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मोकामा में बाहुबलियों की जंग: ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह बनाम ‘दादा’ सूरजभान सिंह की पत्नी

जेल से निकलकर चुनावी मैदान में ‘छोटे सरकार’ की धमाकेदार एंट्री

KKN ब्यूरो। पटना/मोकामा, 27 अक्टूबर 2025 – बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सबसे दिलचस्प और रोमांचक लड़ाई पटना जिले की मोकामा विधानसभा सीट पर देखने को मिलेगी, जहां दो दागी नेताओं के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है। एक तरफ है अनंत कुमार सिंह उर्फ ‘छोटे सरकार’ जो जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर है आरजेडी की वीणा देवी, जो ‘दादा’ के नाम से मशहूर सूरजभान सिंह की पत्नी हैं।​ यह मुकाबला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और दबदबे का युद्ध है। मोकामा सीट, जो दाल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, में चुनाव अक्सर हिंसा और बाहुबली राजनीति से भरे रहे हैं। 6 नवंबर को पहले चरण में होने वाले इस चुनाव में धन और बाहुबल का जमकर प्रदर्शन होने की उम्मीद है।​

कौन हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

अनंत कुमार सिंह मोकामा के सबसे शक्तिशाली और विवादास्पद राजनेता हैं। महंगी लग्जरी कारों, घोड़े रखने, स्टाइलिश टोपी और चश्मा पहनने के शौकीन अनंत सिंह को उनके समर्थक ‘छोटे सरकार’ के नाम से पुकारते हैं। इस उपाधि ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक खास पहचान दिलाई है।​ अनंत सिंह का राजनीतिक करियर 2005 से शुरू हुआ जब उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के टिकट पर सूरजभान सिंह को हराकर मोकामा सीट जीती थी। इसके बाद उन्होंने चार बार लगातार (2005, 2010, 2015, और 2020) इस सीट पर जीत हासिल की।​ 2010 में वे जेडीयू के टिकट पर जीते, लेकिन 2015 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। 2020 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का टिकट लिया और 78,721 वोट (52.99%) के साथ जेडीयू के राजीव लोचन नारायण सिंह को 35,757 वोटों के विशाल अंतर से हराया।​ लेकिन 2022 में आर्म्स एक्ट के तहत सजा होने पर उन्हें बिहार विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया। उसके बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने आरजेडी के टिकट पर 79,744 वोट (53.44%) हासिल कर 16,741 वोटों से जीत दर्ज की।​

आपराधिक छवि के बावजूद जनता का प्यार

अनंत सिंह के खिलाफ कम से कम 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, अपहरण और आर्म्स एक्ट का उल्लंघन शामिल है। फिर भी वे मोकामा में अत्यधिक लोकप्रिय हैं और उनकी राजनीतिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वे जेल में थे, तब भी उनकी पत्नी ने चुनाव जीत लिया।​ अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को अवैध हथियार रखने के मामले में बरी कर दिया, जिसके लिए उन्हें 2022 से 10 साल की सजा काट रहे थे। इसके बाद वे जेल से बाहर आए और 2024 के लोकसभा चुनाव में मुंगेर से जेडीयू के उम्मीदवार ललन सिंह के लिए प्रचार किया।​ अनंत सिंह और सूरजभान सिंह दोनों भूमिहार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जो बिहार की कुल आबादी का 2.86% है। लेकिन अपनी ‘रॉबिन हूड’ जैसी छवि के कारण दोनों नेता न केवल अपने समुदाय में, बल्कि अन्य सामाजिक समूहों में भी मजबूत प्रभाव रखते हैं।​

सूरजभान सिंह: ‘दादा’ का राजनीतिक सफर

सूरजभान सिंह को स्थानीय लोग ‘दादा’ के नाम से जानते हैं। वे 2000 के चुनाव में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को हराकर पहली बार मोकामा सीट जीते थे। दिलीप सिंह आरजेडी सरकार में मंत्री भी रहे थे।​ हालांकि, 2005 में अनंत सिंह ने सूरजभान सिंह को हराया और तब से लगातार चार बार जीतते रहे। सूरजभान सिंह पूर्व सांसद भी रह चुकें हैं। वे पहले केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी में थे, लेकिन हाल ही में इस्तीफा देकर आरजेडी में शामिल हो गए।​ चूंकि सूरजभान सिंह दोषसिद्धि के कारण चुनाव लड़ने से वंचित हैं, इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी वीणा देवी को मैदान में उतारा है। वीणा देवी पूर्व सांसद हैं और लालू प्रसाद यादव ने उन्हें गुरुवार को नामांकन दाखिल करने के लिए देर रात आरजेडी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया।​

नीलम देवी का धोखा और अनंत सिंह की जेडीयू वापसी

मोकामा की राजनीति में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब 2020 में आरजेडी के टिकट पर जीतने के बाद अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने नीतीश कुमार के पक्ष में वोट देकर पार्टी बदल ली। फरवरी 2024 में नीतीश कुमार जब महागठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल हुए, तो फ्लोर टेस्ट में नीलम देवी ने एनडीए का समर्थन किया।​ इस घटना के बाद अनंत सिंह ने भी जेडीयू में वापसी की और अब वे नीतीश कुमार के साथ खड़े हैं। “इस बार अनंत सिंह—जिन्हें छोटे सरकार के नाम से जाना जाता है—जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

