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मुजफ्फरपुर : वायरल बुखार से एसकेएमसीएच और केजरीवाल में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही

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मुजफ्फरपुर में इन दिनों वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। यह बीमारी बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। पिछले 24 घंटे में वायरल फीवर से छह बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 80 बच्चों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से आधा दर्जन बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल के पीआइसीयू (PICU) और एनआइसीयू (NICU) वार्ड पूरी तरह भर चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बेड पर दो-दो बच्चों को रखकर इलाज किया जा रहा है।

बढ़ते मरीजों से जूझ रहे अस्पताल

मौसम में बदलाव के साथ वायरल बुखार ने अस्पतालों में अफरा-तफरी मचा दी है। एसकेएमसीएच के ओपीडी में सुबह से ही बच्चों के इलाज के लिए लंबी कतारें लगी रहती हैं। परिजन अपने बीमार बच्चों को गोद में उठाकर अस्पतालों के बाहर लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं। डॉक्टर और नर्सें लगातार इलाज में जुटे हैं, लेकिन मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि प्रबंधन भी संभालना मुश्किल हो गया है।

सदर अस्पताल में आठ बच्चों को भर्ती किया गया है, जबकि लगभग साठ बच्चों का ओपीडी में इलाज हुआ। केजरीवाल अस्पताल में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यहां वेंटिलेटर खाली न रहने के कारण गंभीर बच्चों को एसकेएमसीएच रेफर किया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, हर दिन नए मरीज आ रहे हैं और बेड की भारी कमी है।

डॉक्टरों ने बताया वायरल फीवर का कारण

एसकेएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, मौसम में आए बदलाव और प्रदूषण ने बच्चों को बीमार बना दिया है। बच्चे ब्रोंकियोलाइटिस और निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि निमोनिया के मामले वायरल और बैक्टीरियल दोनों कारणों से सामने आ रहे हैं। इन बीमारियों के कारण बच्चों की हालत गंभीर होती जा रही है।

डॉ. राजेश ने बताया कि कई बच्चे रोटावायरस, एडिनोवायरस और पारा-इन्फ्लुएंजा वायरस से संक्रमित हैं। इन संक्रमणों के कारण बच्चों में बुखार, खांसी, कफ, और पेट दर्द की शिकायतें बढ़ी हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों में यह संक्रमण तेजी से फैल रहा है और कई मामलों में हालत गंभीर हो रही है।

मौसम और प्रदूषण से बिगड़ रही बच्चों की तबीयत

केजरीवाल अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि लगातार बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण ने बच्चों की सेहत को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। बड़े लोगों की तुलना में बच्चों की इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए वे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं।

डॉ. राजीव के अनुसार, कई बच्चों में दवा देने के बाद भी सुधार बहुत धीरे होता है। कभी-कभी डॉक्टरों को स्थिति देखकर दवा की डोज भी बढ़ानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि इन दिनों सिर्फ वायरल फीवर ही नहीं, बल्कि waterborne और mosquito-borne diseases भी बच्चों को बीमार कर रहे हैं। दूषित पानी और भोजन के सेवन से संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

छह बच्चों की मौत से फैली दहशत

पिछले 24 घंटों में वायरल फीवर से छह बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है। मरने वाले अधिकांश बच्चे आसपास के ग्रामीण इलाकों से थे। स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभावित इलाकों में टीम भेजी है। अस्पतालों को भी सतर्क रहने और आवश्यक दवाइयों का स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सकों ने कहा कि बुखार, उल्टी, या सांस लेने में तकलीफ जैसी शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और इलाज से बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

डॉक्टरों की सलाह – बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

चिकित्सकों का कहना है कि prevention is better than cure। बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण, स्वच्छता और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों को टायफायड, जॉन्डिस, हेपेटाइटिस बी, हिमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी, रोटावायरस, वेरिसेला और पर्टुसिस जैसे टीके समय पर लगवाना चाहिए। ये टीके बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और खतरनाक संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

स्वच्छता पर जोर देते हुए डॉक्टरों ने कहा कि बच्चों के आसपास का वातावरण साफ-सुथरा रखें। घर और आस-पास गंदगी जमा न होने दें। बीमार व्यक्तियों से बच्चों को दूर रखें और पानी हमेशा उबालकर या फिल्टर करके पिलाएं।

बच्चों की सेहत के लिए जरूरी सावधानियां

  • बच्चों को पौष्टिक और संतुलित आहार दें ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।

  • साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें, नियमित हाथ धोने की आदत डालें।

  • बच्चों को ठंडा या दूषित भोजन न दें।

  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छरों का प्रकोप न बढ़े।

  • समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं और किसी भी लक्षण को हल्के में न लें।

स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई

मुजफ्फरपुर स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू कर दी है। अस्पतालों को अतिरिक्त बेड और दवाइयों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जिला प्रशासन के सहयोग से सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है।

स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। घरों में जाकर बच्चों की जांच की जा रही है और लक्षण दिखने पर तत्काल इलाज दिया जा रहा है।

जनजागरूकता और सामूहिक प्रयास की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल इस तरह के वायरल फीवर का प्रकोप यह साबित करता है कि लोगों में जागरूकता की कमी है। जब तक समाज स्तर पर स्वच्छता, टीकाकरण और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक ऐसी बीमारियों को रोकना मुश्किल है।

चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क जरूर रहें। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें और लक्षण दिखते ही अस्पताल पहुंचें।

बच्चों की सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी

मुजफ्फरपुर में फैले इस वायरल फीवर ने चेतावनी दी है कि स्वास्थ्य सुरक्षा केवल डॉक्टर या अस्पताल की नहीं, बल्कि हर परिवार की जिम्मेदारी है। माता-पिता को अपने बच्चों की देखभाल में सावधानी बरतनी होगी।

साफ-सुथरा वातावरण, पौष्टिक भोजन, नियमित टीकाकरण और समय पर जांच ही इस बीमारी से बचाव के सबसे बड़े उपाय हैं। अस्पतालों में डॉक्टर लगातार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, लेकिन समाज के सहयोग के बिना इस महामारी को रोकना मुश्किल है।

मुजफ्फरपुर इस समय स्वास्थ्य संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में सामूहिक जागरूकता और सावधानी ही बच्चों की जिंदगी की रक्षा कर सकती है।

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