होमBiharबिहार : मुजफ्फरपुर में सरकारी अस्पतालों में 2.46 करोड़ से ज्यादा की...

बिहार : मुजफ्फरपुर में सरकारी अस्पतालों में 2.46 करोड़ से ज्यादा की दवाएं बिना इस्तेमाल के एक्सपायर

Published on

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। एक राज्य स्तरीय समीक्षा के दौरान यह खुलासा हुआ कि जिले में 2 करोड़ 46 लाख 96 हजार 167 रुपये की दवाएं बिना इस्तेमाल के एक्सपायर हो गई हैं। ये दवाएं मॉडल अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक के गोदामों में पड़ी रही और खराब हो गईं।

इस घटना ने जिले के स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन दवाओं की एक्सपायरी से न सिर्फ सरकारी खजाने का नुकसान हुआ है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं का प्रबंधन किस हद तक कमजोर हो सकता है। बिना उपयोग के दवाओं का एक्सपायर होना, सरकारी खर्च का गलत तरीके से इस्तेमाल होने का प्रतीक बन चुका है।

राज्य स्वास्थ्य समिति ने दिए सख्त निर्देश

मुजफ्फरपुर में इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत ने सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने 20 दिसंबर तक सभी एक्सपायर दवाओं का निस्तारण करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा में यह काम नहीं किया गया, तो सिविल सर्जन, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

राज्य स्वास्थ्य समिति ने यह भी आदेश दिया है कि अब से हर महीने की 10 तारीख तक दवाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अंतर्गत, जिन दवाओं की एक्सपायरी डेट में तीन महीने से कम समय रह जाएगा और उनकी खपत की संभावना कम होगी, उन्हें अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके लिए हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच दवाओं की लिस्ट तैयार की जाएगी और इसे सिविल सर्जन को भेजा जाएगा। सिविल सर्जन 10 तारीख तक इन दवाओं के ट्रांसफर पर निर्णय लेंगे।

डीवीडीएमएस पोर्टल पर अपडेट की जाएगी एक्सपायर दवाओं की जानकारी

इसके अलावा, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कारपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) ने इस मामले में निगरानी को कड़ा कर दिया है। अब से सभी एक्सपायर दवाओं की पूरी जानकारी डीवीडीएमएस पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने और न्यूनतम नुकसान सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।

सिविल सर्जन ने लिया सख्ती से पालन का भरोसा

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार ने कहा है कि मुख्यालय से प्राप्त सभी दिशा-निर्देशों की समीक्षा की जा रही है और उन्हें सख्ती से लागू कराया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना ने जिले में दवा प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर किया है। अब उम्मीद है कि इस सख्ती से दवाओं का सही उपयोग होगा और सरकारी पैसे की बर्बादी को रोका जा सकेगा।

इस घटना ने जिले में स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा किया है। दवाओं का समय पर इस्तेमाल न होने और उनके गलत तरीके से निस्तारण की स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों में चिंता बढ़ाई है। सरकार के पास जो भी संसाधन हैं, उनका सही इस्तेमाल करना और उनका नुकसान रोकना अत्यंत आवश्यक है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सही तरीके से जनता तक पहुंच सके।

भविष्य में दवाओं के प्रबंधन को लेकर कड़े कदम

इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर समय रहते दवाओं के प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसी घटनाएं और भी बढ़ सकती हैं। इसलिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने अब से हर महीने दवाओं का मूल्यांकन अनिवार्य कर दिया है, ताकि भविष्य में दवाओं का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

इसके साथ ही दवाओं के ट्रांसफर का निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे उन दवाओं का उपयोग हो सकेगा जो एक जगह पर एक्सपायर हो रही हैं, लेकिन दूसरी जगह इनका उपयोग हो सकता है। इसके जरिए ना सिर्फ सरकारी खजाने की बचत होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

बिहार में स्वास्थ्य तंत्र की और सुधार की आवश्यकता

मुजफ्फरपुर में हुए इस कुप्रबंधन ने बिहार के स्वास्थ्य तंत्र में सुधार की आवश्यकता को और भी उजागर किया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। दवाओं का सही तरीके से उपयोग और उनका प्रबंधन स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है।

अगर राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी किए गए निर्देशों का पालन सख्ती से किया जाता है, तो उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में दवाओं का सही तरीके से उपयोग होगा और किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा। इसके साथ ही, इस घटना से यह भी सीखने को मिला है कि सरकारी खजाने का सही इस्तेमाल ही जनता की भलाई का सबसे बड़ा कदम हो सकता है।

मुजफ्फरपुर में एक्सपायर दवाओं का यह मामला बिहार में स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरी को उजागर करता है। हालांकि, राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से उठाए गए कदमों से उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर काबू पाया जा सकेगा। अब राज्य स्वास्थ्य विभाग को इस तरह की लापरवाही से बचने के लिए और भी मजबूत कदम उठाने होंगे।

सख्त निगरानी और बेहतर प्रबंधन से, बिहार के स्वास्थ्य तंत्र में सुधार लाना संभव है। अगर यही दिशा अपनाई जाती रही तो आने वाले समय में दवाओं के उचित उपयोग और सरकारी धन के नुकसान को रोका जा सकेगा, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

मीनापुर की असली कहानी क्या है? आजादी, राजनीति, बागमती और बदलते गांव का पूरा सच

मीनापुर को अगर सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले का एक प्रखंड या बिहार की एक विधानसभा...

