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गुमनाम हकीकत” – संपूर्ण पुस्तक समीक्षा

KKN ब्यूरो। “गुमनाम हकीकत: अ फॉरगॉट्न हिस्ट्री” कौशलेंद्र झा द्वारा लिखी गई एक अतुलनीय ऐतिहासिक कृति है, जो मीनापुर और आसपास के क्षेत्रों के भूले-बिसरे इतिहास को संरक्षित करती है। यह पुस्तक स्थानीय विरासत को राष्ट्रीय संदर्भ में प्रस्तुत करने का एक सार्थक प्रयास है। अगस्त 2022 में प्रकाशित, यह किताब हिंदी साहित्य और भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण योगदान है।​

Gumnam Hakikat – Key Publication Details and Book Information

पुस्तक के बारे में आवश्यक जानकारी

पुस्तक विवरण:​

  • शीर्षक: गुमनाम हकीकत / Gumnam Hakikat – A Forgotten History
  • लेखक: कौशलेंद्र झा
  • प्रकाशक: KKN Media Group
  • प्रकाशन तिथि: 15 अगस्त 2022
  • ISBN: 9788195746828
  • भाषा: हिंदी
  • उपलब्ध प्रारूप: Hardback, Paperback, E-book (EPUB2)
  • ऑनलाइन उपलब्धता: Amazon, Flipkart, Kobo, Bol.com, Google Play Books

पुस्तक का मूल विषय और संदेश

लेखक का मूल दर्शन एक शक्तिशाली संदेश में निहित है: “विरासत की बुनियाद गहरा हो, तो विकासवाद की प्रगतिशील राह को मजबूत किया जा सकता है। क्योंकि, जड़ मजबूत नहीं हो, तो इमारत की आयु लंबी नहीं होगी।” इस दर्शन के साथ, कौशलेंद्र झा ने मीनापुर और उसके आसपास की ऐसी जानकारियों को संरक्षित करने का प्रयास किया है, जिनका राष्ट्रीय पटल से संबंध है, किंतु विभिन्न कारणों से ये हमारे सामूहिक स्मृति से विलुप्त होती जा रही हैं।​

पुस्तक निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों को कवर करती है

मीनापुर का स्थानीय इतिहास: पुस्तक मीनापुर के पूर्व और स्वतंत्रता-पश्चात काल की महत्वपूर्ण घटनाओं को नए सिरे से प्रस्तुत करती है। यह बिहार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जहां राष्ट्रीय महत्व की कई घटनाएं घटी हैं।​

तुर्की स्टेट और वैशाली: लेखक ने वैशाली को एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र के रूप में दर्शाया है, जहां बौद्ध धर्म और अन्य आध्यात्मिक परंपराएं फली-फूलीं। पुस्तक में “अध्यात्म का वह विशाल केंद्र” का जिक्र है, जहां कई दशक पहले रूढ़िवाद का अंत हुआ था।​

परसौनी राजवंश का साम्राज्य: पुस्तक परसौनी राजवंश के बनते-बिगड़ते साम्राज्य और इसके ऐतिहासिक महत्व का विस्तृत विवरण प्रदान करती है। यह जानकारी regional governance और historical administration को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।​

1942 का स्वतंत्रता संग्राम: पुस्तक में 11 अगस्त 1942 से 16 अगस्त 1942 के बीच की महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तृत विवरण है। इसमें आजादी के लिए गांव में लड़े गए आंदोलन, यातनाओं और शहादत की कहानियां, और जन समस्याओं को उजागर किया गया है।​

गुमनाम नायकों की कहानियां: लेखक ने उन अनजान स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया है, “जिनके बलिदान से आजादी की बुनियाद मजबूत हुई, पर जिन्हें इतिहास के पन्नों में ठीक से स्थान नहीं मिला।” यह पहलू पुस्तक को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।​

लेखक परिचय – कौशलेंद्र झा

कौशलेंद्र झा एक प्रतिष्ठित पत्रकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। मीनापुर से संबंधित, वे KKN Media Group के साथ जुड़े हैं। उनका समर्पण स्थानीय इतिहास के संरक्षण और प्रचार में स्पष्ट है। उनके scholarly approach में:​

  • स्थानीय समस्याओं पर गहन विश्लेषण
  • पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक जागरूकता
  • ऐतिहासिक दस्तावेजों का systematic संरक्षण
  • मीनापुर और बिहार के विकास पर व्यापक दृष्टिकोण

पाठकों की प्रतिक्रिया और मूल्यांकन

Goodreads पर समीक्षा: एक समीक्षक ने 19 सितंबर 2024 को लिखा: “यह किताब मीनापुर के बारे में बहुत कुछ दिखाती है – आजादी से पहले और बाद में। इसमें Turki State और Vaishali की झलक भी देखने को मिलती है।” यह टिप्पणी दर्शाती है कि पुस्तक अपने उद्देश्य को सफलतापूर्वक पूरा कर रही है।​

समीक्षकों का मत: पुस्तक को एक “अपनी गौरवमयी विरासत को समझने में मददगार” कृति के रूप में स्वीकृति दी गई है। विशेष रूप से, इसे “इतिहास के पन्नों में दर्ज उस अतीत का संरक्षण” माना गया है, “जो आज हमारे विकासवाद के खोखले दावों के बीच दम तोड़ रहा है।”​

पुस्तक की शक्तियां (Strengths)

  1. अनन्य ऐतिहासिक फोकस: भूली-बिसरी स्थानीय जानकारियों को प्रमाणित रूप से संरक्षित करना।​
  2. राष्ट्रीय संदर्भ में स्थानीय इतिहास: छोटे शहरों के इतिहास को broader national narrative से जोड़ना।​
  3. स्वतंत्रता संग्राम की अल्पज्ञात घटनाएं: 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण कहानियां।​
  4. सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत: वैशाली, परसौनी राजवंश, और आध्यात्मिक केंद्रों की प्रासंगिक जानकारी।​
  5. विद्वत्तापूर्ण दृष्टिकोण: ऐतिहासिक प्रमाण और संदर्भों के साथ तथ्यों की प्रस्तुति।​

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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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