प्रशांत किशोर की जन सुराज का प्रवेश: त्रिकोणीय मुकाबला

मोकामा की लड़ाई को और दिलचस्प बनाते हुए प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) ने प्रियदर्शी पियूष को मैदान में उतारा है। यह त्रिकोणीय मुकाबला बना देता है और दोनों बाहुबली नेताओं के लिए चुनौती बढ़ा देता है।​ प्रशांत किशोर की पार्टी बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और रोजगार के मुद्दे पर जोर दे रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोकामा जैसी बाहुबली प्रभुत्व वाली सीट पर जन सुराज को कामयाबी मिलना मुश्किल होगा।​

भूमिहार वोट बैंक की राजनीति

तेजस्वी यादव ने सूरजभान सिंह को आरजेडी में शामिल करके भूमिहार समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। हाल ही में दो अन्य प्रभावशाली भूमिहार नेता—बेगूसराय से बोगो सिंह और खगड़िया से जेडीयू विधायक डॉ. संजीव कुमार—भी आरजेडी में शामिल हुए और उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों से टिकट मिला है। बिहार के जाति सर्वेक्षण के अनुसार, भूमिहारों की आबादी 2.86% और ब्राह्मणों की 3.65% है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गंगा-सोन बेल्ट—जिसमें भोजपुर, रोहतास, भागलपुर, खगड़िया, बेगूसराय, समस्तीपुर और मधुबनी शामिल हैं—में भूमिहार समुदाय चुनावी नतीजों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।​

मोकामा का खूनी इतिहास: हिंसा और बंदूकों की राजनीति

मोकामा ताल की राजनीति का इतिहास हिंसा और बाहुबल से भरा पड़ा है। यहां के चुनाव अक्सर बंदूकों की ताकत से तय होते रहे हैं और समर्थकों के बीच झड़पें आम बात हैं। “आगामी चुनाव एक और भयंकर धन और बाहुबल का प्रदर्शन होने का वादा करता है,” स्थानीय पत्रकारों का मानना है।​ 26 अक्टूबर 2025 को एक बड़ा हादसा तब हुआ जब अनंत सिंह की चुनावी रैली का मंच ही गिर गया। मोकामा के रामपुरा डुमरा गांव में जनसंपर्क के दौरान जब वे मंच पर थे, तभी अचानक मंच ढह गया। हालांकि, अनंत सिंह चोट से बच गए, लेकिन यह घटना मोकामा की अव्यवस्थित और खतरनाक राजनीतिक संस्कृति को दर्शाती है।​​ सूरजभान सिंह के मूल गांव शंकरबार टोला के निवासी संजय कुमार ने कहा, “मोकामा में सूरजभान की प्रतिष्ठा दांव पर है। वे अपनी ही जाति के एक दुर्जेय प्रतिद्वंद्वी का सामना कर रहे हैं जो उनके प्रभाव और बल का मुकाबला कर सकता है”।​

2020 और 2015 के चुनाव परिणाम

2020 के बिहार चुनाव में, अनंत सिंह ने आरजेडी उम्मीदवार के रूप में 78,721 वोट (52.99%) हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी। उन्होंने जेडीयू के राजीव लोचन नारायण सिंह को हराया, जिन्हें 42,964 वोट (28.92%) मिले थे। तीसरे स्थान पर एलजेपी के सुरेश सिंह निषाद को 13,331 वोट (8.97%) मिले थे।​ 2015 में अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और 54,005 वोट (37.35%) के साथ जीत हासिल की। उन्होंने जेडीयू के नीरज कुमार को हराया, जिन्हें 35,657 वोट (24.66%) मिले थे। तीसरे स्थान पर जेएपी(एल) के लालन सिंह को 16,655 वोट (11.52%) मिले थे।​ 2022 के उपचुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने आरजेडी से चुनाव जीतकर 79,744 वोट (53.44%) हासिल किए और बीजेपी की सोनम देवी को 16,741 वोटों के अंतर से हराया।​

6 नवंबर को मोकामा के भाग्य का फैसला

मोकामा विधानसभा सीट पटना जिले के अंतर्गत आती है और मुंगेर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के उम्मीदवार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मुंगेर सीट से 80,870 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।​ इस बार का मुकाबला बेहद रोचक होने वाला है क्योंकि:

  • अनंत सिंह जेल से बाहर आकर सीधे चुनाव मैदान में हैं
  • उनकी पत्नी नीलम देवी ने आरजेडी छोड़कर जेडीयू ज्वाइन की
  • सूरजभान सिंह अपनी पत्नी के जरिए अनंत सिंह से बदला लेना चाहते हैं
  • प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी तीसरा विकल्प बनकर उभरी है

6 नवंबर को पहले चरण में मोकामा में मतदान होगा और 14 नवंबर को परिणाम घोषित होंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह लड़ाई व्यक्तिगत दुश्मनी, जातिगत समीकरण और बाहुबल के मिश्रण से तय होगी।​

बाहुबली नेताओं के बीच सीधी टक्कर

मोकामा विधानसभा सीट बिहार चुनाव 2025 की सबसे रोमांचक लड़ाई है, जहां दो बाहुबली नेताओं के बीच सीधी टक्कर है। 19 आपराधिक मामलों के बावजूद ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह की लोकप्रियता और ‘दादा’ सूरजभान सिंह का प्रभाव इस चुनाव की राजनीति को सूमार बना रहा है।​

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