होमAgricultureबिहार में मशरूम उत्पादक किसानों को मिलेगी सस्ती बिजली, एक अप्रैल से...

बिहार में मशरूम उत्पादक किसानों को मिलेगी सस्ती बिजली, एक अप्रैल से लागू होगा नया नियम

Published on

बिहार में मशरूम की खेती करने वाले किसानों के लिए सरकार एक बड़ी राहत लेकर आई है। एक अप्रैल 2025 से, मशरूम उत्पादक किसानों को अब तक जो व्यावसायिक दर पर बिजली मिल रही थी, उसकी तुलना में कई गुना सस्ती बिजली मिलेगी। इससे किसानों की उत्पादन लागत में कमी आएगी और उनके लिए मशरूम उत्पादन और भी लाभकारी होगा। इसके अलावा, यह निर्णय किसानों के लिए एक नया अवसर साबित होगा, जिससे उनका आकर्षण मशरूम की खेती में बढ़ेगा और उनकी आय में भी सुधार होगा।

सरकार का नया निर्णय और इसके प्रभाव

अब तक बिहार में मशरूम उत्पादक किसानों को व्यावसायिक (गैर-घरेलू) श्रेणी में रखा जाता था, जिसके कारण उन्हें सामान्य घरेलू बिजली दरों के मुकाबले काफी महंगी दरों पर बिजली मिलती थी। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, राज्य की बिजली कंपनी ने मशरूम उत्पादक किसानों को सामान्य किसानों की तरह ही सस्ती बिजली देने का प्रस्ताव बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) के पास भेजा है। यदि आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो एक अप्रैल से मशरूम किसानों को सस्ती बिजली मिलेगी, जो उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

बिजली दरों में महत्वपूर्ण बदलाव

बिहार में मशरूम उत्पादक किसानों को अब तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग दरों पर बिजली बिल भरना पड़ता था। ग्रामीण क्षेत्रों में, अगर मशरूम उत्पादक किसान 100 यूनिट तक बिजली उपयोग करते हैं तो उन्हें ₹3.35 प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता है। जबकि 100 यूनिट से अधिक खपत पर यह दर ₹4.21 प्रति यूनिट हो जाती है। शहरी इलाकों में, 5 किलोवाट तक के कनेक्शन वाले किसानों को ₹5.67 प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल देना पड़ता है, जबकि 5 किलोवाट से ज्यादा खपत होने पर यह दर ₹6.44 प्रति यूनिट तक बढ़ जाती है।

लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार, मशरूम उत्पादक किसानों को अब केवल ₹0.55 प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली मिल सकेगी, जो वर्तमान दरों से कई गुना सस्ती है। इस बदलाव से किसानों की उत्पादन लागत में भारी कमी आएगी और मशरूम उत्पादन को लेकर उनका उत्साह बढ़ेगा। इससे किसानों की आय में भी सुधार होगा और उन्हें बेहतर मुनाफा मिलेगा।

बिहार में मशरूम उत्पादन की स्थिति

बिहार में मशरूम की खेती की स्थिति अब काफी बेहतर हो चुकी है। राज्य ने ओडिशा को पछाड़ते हुए देश में सबसे अधिक मशरूम उत्पादन करने वाले राज्य का दर्जा प्राप्त किया है। वर्तमान में बिहार देश के कुल मशरूम उत्पादन का लगभग 11 प्रतिशत योगदान करता है। राज्य सरकार ने पहले ही मशरूम उत्पादक किसानों के लिए 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने की योजना शुरू कर रखी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

गया, भोजपुर जैसे जिले मशरूम उत्पादन के प्रमुख केंद्र बन गए हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग इस उद्योग से जुड़कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। इसके अलावा, बिहार के मशरूम उत्पादक दिल्ली, कोलकाता जैसे बड़े शहरों को मशरूम की आपूर्ति भी करते हैं, जिससे किसानों को एक बड़ा बाजार मिला है।

मशरूम उत्पादन में बढ़ोतरी और रोजगार के अवसर

2021-22 में बिहार का मशरूम उत्पादन 28,000 टन था, जो 2023-24 तक बढ़कर 41,310 टन तक पहुंच गया है। इस वृद्धि के साथ-साथ 60,000 से 70,000 लोगों को रोजगार मिला है, और यह क्षेत्र गरीब और मध्यम वर्ग के लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन गया है। बिहार में बटन, ऑयस्टर और दूधिया मशरूम का उत्पादन मुख्य रूप से होता है, जो देशभर में लोकप्रिय हैं।

मशरूम की खेती से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के लिए यह एक अच्छा स्वरोजगार अवसर साबित हो रहा है।

मशरूम उत्पादन के लिए सरकार का समर्थन

बिहार सरकार का मशरूम उत्पादक किसानों को 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने का फैसला, इस क्षेत्र को और अधिक आकर्षक बना रहा है। इसके तहत किसानों को मशरूम की खेती के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने की सुविधा मिल रही है। सरकार का यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सक्षम बनाने और उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर देने में मददगार साबित हो रहा है।

