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बीस साल बाद भी बिहार की महिलाएँ क्यों नीतीश कुमार के साथ खड़ी हैं? जानिए

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अडिग समर्थन की नींव

बिहार की महिलाएँ आज भी नीतीश कुमार के साथ क्यों खड़ी हैं, इसका उत्तर उस व्यापक परिवर्तन में निहित है जो 2005 में उनके पहली बार सत्ता संभालने के साथ शुरू हुआ। जाति या धार्मिक पहचान पर आधारित पारंपरिक राजनीतिक अपीलों के विपरीत, कुमार ने लैंगिक सशक्तिकरण पर केंद्रित एक अद्वितीय राजनीतिक वर्ग का निर्माण किया। इस रणनीतिक निर्णय ने एक “शांत क्रांति” को जन्म दिया है, जो आज भी बिहार के चुनावी परिदृश्य को आकार दे रही है।

जमीनी पड़ताल से पता चलता है कि महिलाएँ महंगाई, शराबबंदी के अपूर्ण कार्यान्वयन और अधूरे वादों को लेकर निराशा व्यक्त करती हैं, लेकिन मतदान की बात आने पर नीतीश कुमार उनकी पसंदीदा पसंद बने रहते हैं।

ठोस लाभ जिसने विश्वास पैदा किया

साइकिल क्रांति: मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना (2006-07)

    • नीति और प्रभाव: यह योजना महिला सशक्तिकरण के प्रति नीतीश कुमार के दृष्टिकोण का सार प्रस्तुत करती है। छात्राओं को साइकिल प्रदान करने की इस पहल ने परिवहन संबंधी बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ महिला गतिशीलता और स्वतंत्रता का एक शक्तिशाली प्रतीक भी बन गई।
    • परिणाम: प्रोफेसर निशीथ प्रकाश के शोध के अनुसार, साइकिल कार्यक्रम से माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों के नामांकन में 30% की वृद्धि हुई और लैंगिक अंतर में 40% की कमी आई। इस कार्यक्रम की सफलता इतनी महत्वपूर्ण रही कि इसे सात अफ्रीकी देशों में दोहराया गया, और संयुक्त राष्ट्र ने इसे महिला सशक्तिकरण के एक उपकरण के रूप में समर्थन दिया।
  1. जीविका (Jeevika) के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण
    • नीति और सफलता: जीविका कार्यक्रम बिहार का प्रमुख महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम है। इसने 1.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित किया है, जिससे यह भारत का सबसे बड़ा राज्य-स्तरीय महिला सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रम बन गया है।
    • आर्थिक प्रभाव: बिहार 10 लाख स्वयं सहायता समूह चलाने वाला पहला राज्य बना। इन समूहों को ₹12,200 करोड़ के बैंक ऋण मिले हैं, जिसमें महिलाओं का अत्यधिक सफल पुनर्भुगतान रिकॉर्ड रहा है।
    • जमीनी बदलाव: “लखपति दीदी” जैसी कहानियाँ आम हैं, जहाँ महिलाएं जीविका के समर्थन से मासिक ₹3,000 की कमाई से बढ़कर ₹20,000 प्रति माह कमाने वाली सफल उद्यमी बन गई हैं। ये महिलाएँ अपनी सफलता का श्रेय सीधे नीतीश कुमार की नीतियों को देती हैं।
  2. राजनीतिक और प्रशासनिक आरक्षण
    • पंचायती राज में 50% आरक्षण (2006): बिहार ऐसा व्यापक आरक्षण लागू करने वाला पहला राज्य बना, जिसे बाद में 20 अन्य राज्यों ने अपनाया। इसने ग्रामीण शासन में संरचनात्मक परिवर्तन लाए और 71,000 से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों का निर्माण किया, जो प्रभावी “लोगों की नेता” के रूप में उभर रही हैं।
    • सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण: पुलिस और सभी सरकारी सेवाओं में 35% आरक्षण ने महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की और पुलिस बल में उनका नामांकन कई गुना बढ़ा।
  3. शराबबंदी कारक
    • महिला माँगों पर प्रतिक्रिया: 2016 में शराबबंदी लागू करने का निर्णय महिलाओं की जमीनी माँगों के जवाब में लिया गया था। यह नीति, हालांकि विवादास्पद रही, कुमार की महिलाओं की आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है, जिससे उनका एक ऐसा नेता के रूप में भरोसा मजबूत हुआ जो उनकी सुरक्षा और घरेलू शांति सुनिश्चित करता है।

हालिया चुनावी मजबूती

  • मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (2025): 2025 के चुनावों से पहले, नीतीश कुमार ने इस योजना के माध्यम से 1 करोड़ से अधिक महिलाओं के खाते में छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए ₹10,000 की राशि तुरंत हस्तांतरित की। यह वित्तीय सहायता से कहीं अधिक, दो दशक पहले शुरू हुए विश्वास निर्माण को जारी रखने का प्रतीक है।
    चुनावी वफादारी के सांख्यिकीय प्रमाण

आंकड़े बिहार में महिलाओं के चुनावी व्यवहार की एक सम्मोहक कहानी बताते हैं:

  • उच्च मतदान: 2010 से, महिलाओं ने लगातार पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में मतदान किया है। 2020 के विधानसभा चुनावों में, पुरुषों का मतदान 54% था, जबकि महिलाओं का मतदान 60% था।
  • निर्णायक प्रभाव: 243 में से 167 निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक थी। जिन क्षेत्रों में महिलाओं का मतदान अधिक रहा, उन्होंने लगातार एनडीए के पक्ष में मतदान किया है, जो कुमार की लिंग-केंद्रित रणनीति के राजनीतिक लाभ को इंगित करता है।

सांख्यिकी से परे: सुरक्षा का प्रतिमान

वरिष्ठ पत्रकार रचना के अनुसार, “नीतीश ने महिलाओं को सुरक्षा और गतिशीलता की भावना दी है। पहले हम 6 बजे तक घर आ जाते थे; अब लड़कियाँ 10 बजे भी बाहर जा सकती हैं। उनके काम ने बिहार के सामाजिक माहौल को बदल दिया है।” यह परिवर्तन नीतियों से परे जाकर सांस्कृतिक बदलाव को दर्शाता है।

निरंतर समर्थन का गणित

जमीनी स्तर पर बातचीत से महिला मतदाताओं के बीच एक व्यावहारिक आकलन सामने आता है: “हम गुस्सा हैं, लेकिन हम जानते हैं कि उन्होंने दूसरों से ज़्यादा किया है।” यह भावना एक तुलनात्मक मूल्यांकन को दर्शाती है, जहाँ कुमार का महिलाओं के मुद्दों पर ट्रैक रिकॉर्ड मौजूदा निराशाओं पर भारी पड़ता है।

महिलाओं के समर्थन की यह दृढ़ता केवल वादों पर नहीं, बल्कि संस्थागत परिवर्तनों पर आधारित है। साइकिल योजना से गतिशीलता, स्वयं सहायता समूहों से आर्थिक स्वतंत्रता, और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से आवाज़ मिली है। कुमार की नीतियों ने महिलाओं के जीवन की दिशा को मौलिक रूप से बदल दिया है, जिससे एक ऐसा राजनीतिक वर्ग तैयार हुआ है जिसका उनके साथ भावनात्मक और भौतिक निवेश जुड़ा हुआ है।

अतः, 20 साल बाद भी महिलाएँ नीतीश कुमार के साथ इसलिए खड़ी हैं, क्योंकि वे मानती हैं कि उन्होंने अपने जीवन और अपने बच्चों के भविष्य में मौलिक परिवर्तन लाया है।

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