होमAccidentमुजफ्फरपुर में दर्दनाक ट्रेन हादसा: दो बहनों की ट्रेन से कटकर मौत

मुजफ्फरपुर में दर्दनाक ट्रेन हादसा: दो बहनों की ट्रेन से कटकर मौत

Published on

मुजफ्फरपुर के भगवानपुर ओवरब्रिज के पास सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें दो सगी बहनों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। दोनों के शव रेलवे ट्रैक के किनारे मिले। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ये दोनों महिलाएं मुजफ्फरपुर के एक बैंक में कार्यरत थीं और चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश में यह दुखद दुर्घटना हो गई। सदर थाना पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।

हादसा कैसे हुआ?

यह हादसा सोमवार सुबह करीब 8 बजे हुआ। दोनों बहनें दानापुर के शांति नगर मुहल्ले की रहने वाली थीं और बैंक अधिकारी के रूप में काम कर रही थीं। स्वाति साह, जो कि केनरा बैंक के गोबरसाही शाखा में कार्यरत थीं, और उनकी बहन कुमारी सुरुचि साह, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के गोला रोड शाखा में एसएमई लोन अधिकारी थीं, भगवानपुर रेलवे गेट के पास अपने अपार्टमेंट से निकलीं।

स्वाति की शादी मधुबनी में हुई थी और उनके पति दिल्ली में डिफेंस विभाग में कार्यरत हैं। दोनों बहनें अपने परिवार के साथ माड़ीपुर में एक अपार्टमेंट में रहती थीं। स्वाति की बहन सुरुचि जुड़वा बहन सुरभी के साथ काफी करीब थीं, जो गया में बैंक कर्मचारी हैं। इसके अलावा उनका छोटा भाई शुभम, जो भोपाल में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है, और उनके पिता शंकर शाह जो शिक्षक हैं, तथा माता सविता शाह, जो गृहिणी हैं, इस हृदय विदारक घटना से पूरी तरह प्रभावित हुए हैं।

ट्रेन से उतरने का प्रयास

पिता शंकर शाह के मुताबिक, शनिवार और रविवार को छुट्टी के कारण दोनों बहनें अपने घर दानापुर आई थीं और सोमवार सुबह पाँच बजे ट्रेन पकड़ने के लिए निकल पड़ीं। उन्होंने 13212 दानापुर-जोगबनी इंटरसिटी एक्सप्रेस में ऑनलाइन टिकट लेकर दीघा से ट्रेन पकड़ी और मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हो गईं। ट्रेन के सिग्नल में परेशानी के कारण भगवानपुर रेलवे गेट पर ट्रेन रुक गई। चूंकि उनकी माड़ीपुर स्थित अपार्टमेंट बहुत नजदीक था, दोनों बहनें ट्रेन से उतरने की कोशिश करने लगीं। तभी ट्रेन अचानक चल पड़ी और दोनों महिलाएं ट्रैक पर गिर गईं। इस दौरान विपरीत दिशा से आ रही मौर्य एक्सप्रेस ट्रेन ने उन्हें रौंद डाला।

इस हादसे में स्वाति साह को बचाने की कोशिश में सुरुचि साह का सिर ट्रेन के बोगी से टकरा गया, जिससे दोनों बहनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

घटनास्थल पर बिखरा पड़ा सामान

हादसे के बाद आरपीएफ, जीआरपी, और सदर थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने शवों को ट्रैक से हटाया और घटना स्थल पर मिले लैपटॉप, मोबाइल, छाता और कुछ खाने-पीने का सामान इकट्ठा किया। यह सभी सामान बाद में पुलिस ने मृतकों के परिवार वालों को सौंप दिया। जैसे ही पुलिस ने मृतका के मोबाइल पर कॉल किया, उनके परिवार को इस भयानक घटना की जानकारी दी गई।

परिवार पर पड़ी भारी चोट

घटना की खबर सुनते ही माता-पिता बेहद दुखी हो गए और गिर पड़े। शंकर शाह और उनकी पत्नी सविता पूरी तरह से टूट चुके थे। किसी तरह उनका बेटा सुरभि के साथ सदर थाना पहुंचा और पुलिस की मदद से पोस्टमार्टम के लिए शव को भेजा गया। इसके बाद शव परिवार को सौंप दिए गए।

स्थानीय लोगों का बयान

स्थानीय निवासियों का कहना है कि दोनों बहनों का स्वभाव बहुत अच्छा था। वे हमेशा अपने काम और पढ़ाई में व्यस्त रहती थीं और घर से बाहर कम ही निकलती थीं। सुरुचि और सुरभी जुड़वा बहनें थीं, जिनका आपसी रिश्ता बहुत मजबूत था। दोनों के जाने से पूरा इलाका शोक में डूबा हुआ है।

