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बिहार में STET परीक्षा पर विवाद: छात्रों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

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बिहार सरकार ने शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में एक अहम कदम बढ़ाया है। सरकार TRE-4 (टीचर रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन) की परीक्षा जल्द ही कराने जा रही है। हालांकि, इस प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण परीक्षा, जो कि STET (State Teacher Eligibility Test) 2025 है, अभी तक आयोजित नहीं की गई है। STET परीक्षा शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य है, और इसका आयोजन लंबे समय से छात्रों के लिए एक अहम सवाल बना हुआ है। इस बीच, सरकार TRE-4 परीक्षा को चुनाव से पहले कराने की बात कर रही है, लेकिन STET के बारे में कोई बयान नहीं दिया गया है।

पटना में छात्रों का प्रदर्शन

इस स्थिति से परेशान होकर छात्रों ने आज, यानी गुरुवार को राजधानी पटना में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतरे और नारेबाजी करते हुए पटना के भिखना पहाड़ी से शुरू होकर पटना विश्वविद्यालय और गांधी मैदान की ओर बढ़ने लगे। छात्रों की इस मार्च के कारण पूरा अशोक राजपथ जाम हो गया। हाथों में तख्तियां पकड़े हुए छात्रों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

छात्रों की मांग और आक्रोश

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि बिना STET परीक्षा के TRE-4 परीक्षा का आयोजन छात्रों और बेरोजगार युवाओं के लिए एक छलावा है। छात्रों ने अपनी आवाज उठाते हुए कहा कि बिना STET के TRE-4 परीक्षा कराना पूरी तरह से गलत है और इससे बेरोजगारी की समस्या और बढ़ेगी। छात्रों का यह भी कहना था कि सरकार को पहले STET परीक्षा पर ध्यान देना चाहिए, ताकि शिक्षक बनने की सही प्रक्रिया को पूरा किया जा सके।

STET परीक्षा की महत्वता

STET परीक्षा राज्य स्तर पर शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य मानी जाती है। यह परीक्षा छात्रों की पात्रता को निर्धारित करती है और उनकी शिक्षक बनने की योग्यता को प्रमाणित करती है। जब तक STET परीक्षा आयोजित नहीं होती, तब तक किसी भी व्यक्ति को शिक्षक के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। सरकार के लिए यह सवाल है कि जब राज्य में शिक्षक भर्ती के लिए परीक्षा करानी है तो STET परीक्षा को क्यों न प्राथमिकता दी जाए?

सरकार की उपेक्षा पर सवाल

छात्रों का कहना है कि जब सरकार TRE-4 परीक्षा को चुनाव से पहले आयोजित करने की बात कर रही है, तो STET के बारे में क्यों चुप्पी साधी हुई है? यह स्पष्ट है कि बिना STET के परीक्षा आयोजित करना छात्रों के साथ धोखा होगा, क्योंकि जो शिक्षक बनने की पात्रता रखते हैं, उन्हें परीक्षा से पहले यह सत्यापित होना चाहिए।

छात्रों की योजना और आंदोलन का विस्तार

आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि वे गांधी मैदान से होते हुए डाक बंगला चौराहा और फिर मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करेंगे। उनकी मुख्य मांग है कि शिक्षा विभाग की कार्यशैली में पारदर्शिता लाई जाए और टीआरई-4 परीक्षा से पहले STET की परीक्षा कराई जाए। छात्रों का यह आंदोलन एक सशक्त संदेश दे रहा है कि जब तक सरकार छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं देगी, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

बिहार में शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का गुस्सा जायज है। जब तक STET परीक्षा नहीं होती, तब तक TRE-4 परीक्षा का कोई विशेष मतलब नहीं है। छात्रों के प्रदर्शन से यह साफ हो गया है कि वे अपनी पात्रता साबित करने के लिए STET की परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं।

सरकार को अब इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द से जल्द STET परीक्षा का आयोजन करना चाहिए। यह न केवल छात्रों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था में भी पारदर्शिता आएगी। अगर सरकार इस मुद्दे को हल नहीं करती, तो आने वाले समय में और भी बड़े विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।

छात्रों का आंदोलन एक बड़ा संकेत है कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है और इस सुधार के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने होंगे।

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