खींचती है। दूसरी ओर, गोवा जैसे राज्यों में लोग धन और सुखद जीवन को अधिक प्राथमिकता देते हैं, इस कारण वहाँ सिविल सेवा में रुचि अपेक्षाकृत कम हो सकती है।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का UPSC सफर

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने खुद भी UPSC सिविल सेवा परीक्षा में पहले प्रयास में सफलता प्राप्त की थी। 1996 में उन्होंने UPSC परीक्षा में 384वीं रैंक हासिल की थी और केंद्रीय सचिवालय सेवा में नौकरी पाई थी। लेकिन कुछ समय बाद, उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और UPSC छात्रों को कोचिंग देने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि शिक्षा और मार्गदर्शन के द्वारा दूसरों की मदद करना अधिक महत्वपूर्ण है।

बिहार के छात्रों के लिए सलाह

डॉ. दिव्यकीर्ति की सलाह है कि बिहार के छात्र अपनी परीक्षा की तैयारी में केवल अपनी कमजोरियों को पहचानें और उन्हें सुधारने की कोशिश करें। तकनीकी शिक्षा और अंग्रेजी भाषा में सुधार के साथ-साथ आधुनिक विचारों को अपनाना छात्रों के लिए फायदेमंद रहेगा। उनका कहना है कि “बिहार के छात्र शानदार होते हैं, उन्हें अपनी ताकत पहचाननी होगी और वही दिशा अपनानी होगी, जिससे वे सबसे अच्छे परिणाम पा सकें।”

उन्होंने बिहार के छात्रों से यह भी कहा कि UPSC जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा में सफलता पाने के लिए न केवल कड़ी मेहनत करनी चाहिए, बल्कि सही दिशा में सोचने और सही रणनीतियों को अपनाने की जरूरत है। अगर छात्र इस मार्गदर्शन को समझते हुए अपनी तैयारी को रणनीतिक तरीके से करते हैं, तो वे अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

नेपाल की सुलगती सरहद: सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक बेचैनी और भारत के लिए बढ़ती चुनौती

जब पड़ोसी देश में आग लगती है, तो धुआं सीमाएं नहीं पहचानता... KKN ब्यूरो। भारत...

पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में बड़ा फैसला: साक्ष्यों के अभाव में छह आरोपी बरी, कोर्ट ने जांच और अभियोजन पर उठाए सवाल

आठ साल पुराने चर्चित हत्याकांड में अदालत का फैसला KKN ब्यूरो। बिहार के मुजफ्फरपुर शहर...

मीनापुर के प्रथम विधायक जनक सिंह की 112वीं जयंती पर ‘अग्रदूत’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

मीनापुर के प्रथम विधायक को श्रद्धांजलि, 'अग्रदूत' पुस्तक बनी उनकी विरासत का दस्तावेज़ KKN ब्यूरो।...

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...

More like this

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...

बांकीपुर का उपचुनाव: एक सीट की लड़ाई या बिहार की राजनीति का टर्निंग पॉइंट?

एक सीट... लेकिन पूरे बिहार की निगाहें क्यों? KKN ब्यूरो। भारतीय लोकतंत्र में कुछ चुनाव...

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना? (भाग–2)

क्या पेपर लीक केवल आज की समस्या है? KKN ब्यूरो। यदि कोई यह मानता...

पेपर लीक का काला कारोबार: किसने चुराए करोड़ों युवाओं के सपने, कौन है इस संगठित अपराध का असली सरगना?

जब प्रश्नपत्र नहीं, भविष्य लीक होने लगे... KKN ब्यूरो। किसी राष्ट्र का भविष्य उसकी सीमाओं...

तीन दशक की राजनीति जिसने बांकीपुर की पहचान बदल दी

कौशलेन्द्र झा KKN। आज बांकीपुर का नाम आते ही सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी का...

एक सीट… कई संदेश: आखिर क्यों पूरे बिहार की नजर बांकीपुर पर है?

क्या बांकीपुर का फैसला सिर्फ एक विधायक चुनेगा या बिहार की राजनीति की नई...

बांकीपुर की जंग: भाजपा का अभेद्य किला या प्रशांत किशोर की पहली राजनीतिक परीक्षा?

**KKN Live Special | Election Report KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव ऐसे...

बंटी यादव हत्याकांड: आखिर सच क्या है? पुलिस की कहानी और परिवार के आरोपों के बीच उलझी जांच

KKN ब्यूरो। पटना के बंटी यादव हत्याकांड ने बिहार की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

भारतीय शिक्षा व्यवस्था के बारे में चौकाने वाला खुलाशा, क्या हर गांव में था स्कूल?

आज भी उपलब्ध है थॉमस मुनरो और विलियम एडम की रिपोर्ट KKN ब्यूरो। ब्रिटिश शासन...

बांकीपुर उपचुनाव: क्या बीजेपी का अभेद्य किला दरकेगा या बदलेगी बिहार की राजनीति?

KKN ब्यूरो। पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र केवल एक सीट नहीं है। यह बिहार...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...