बिहार में मशरूम उत्पादन का भविष्य

बिहार में मशरूम उत्पादन का भविष्य बहुत उज्जवल दिख रहा है। राज्य सरकार की योजनाओं और सस्ती बिजली की सुविधा से इस क्षेत्र में और भी विकास होगा। मशरूम की बढ़ती मांग और बेहतर उत्पादन तकनीकों से बिहार के मशरूम उत्पादकों को एक स्थिर और लाभकारी बाजार मिलेगा। आने वाले वर्षों में, बिहार देश के अन्य हिस्सों से मशरूम निर्यात करने वाला प्रमुख राज्य बन सकता है।

बिहार में मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को सस्ती बिजली मिलने की योजना से इस क्षेत्र में एक नया विकास देखने को मिलेगा। सस्ती बिजली के साथ-साथ सरकार की अन्य योजनाओं से मशरूम किसानों को अपने उत्पादन को बढ़ाने और अधिक मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। बिहार में मशरूम उत्पादन का यह नया अध्याय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नया अवसर साबित हो सकता है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

नेपाल की सुलगती सरहद: सांप्रदायिक हिंसा, राजनीतिक बेचैनी और भारत के लिए बढ़ती चुनौती

जब पड़ोसी देश में आग लगती है, तो धुआं सीमाएं नहीं पहचानता... KKN ब्यूरो। भारत...

पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में बड़ा फैसला: साक्ष्यों के अभाव में छह आरोपी बरी, कोर्ट ने जांच और अभियोजन पर उठाए सवाल

आठ साल पुराने चर्चित हत्याकांड में अदालत का फैसला KKN ब्यूरो। बिहार के मुजफ्फरपुर शहर...

मीनापुर के प्रथम विधायक जनक सिंह की 112वीं जयंती पर ‘अग्रदूत’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

मीनापुर के प्रथम विधायक को श्रद्धांजलि, 'अग्रदूत' पुस्तक बनी उनकी विरासत का दस्तावेज़ KKN ब्यूरो।...

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...

More like this

बांकीपुर: कैसे टूटा भाजपा का अभेद्य किला, क्यों बना प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति का नया केंद्र?

KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव हुए, कई सरकारें बनीं और बदलीं।...

बांकीपुर का उपचुनाव: एक सीट की लड़ाई या बिहार की राजनीति का टर्निंग पॉइंट?

एक सीट... लेकिन पूरे बिहार की निगाहें क्यों? KKN ब्यूरो। भारतीय लोकतंत्र में कुछ चुनाव...

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और भूमाफिया का कॉकटेल?

क्या रिकॉर्ड सुधार की मुहिम में सेंध लगा रहे हैं फर्जी दावेदार KKN ब्यूरो। जमीन...

बिहार की सड़कें समय से पहले क्यों टूट जाती हैं?

जब सड़क टूटती है, तो केवल डगर नहीं बिखरता... KKN ब्यूरो। बारिश की पहली फुहार...

तीन दशक की राजनीति जिसने बांकीपुर की पहचान बदल दी

कौशलेन्द्र झा KKN। आज बांकीपुर का नाम आते ही सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी का...

एक सीट… कई संदेश: आखिर क्यों पूरे बिहार की नजर बांकीपुर पर है?

क्या बांकीपुर का फैसला सिर्फ एक विधायक चुनेगा या बिहार की राजनीति की नई...

बांकीपुर की जंग: भाजपा का अभेद्य किला या प्रशांत किशोर की पहली राजनीतिक परीक्षा?

**KKN Live Special | Election Report KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति में कई चुनाव ऐसे...

बंटी यादव हत्याकांड: आखिर सच क्या है? पुलिस की कहानी और परिवार के आरोपों के बीच उलझी जांच

KKN ब्यूरो। पटना के बंटी यादव हत्याकांड ने बिहार की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस...

मामुली बारिश… और अंधेरे में डूब जाता है बिहार का गांव

ट्री कटिंग पर हर साल करोड़ों के टेंडर, फिर भी पेड़ की टहनी से...

बांकीपुर उपचुनाव: क्या बीजेपी का अभेद्य किला दरकेगा या बदलेगी बिहार की राजनीति?

KKN ब्यूरो। पटना का बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र केवल एक सीट नहीं है। यह बिहार...

कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का...

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार के किसान और बेरोजगार: आखिर क्या है असली समाधान?

बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी नहीं, आय की कमी है KKN ब्यूरो। बिहार की...

भरत तिवारी एनकाउंटर: कानून का सवाल, जाति की बहस और सच की तलाश

KKN ब्यूरो। भोजपुर के बिलौटी गांव का एक युवक...। फेसबुक लाइव...। पुलिस पर पिस्टल...

बिहार में शराबबंदी: सामाजिक सुधार या भ्रष्टाचार की नई अर्थव्यवस्था?

क्या शराबबंदी सफल हुई या उसने भ्रष्टाचार को नया ईंधन दिया? KKN ब्यूरो। एक  अप्रैल...