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बिहार में अर्नब का कितना असर? 31 अक्टूबर तक बारिश के आसार

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जानिए तूफान की असली ताकत

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब अब बिहार में मौसम बदलने की वजह बन रहा है। लेकिन क्या यह तूफान बिहार में भी तबाही मचाएगा? इसका जवाब समझने के लिए तूफान की वास्तविक स्थिति, उसकी दिशा और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान को अलग-अलग देखना होगा।

29 अक्टूबर 2026 को जारी मौसम विभाग के समुद्री बुलेटिन के अनुसार, अर्नब कमजोर होकर अवदाब की स्थिति में पहुंच चुका था। इसके बावजूद बिहार में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का खतरा तत्काल समाप्त नहीं हुआ है। मौसम संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में 31 अक्टूबर तक कई जगह बारिश की संभावना बनी रह सकती है।

आखिर अर्नब है क्या?

अर्नब कोई अलग तरह की प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ एक नामित चक्रवाती तूफान है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की उत्तर हिंद महासागर के चक्रवातों की नाम-सूची में अर्नब बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित नाम है। इसका उच्चारण ‘ओरनब’ बताया गया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 26-27 अक्टूबर के दौरान यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी तक पहुंचा। 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यानम के तटीय क्षेत्र से गुजरने के बाद यह कमजोर होने लगा। अगले दिन यह अवदाब की स्थिति में पहुंच गया।

बिहार में इसका असर क्यों हो रहा है?

बिहार समुद्र से दूर है। इसलिए अर्नब का तटीय इलाकों जैसा सीधा चक्रवाती प्रहार यहां अपेक्षित नहीं है। असली चिंता इसके कमजोर पड़ने के बाद भी वातावरण में मौजूद नमी, बादलों और दूसरे मौसमी प्रभावों की है।

इन्हीं परिस्थितियों के कारण बिहार में कहीं हल्की, कहीं मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवा भी परेशानी बढ़ा सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर आधारित रिपोर्टों में हवा के झोंकों की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।

किन जिलों में ज्यादा सतर्कता जरूरी?

29 अक्टूबर की रिपोर्टों में भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर और बक्सर के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट बताया गया। वहीं मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, वैशाली, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण सहित कई जिलों में येलो अलर्ट की जानकारी दी गई।

अलर्ट जिलेवार और समय के साथ बदल सकता है। इसलिए इसे पूरे जिले में एक जैसी बारिश की गारंटी नहीं समझना चाहिए। लोगों को अपने जिले की नवीनतम आधिकारिक चेतावनी पर नजर रखनी चाहिए।

अर्नब का असर कब तक रहेगा?

मौसम संबंधी उपलब्ध पूर्वानुमानों के आधार पर 31 अक्टूबर तक बारिश की गतिविधियां बने रहने की संभावना है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि पूरे बिहार में लगातार तीन दिन बारिश होगी।

29 अक्टूबर को मौसम विभाग के समुद्री बुलेटिन ने बताया कि अर्नब का अवदाब कमजोर होकर उत्तर छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की ओर बढ़ रहा था। इससे तूफान की ताकत घट रही है। लेकिन कमजोर पड़ने के बाद भी उससे जुड़ी नमी और मौसमी परिस्थितियां बारिश करा सकती हैं।

इसलिए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सबसे उचित निष्कर्ष यही है कि बिहार में इसका प्रभाव अगले कुछ दिनों तक रह सकता है। 31 अक्टूबर के बाद मौसम पूरी तरह कब सामान्य होगा, इसका भरोसेमंद उत्तर नवीनतम पूर्वानुमान से ही मिलेगा।

किसानों और आम लोगों को क्या करना चाहिए?

इस समय किसानों के लिए सबसे बड़ा जोखिम तैयार धान और खुले में रखी उपज को हो सकता है। मौसम अनुकूल होने पर कटाई करें और कटी फसल को सुरक्षित, सूखे स्थान पर रखें। खुले में रखी उपज को तिरपाल से ढकना उपयोगी होगा। खेतों में पानी जमा होने से रोकने के लिए जलनिकासी की व्यवस्था रखें।

गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत, जलाशय और ऊंचे पेड़ों से दूर रहें। बिजली चमकने पर किसी मजबूत पक्के भवन में शरण लें। तेज हवा के समय कमजोर छतों और गिर सकने वाली वस्तुओं से भी दूरी बनाए रखें।

तूफान कमजोर, लेकिन सावधानी जरूरी

अर्नब की सबसे तीव्र चक्रवाती अवस्था बिहार तक पहुंचने की स्थिति नहीं है। फिर भी इसके अवशेष और उनसे जुड़ी मौसमी परिस्थितियां बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का जोखिम पैदा कर सकती हैं। उपलब्ध पूर्वानुमान 31 अक्टूबर तक सतर्क रहने का संकेत देते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चक्रवात का कमजोर होना और उसका मौसम संबंधी असर समाप्त होना दो अलग बातें हैं। बिहार के लोगों को अफवाहों के बजाय भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और जिला प्रशासन की ताजा चेतावनियों पर भरोसा करना चाहिए।

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