बिहार में जारी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच नीतीश कुमार सरकार ने राज्य विधानसभा में भरोसा दिलाया है कि किसी भी सही मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। यह आश्वासन गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में दिया।
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विपक्ष की ओर से तेजस्वी यादव ने विधानसभा में यह मांग रखी कि सरकार यह स्पष्ट करे कि मतदाता सूची में किसी सही व्यक्ति का नाम न कटे। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए चर्चा की मांग की। अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने चर्चा की अनुमति दी, जिसके बाद यह मुद्दा सदन की कार्यवाही का केंद्र बन गया।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला, फिर भी सरकार ने दी स्पष्टता
विधानसभा में बोलते हुए संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि मतदाता सूची सत्यापन का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसी कारण सरकार पहले इस विषय पर चर्चा के पक्ष में नहीं थी, लेकिन चूंकि अध्यक्ष ने इजाजत दी है, इसलिए सरकार भी अपना पक्ष रख रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है—कोई भी सही मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर नहीं होगा। यदि किसी मतदाता का नाम गलती से हटता है और इसकी जानकारी विपक्ष या किसी आम नागरिक के पास है, तो सरकार उसे गंभीरता से लेगी और जरूरत पड़ी तो चुनाव आयोग से बात कर हस्तक्षेप भी करेगी।
विपक्ष ने जताई शंका, करोड़ों गरीब मतदाता प्रभावित होने की आशंका
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की कोशिश की। तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देशों का कोई जिक्र नहीं है, जबकि सार्वजनिक बयानों में इन्हीं देशों के नागरिकों के नाम पर नाम काटने की बात कही गई थी।
कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान ने आरोप लगाया कि बीजेपी को हार का डर सता रहा है, इसलिए रणनीतिक रूप से मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं।
सीपीआई-एमएल के मेहबूब आलम ने कहा कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के कारण राज्य के करोड़ों गरीब मतदाताओं के नाम हटने का खतरा बन गया है। वहीं, सीपीआई के सूर्यकांत पासवान ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
सत्ताधारी दल के सहयोगी दल ने किया समर्थन
जहां एक ओर विपक्ष ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पर आपत्ति जताई, वहीं हम पार्टी की विधायक ज्योति मांझी ने कहा कि यह निर्णय सराहनीय है। उन्होंने कहा कि सूची की शुद्धता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन यह भी देखा जाना चाहिए कि कोई भी पात्र मतदाता वंचित न हो।
वोटर लिस्ट से हट सकते हैं लाखों नाम, दो दिन में 7 लाख फॉर्म बाकी
इस पूरी बहस की पृष्ठभूमि में यह तथ्य भी सामने आया है कि बिहार में इस बार 60 लाख नाम हटाए जा सकते हैं, जिनमें से अधिकांश गरीब और पिछड़े वर्गों से हो सकते हैं। दो दिन में 7 लाख से ज्यादा फॉर्म अभी भी जमा नहीं हुए हैं, जिससे संशय और बढ़ गया है कि कहीं पात्र मतदाता सूची से वंचित न हो जाएं।
सरकार ने दिया विपक्ष को सहयोग का न्योता
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार विपक्ष से भी आग्रह करती है कि अगर उन्हें किसी सही मतदाता का नाम कटने की जानकारी है, तो वह उसे सरकार के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि यह विषय राजनीति से ऊपर उठकर लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है, और सरकार इसका पूरा ध्यान रखेगी।
मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण चुनाव प्रक्रिया का एक नियमित हिस्सा होता है, लेकिन जब इस पर संदेह या राजनीतिक आरोप लगते हैं, तो यह लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
नीतीश सरकार का यह आश्वासन स्वागतयोग्य है, लेकिन यह आश्वासन तब तक प्रभावी नहीं माना जाएगा जब तक मौके पर कार्रवाई और निगरानी दिखाई न दे।
आवश्यक है कि प्रशासन पूरी पारदर्शिता से पुनरीक्षण कार्य को अंजाम दे, शिकायतों पर तुरंत संज्ञान ले और हर नागरिक को यह विश्वास दिलाए कि उनका वोट सुरक्षित है। क्योंकि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर मतदाता को लगता है कि उसकी आवाज गिनी जा रही है।
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