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 पटना में अमित शाह से मिले नीतीश कुमार, NDA में सीट पर तेज़ हुई चर्चा

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Bihar Assembly Election 2025 जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी हलचल तेज़ हो रही है। गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना के होटल मौर्य पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात को NDA गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

पांच दिन पहले नहीं हुई थी JP Nadda से भेंट

इससे पहले भाजपा अध्यक्ष JP Nadda पटना आए थे। वे बिहार BJP की कोर कमेटी की बैठक में शामिल हुए, लेकिन नीतीश कुमार से उनकी मुलाकात नहीं हुई और वे दिल्ली लौट गए। इसी वजह से गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर मतभेद की अटकलें तेज़ हो गई थीं। नीतीश और शाह की इस मुलाकात ने उन अटकलों को आंशिक तौर पर शांत किया है।

NDA Alliance में सीट बंटवारे पर असहमति

सूत्रों की मानें तो NDA में सीट बंटवारे को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है। चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा अपनी-अपनी पार्टी के लिए अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं। नीतीश कुमार चाहते हैं कि भाजपा इन सहयोगियों से बातचीत कर समाधान निकाले, जबकि जदयू सीधे BJP के साथ तालमेल पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है।

अमित शाह का बिहार दौरा

Amit Shah Bihar Visit का मकसद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को चुनावी रणनीति समझाना और उन्हें विजय मंत्र देना है। बुधवार रात पटना पहुंचे शाह गुरुवार को डेहरी और बेगूसराय में 20 जिलों के कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वे चुनावी मुद्दों और पार्टी की अगली रणनीति पर दिशा-निर्देश देंगे।

2020 का समीकरण और अब की स्थिति

2020 विधानसभा चुनाव में भाजपा और जदयू ने मिलकर 243 सीटों में बराबर-बराबर बंटवारा किया था।

  • भाजपा ने 121 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें 110 खुद और 11 सीटें मुकेश सहनी की पार्टी को दीं।

  • जदयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा और 7 सीटें जीतनराम मांझी की पार्टी को दीं।

  • चिराग पासवान की लोजपा ने NDA से अलग होकर 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जिससे जदयू को कई सीटों पर नुकसान हुआ।

इस बार फिर वही स्थिति न दोहराई जाए, इसके लिए सीट शेयरिंग पर गहन बातचीत जरूरी है।

नीतीश और भाजपा के रिश्ते

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और भाजपा का रिश्ता कई बार उतार-चढ़ाव से गुज़र चुका है। कभी दोनों मिलकर सरकार बनाते हैं, तो कभी अलग होकर मैदान में उतरते हैं। मगर मौजूदा सियासी हालात में यह साफ है कि अकेले दम पर किसी भी पार्टी के लिए सत्ता हासिल करना मुश्किल है। ऐसे में NDA का एकजुट रहना दोनों के लिए अनिवार्य है।

विपक्ष की सक्रियता

उधर, राजद ने पहले ही बड़े पैमाने पर जनसभाएं शुरू कर दी हैं। युवा नेता तेजस्वी यादव ग्रामीण और शहरी वोटरों को साधने में जुटे हैं। कांग्रेस और वामपंथी दल भी अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। महागठबंधन कितना मज़बूत रह पाता है, यह NDA की संभावनाओं पर सीधा असर डालेगा।

नतीजों का राष्ट्रीय असर

बिहार के चुनाव सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहते। यहां का राजनीतिक माहौल और नतीजे अक्सर राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करते हैं। अमित शाह की मौजूदगी और नीतीश कुमार की अहमियत यही बताती है कि भाजपा इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।

नीतीश कुमार और अमित शाह की यह मुलाकात Bihar Assembly Election 2025 की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में सीट शेयरिंग और रणनीति को अंतिम रूप देने की कवायद तेज़ होगी। इतना तय है कि बिहार की राजनीति अगले कुछ महीनों में और भी गरम होगी और जनता नए राजनीतिक समीकरणों की गवाह बनेगी।

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