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रोडसाइड स्नैक से 1 करोड़ का बिज़नेस: बिहार के दो टीनएजर्स ने कैसे बदल डाला ठेकुआ का स्वरूप

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बिहार के दो 16 वर्षीय दोस्तों ने एक पारंपरिक छठ पूजा डेलिकेसी को एक सफल एंटरप्राइज़ में बदल दिया है। उनका यह बिज़नेस आज एक करोड़ रुपये का टर्नओवर कर चुका है। उनकी यह प्रेरणादायक एंटरप्रेन्योरियल जर्नी दर्शाती है कि युवा इनोवेटर्स कैसे सांस्कृतिक विरासत को मॉडर्न बिज़नेस प्रैक्टिसेज़ से जोड़ सकते हैं। उन्होंने फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड के साथ कल्चरल हेरिटेज का बेहतरीन मिक्स प्रस्तुत किया है।

बदलाव की शुरुआत एक हेल्थ क्राइसिस से

जयंता करमाकर और कैलाश की यह कहानी एक हेल्थ क्राइसिस से शुरू हुई। छठ पूजा का पारंपरिक मीठा ठेकुआ खाने के बाद जयंता बीमार पड़ गए। उन्होंने वह ठेकुआ एक रोडसाइड वेंडर से खरीदा था। इस घटना के बाद उन्हें मार्केट में एक बड़ी कमी महसूस हुई। यह स्नैक पूरे बिहार के लोगों के लिए बहुत सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व रखता है। लेकिन यह मुख्य रूप से अनहाइजीनिक कंडीशन में बेचा जाता था। इस कारण इसकी पहुंच (रीच) सीमित थी। ग्राहक इसे खरीदने में हिचकिचाते थे। इसी रियलाइज़ेशन ने उनके विजन को जन्म दिया। उन्होंने मॉफ़न फूड सेफ्टी और हाइजीन स्टैंडर्ड को अपनाते हुए पारंपरिक इंडियन स्नैक्स का ट्रांसफॉर्मेशन करने की ठानी।

किचन एक्सपेरिमेंट्स से ब्रांड लॉन्च तक का सफ़र

यह विचार एक उत्साही कन्वर्सेशन के रूप में शुरू हुआ था, जो जल्द ही एक ठोस एक्शन में बदल गया। कैलाश ने अपने परिवार का सपोर्ट करने के लिए स्कूल छोड़ दिया था। वह रेलवे स्टेशन पर पानी की बोतलें बेचते थे। उन्होंने जयंता के विजन को तुरंत अपना लिया। उनका लक्ष्य मॉडर्न एप्रोच के ज़रिए पारंपरिक फ्लेवर्स को वापस मुख्य धारा में लाना था।

दोनों दोस्तों ने मिलकर एक छोटी सी होम किचन में रेसिपीज़ पर एक्सपेरिमेंट करना शुरू किया। उन्होंने ठेकुआ, मखाना, बनाना चिप्स और लड्डू जैसे विभिन्न पारंपरिक स्नैक्स का टेस्टिंग किया। उनकी प्राथमिकता सफाई (क्लीनलीनेस) और ऑथेंटिक टेस्ट को बनाए रखना था।

शुरूआती दौर के चैलेंजेज

शुरुआती दौर काफी चैलेंजिंग था। हफ़्तों तक उन्हें कोई ऑर्डर नहीं मिला। संदेह करने वालों ने यह सवाल उठाया कि क्या ग्राहक पारंपरिक रूप से घर पर बने स्नैक्स के पैकेज्ड वर्ज़न को स्वीकार करेंगे। हालाँकि, दोनों टीनएजर्स डटे रहे। उन्होंने लगातार अपनी रेसिपीज़ में सुधार किया। मार्केटिंग के लिए उन्होंने सोशल मीडिया का उपयोग किया। साथ ही, उन्होंने स्थानीय कस्टमर्स के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़ाव बनाया।

‘शुद्ध स्वाद’ के सक्सेस की कहानी

साल 2023 में जयंता और कैलाश ने आधिकारिक तौर पर अपना स्नैक ब्रांड ‘शुद्ध स्वाद’ लॉन्च किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में एक छोटे से सेटअप से यह काम शुरू किया। उनकी लगन का फल उन्हें बहुत तेज़ी से मिला। एक वर्ष के भीतर उनकी कंपनी ने शानदार ग्रोथ दर्ज की।

  •  उन्होंने पूरे इंडिया में तीन लाख से अधिक कस्टमर्स तक अपनी पहुँच बनाई।
  • सिर्फ़ दो फाउंडर्स से शुरू हुई यह टीम बढ़कर लगभग पंद्रह एम्प्लॉई की हो गई। ये एम्प्लॉई प्रोडक्शन, पैकेजिंग, मार्केटिंग और कस्टमर सर्विस संभालते हैं।
  • कंपनी ने एक करोड़ रुपये का वैल्यूएशन हासिल कर लिया।
  • अमेज़न और इंस्टाग्राम सहित प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से डिस्ट्रीब्यूशन का एक्सपेंशन किया गया।

प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और भविष्य का विजन

शुद्ध स्वाद वर्तमान में ठेकुआ की दो वैराइटीज़ ऑफर करता है। एक कोकोनट गुड़ से बना है और दूसरा कोकोनट सूजी से। वे जल्द ही इलायची फ्लेवर वाला ठेकुआ पेश करने की योजना बना रहे हैं। कैलाश डे-टू-डे ऑपरेशन संभालते हैं। वहीं, जयंता अपनी स्टडीज़ और बिज़नेस के बीच बैलेंस बनाकर चलते हैं। यह दिखाता है कि युवा एंटरप्रेन्योर्स एजुकेशन और उद्यमिता को एक साथ कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।

प्रभाव और प्रेरणा

उनका यह बिज़नेस मॉडल एक साथ कई चैलेंजेस का समाधान करता है। यह लुप्त हो रहे पारंपरिक फूड कल्चर को संरक्षित करता है। यह लगभग पंद्रह वर्कर्स को एम्प्लॉयमेंट प्रदान करता है। यह फूड सेफ्टी और हाइजीन स्टैंडर्ड को सुनिश्चित करता है। साथ ही, यह सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्नैक्स को अब सीज़नल फेस्टिवल तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष उपलब्ध कराता है। उनकी यह कहानी स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक प्रभावशाली संदेश है। यह कहानी बताती है कि सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़ी वास्तविक मार्केट प्रॉब्लम को पहचानना सस्टेनेबल और स्केलेबल बिज़नेस सॉल्यूशन की ओर ले जा सकता है।

बिहार की युवा आबादी और एस्पायरिंग एंटरप्रेन्योर्स के लिए, जयंता और कैलाश की यह जर्नी एक उदाहरण है। यह दिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत अनुभव, दृढ़ संकल्प और इनोवेशन एक साथ मिलकर सांस्कृतिक परंपराओं को करोड़ों रुपये के सफल मॉडर्न बिज़नेस में बदल सकते हैं।

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