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प्रशांत किशोर को मानहानि केस में कोर्ट का बुलावा, अशोक चौधरी ने किया केस

बिहार की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के नेता और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को पटना के कोर्ट से समन भेजा गया है। यह समन जेडीयू के मंत्री अशोक चौधरी द्वारा दायर किए गए मानहानि के मामले में जारी हुआ है। यह मामला तब शुरू हुआ था जब प्रशांत किशोर ने अशोक चौधरी पर अपनी बेटी शांभवी चौधरी के लिए लोकसभा टिकट खरीदने का आरोप लगाया था।

इस विवाद ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है और इससे दोनों नेताओं के बीच खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बन गया है। इस लेख में हम इस मामले की पूरी जानकारी देंगे, साथ ही यह भी बताएंगे कि यह मामला बिहार की राजनीति पर किस तरह से प्रभाव डाल सकता है।

प्रशांत किशोर का आरोप

प्रशांत किशोर, जो पहले नीतीश कुमार की जेडीयू पार्टी में रणनीतिकार के रूप में काम कर चुके हैं, ने हाल ही में मीडिया में कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि जेडीयू के मंत्री अशोक चौधरी ने अपनी बेटी शांभवी के लिए लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (एलजेपी-आर) से लोकसभा चुनाव का टिकट खरीदा था।

उनका कहना था कि इस टिकट को हासिल करने के लिए भारी रकम का लेन-देन हुआ था। इसके साथ ही, प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि अशोक चौधरी ने शांभवी चौधरी की शादी से पहले पटना में 38 करोड़ रुपये की 5 ज़मीनें खरीदी और दो वर्षों में 200 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जमा की। इन आरोपों के बाद अशोक चौधरी ने उन्हें मानहानि का नोटिस भेजा और बाद में पटना कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया।

कोर्ट का समन और कानूनी कार्रवाई

अशोक चौधरी द्वारा दायर मानहानि केस के बाद, पटना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) कोर्ट ने प्रशांत किशोर को 17 अक्टूबर 2025 को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। यह मामला तब और भी गंभीर हो गया जब भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद संजय जायसवाल ने भी एक अलग डिफेमेशन केस दायर किया।

यह समन प्रशांत किशोर के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी चुनौती है। अगर प्रशांत किशोर इस केस में दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा, यह बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की छवि और भविष्य के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

अशोक चौधरी का बचाव

अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर के आरोपों को सिरे से नकारा है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी शांभवी चौधरी ने अपनी वैध आय और संसाधनों से ही जमीन खरीदी थी और यह सब कुछ चुनावी शपथ पत्र में दर्ज है। इसके अलावा, अशोक चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके परिवार के बीच बैंकिंग लेन-देन की बात पूरी तरह से गलत है।

अशोक चौधरी ने इस मामले में प्रशांत किशोर के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर की बातें पूरी तरह से झूठी हैं और इन आरोपों से उनका परिवार और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है।

प्रशांत किशोर के आरोपों का विस्तार

प्रशांत किशोर ने अपने आरोपों का दायरा और बढ़ाते हुए जेडीयू के अन्य नेताओं को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल और संजय जायसवाल पर भी विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए। प्रशांत किशोर का कहना था कि इन नेताओं ने न केवल भ्रष्टाचार किया है, बल्कि उन्होंने बिहार की जनता के विश्वास को भी तोड़ा है।

प्रशांत किशोर ने विशेष रूप से अशोक चौधरी पर आरोप लगाते हुए यह दावा किया था कि उन्होंने शांभवी की सगाई से शादी के बीच में 38 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी। उन्होंने यह भी कहा कि चौधरी ने दो वर्षों में 200 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जुटाई। इस आरोप ने बिहार के राजनीतिक हलकों में काफी विवाद पैदा कर दिया।

बिहार की राजनीति पर प्रभाव

प्रशांत किशोर और अशोक चौधरी के बीच चल रहे इस कानूनी और राजनीतिक संघर्ष का बिहार की राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। अगर प्रशांत किशोर के आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे जेडीयू और बिहार सरकार की छवि को काफी नुकसान हो सकता है।

वहीं दूसरी ओर, अगर अशोक चौधरी इस केस में विजयी होते हैं, तो यह प्रशांत किशोर की राजनीतिक रणनीतियों को बड़ा झटका देगा। चूंकि प्रशांत किशोर पहले भी नीतीश कुमार के लिए काम कर चुके हैं और अब अपनी पार्टी जन सुराज चला रहे हैं, उनके आरोप और इस केस का असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।

राजनीतिक दृष्टिकोण

बिहार की राजनीति में इस समय कई ऐसे मुद्दे हैं जो चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रशांत किशोर द्वारा किए गए आरोप और उसके बाद का कानूनी संघर्ष इन मुद्दों में से एक है। यह मामला न केवल जेडीयू और भाजपा के नेताओं के लिए, बल्कि बिहार की आम जनता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज बिहार में एक वैकल्पिक राजनीतिक धारा की कोशिश कर रही है। इस मामले के कारण उनकी छवि को नुकसान हो सकता है, लेकिन यह भी हो सकता है कि यह उन्हें और भी प्रमुखता दे।

संजय जायसवाल का डिफेमेशन केस

भा.ज.पा. के नेता संजय जायसवाल ने भी प्रशांत किशोर के खिलाफ एक डिफेमेशन केस दायर किया है। संजय जायसवाल ने आरोप लगाया है कि प्रशांत किशोर ने उनके खिलाफ भी झूठी बातें फैलाई हैं, जिनका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना था। यह मामला और जटिल हो गया है, क्योंकि अब प्रशांत किशोर को दो बड़े मानहानि मामलों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशांत किशोर और अशोक चौधरी के बीच यह कानूनी और राजनीतिक विवाद बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। इस विवाद में कौन जीतता है, यह तो कोर्ट की कार्यवाही के बाद ही साफ होगा, लेकिन यह निश्चित रूप से दोनों पक्षों की राजनीतिक छवि को प्रभावित करेगा। प्रशांत किशोर को अब अदालत में अपने आरोपों का समर्थन करना होगा, वहीं अशोक चौधरी को अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करनी होगी।

जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कानूनी संघर्ष का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा और किसका पक्ष जनता के बीच मजबूत होगा।

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