पुलिस जांच और पोस्टमार्टम

पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है ताकि मौत के कारणों का सही पता लगाया जा सके। घटना के बाद पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए और ऐसी घटनाओं को भविष्य में टाला जा सके।

यह घटना रेलवे सुरक्षा की कमियों को भी उजागर करती है। ट्रेन से उतरने की कोशिश करते वक्त यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे को और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।

मुजफ्फरपुर में स्वाति साह और कुमारी सुरुचि साह की दुखद मृत्यु ने उनके परिवार और पूरे समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह घटना न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे मुजफ्फरपुर के लिए एक बड़ी क्षति है। दोनों बहनें अपनी मेहनत और समर्पण से पूरे परिवार का नाम रोशन कर रही थीं, लेकिन एक दुखद हादसे ने उनकी जिंदगी को खत्म कर दिया। इस घटना से रेलवे सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं और उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा के उपाय सख्त किए जाएंगे।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मीनापुर के गांवों को स्मार्टफोन ने कितना बदला? खेती, पढ़ाई और रोजगार की नई कहानी

मीनापुर के गांव में अब जेब में सिर्फ फोन नहीं, पूरा बाजार है मीनापुर के...

हिंद केसरी यादव: मीनापुर की राजनीति में वह नाम, जिसने आंदोलन को सड़क से सदन तक पहुंचाया

पांचवीं पुण्यतिथि पर दरहीपट्टी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा—अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना...

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

क्या अमेरिका पर भरोसा करने का दौर खत्म हो रहा है? भारत की नई चुनौती

दुनिया की राजनीति में अमेरिका की ताकत पर शायद ही कोई सवाल उठाता है,...

More like this

मीनापुर के गांवों को स्मार्टफोन ने कितना बदला? खेती, पढ़ाई और रोजगार की नई कहानी

मीनापुर के गांव में अब जेब में सिर्फ फोन नहीं, पूरा बाजार है मीनापुर के...

हिंद केसरी यादव: मीनापुर की राजनीति में वह नाम, जिसने आंदोलन को सड़क से सदन तक पहुंचाया

पांचवीं पुण्यतिथि पर दरहीपट्टी में श्रद्धांजलि सभा, वक्ताओं ने कहा—अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना...

मीनापुर की महिलाएं घर चलाने में कितना योगदान देती हैं? गांव की छिपी अर्थव्यवस्था का सच

मीनापुर की अर्थव्यवस्था का आधा हिस्सा शायद दिखाई ही नहीं देता मीनापुर की अर्थव्यवस्था का...

बागमती की पुरानी धारा फिर जगी तो मीनापुर में क्या बदलेगा? बाढ़ से राहत या नई मुसीबत—बेलवा डैम से बूढ़ी गंडक तक

मीनापुर के लिए यह सिर्फ नदी की खुदाई नहीं है मीनापुर में बागमती की पुरानी...

मीनापुर के युवा बाहर क्यों जा रहे हैं? गांव से महानगर तक जानिए पलायन की पूरी दास्तान

सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, घर छोड़ने की मजबूरी का है मीनापुर के किसी गांव...

मीनापुर का किसान फसल बेचकर कितना कमाता है? खेत से बाजार तक पूरा हिसाब

मीनापुर में धान की फसल जब खेत में लहलहाती है, तो दूर से वह...

विधानसभा में उठेगा ग्रामीण पत्रकारों की सुरक्षा और पेंशन का मुद्दा, पारू व लालगंज विधायकों ने दिया भरोसा

मीडिया फॉर बॉर्डर हार्मोनी के ‘हमारी आवाज’ कार्यक्रम में पत्रकारों ने सर्वसम्मति से पारित...

मीनापुर की असली कहानी क्या है? आजादी, राजनीति, बागमती और बदलते गांव का पूरा सच

मीनापुर को अगर सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले का एक प्रखंड या बिहार की एक विधानसभा...

मीनापुर में परिणाम बदलने वाले मुद्दे: जाति से बाढ़ तक, सड़क से रोज़गार तक आखिर किस सवाल ने बदली बाजी?

मीनापुर में विकास की परिकथा सिर्फ कुछ आंकड़ों से नहीं बनता। उसके पीछे एक...

मीनापुर की राजनीति: 1951 से 2025 तक सत्ता बदलती रही, लेकिन क्या बदला राजनीति का मिजाज?

मीनापुर की राजनीति को अगर सिर्फ पिछले 10 या 15 वर्षों के चुनाव से...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

क्या एक विधायक पांच साल में अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है?

KKN ब्यूरो। विधायक के पास अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए 5 वर्षों में 20...

मीनापुर में जदयू का ‘संवाद’ या संगठन के भीतर उठती बेचैनी?

मनीष वर्मा के सामने खुली कार्यकर्ताओं की परत-दर-परत पीड़ा KKN ब्यूरो। मीनापुर में रविवार का...