मीनापुर में परिणाम बदलने वाले मुद्दे: जाति से बाढ़ तक, सड़क से रोज़गार तक आखिर किस सवाल ने बदली बाजी?

मीनापुर में विकास की परिकथा सिर्फ कुछ आंकड़ों से नहीं बनता। उसके पीछे एक...

मीनापुर की राजनीति: 1951 से 2025 तक सत्ता बदलती रही, लेकिन क्या बदला राजनीति का मिजाज?

मीनापुर की राजनीति को अगर सिर्फ पिछले 10 या 15 वर्षों के चुनाव से...

ब्रह्मपुत्र पर चीन की चाल? महाडैम के नीचे क्या छिपा है

ब्रह्मपुत्र नदी के रास्ते में क्या कोई ऐसा खतरा तैयार हो रहा है, जिसका...

More like this

मीनापुर की असली कहानी क्या है? आजादी, राजनीति, बागमती और बदलते गांव का पूरा सच

मीनापुर को अगर सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले का एक प्रखंड या बिहार की एक विधानसभा...

मीनापुर में परिणाम बदलने वाले मुद्दे: जाति से बाढ़ तक, सड़क से रोज़गार तक आखिर किस सवाल ने बदली बाजी?

मीनापुर में विकास की परिकथा सिर्फ कुछ आंकड़ों से नहीं बनता। उसके पीछे एक...

मीनापुर की राजनीति: 1951 से 2025 तक सत्ता बदलती रही, लेकिन क्या बदला राजनीति का मिजाज?

मीनापुर की राजनीति को अगर सिर्फ पिछले 10 या 15 वर्षों के चुनाव से...

बिहार का पलायन: क्या रोज़गार की तलाश में निकलती पीढ़ियां कभी लौटेंगी?

बिहार के किसी छोटे से गांव में शाम ढलते ही अगर आप बस अड्डे,...

कहां गुम हो रही हैं बिहार की बेटियां?

गुमशुदगी का आंकड़ा गंभीर है एक लड़की घर से निकलती है। परिवार समझता है कि...

बिहार में बारिश और तेज हवा ने फिर बदला मौसम का मिजाज, 26 जिलों में अलर्ट; आखिर कब थमेगा यह सिलसिला?

आसमान में बादल हैं। रुक-रुक कर बारिश लगातार हो रही है, अचानक तेज बौछार...

क्या एक विधायक पांच साल में अपने क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है?

KKN ब्यूरो। विधायक के पास अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए 5 वर्षों में 20...

मीनापुर में जदयू का ‘संवाद’ या संगठन के भीतर उठती बेचैनी?

मनीष वर्मा के सामने खुली कार्यकर्ताओं की परत-दर-परत पीड़ा KKN ब्यूरो। मीनापुर में रविवार का...

एक सच, दो नज़रिया: दिमाग की गलती, समाज का असर या सोच का खेल?

क्यों एक ही तथ्य किसी को अवसर लगता है, तो किसी को खतरा? क्या...

मीनापुर की जुड़वा बहनों ने CSIR-NET में लहराया परचम, शनाया को ऑल इंडिया 92वीं रैंक

मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड की जुड़वा बहनों शनाया निशांत और शोनाया निशांत ने CSIR-NET...

बिहार की सड़कें बन गईं मौत की सड़क? 5 साल में 34% बढ़े हादसे, 9,347 लोगों की गई जान

आंकड़ों का एक्स-रे: दुर्घटनाएं बढ़ीं, मौतें उससे भी तेज बढ़ीं KKN ब्यूरो। एक सड़क। एक...

लग गया ट्रांसफार्मर; किसानों की लड़ाई रंग लाई

जिस समस्या के समाधान की उम्मीद किसानों ने लगभग छोड़ दी थी, आखिरकार उसी...

बिहार की बाढ़: पानी उतर जाएगा, लेकिन कब तक पटरी पर लौटेंगी लोगों की जिंदगी?

क्या बाढ़ आने के बाद नाव भेज देना, राहत शिविर खोल देना और कुछ...

ध्वनि प्रदूषण: जुलूस आगे बढ़ता रहा… लेकिन, कानों में पड़ने वाला शोर वहीं रह गया

डीजे की धुन पर नाचते बच्चों को देखकर भीड़ तालियां बजाती है। किसी को...

क्या नकारात्मक सोच इंसान को उसी अंधेरे में धकेल देती है, जिसे वह दुनिया में खोज रहा होता है?

हर घटना में षड्यंत्र, हर परंपरा में खामी, हर व्यक्ति में स्वार्थ और हर...