बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में एक महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा आधारित बिजली घर की स्थापना की योजना बनाई गई है। इस परियोजना का उद्देश्य बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल करना है। यह सौर ऊर्जा संयंत्र 500 मेगावाट की क्षमता वाला होगा और इसका निर्माण कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
सौर ऊर्जा परियोजना के तहत बिजली आपूर्ति
कोल इंडिया लिमिटेड के इस सौर ऊर्जा संयंत्र से पटना जैसे बड़े शहर की आधी आबादी को बिजली आपूर्ति की जा सकेगी। इसके अलावा, इस परियोजना से राज्य की कुल विद्युत आपूर्ति में से एक-तिहाई हिस्सा गैर-पारंपरिक स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य भी पूरा होगा। यह कदम बिहार में सौर ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है।
इस परियोजना के लिए कोल इंडिया ने बिहार सरकार से पश्चिम चंपारण में उपयुक्त भूमि की मांग की है। इसके साथ ही, बिहार राज्य पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) से अनुरोध किया गया है कि वह इस सौर संयंत्र से उत्पादित बिजली की खरीद के लिए शीघ्र ‘पावर परचेज एग्रीमेंट’ (PPA) करें।
बिहार सरकार का सहयोग और दिशा-निर्देश
कोल इंडिया ने पहले बिहार के मुख्य सचिव और पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर इस परियोजना के लिए आवश्यक सहयोग की मांग की थी। केंद्र सरकार से प्राप्त निर्देशों के आधार पर पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी को भूमि का चयन करने और इसकी जानकारी कोल इंडिया को देने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, कोल इंडिया की एक तकनीकी टीम जल्द ही पश्चिम चंपारण का दौरा करेगी ताकि सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं का आकलन किया जा सके। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कोल इंडिया ने पश्चिम चंपारण को भौगोलिक दृष्टि से उपयुक्त पाया है।
बिहार के ऊर्जा मंत्री का बयान
बिहार सरकार इस परियोजना के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। राज्य के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि पश्चिम चंपारण में सौर बिजली घर स्थापित करने के लिए पावर जनरेशन कंपनी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करेगी और नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी।
कोल इंडिया के अन्य सौर ऊर्जा परियोजनाएं
कोल इंडिया देश के अन्य हिस्सों में भी सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर काम कर रही है। वर्तमान में, कोल इंडिया गुजरात में 400 मेगावाट, राजस्थान में 2250 मेगावाट और उत्तर प्रदेश में 500 मेगावाट की सौर परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। इसके अलावा, कोल इंडिया अपनी सहयोगी कंपनियों के माध्यम से वर्तमान समय में 119 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन कर रही है।
बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयास
बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य पहले ही 1922 मेगावाट सौर बिजली का उत्पादन कर रहा है। इसके अलावा, लखीसराय के कजरा में देश का सबसे बड़ा बैटरी आधारित सोलर बिजली घर बनाया जा रहा है। इस परियोजना के पहले चरण में 185 मेगावाट और दूसरे चरण में 241 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2029-30 तक बिहार में 23,968 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाए, जिसमें से 20,000 मेगावाट सौर ऊर्जा से प्राप्त किया जाएगा। इस दिशा में राज्य सरकार ने कई योजनाओं को लागू किया है।
कृषि क्षेत्र में सोलर ऊर्जा का विस्तार
बिहार में कृषि क्षेत्र को भी सौर ऊर्जा से लाभान्वित करने के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। राज्य के 15 ग्रिड सब-स्टेशनों में बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे 125 मेगावाट (500 मेगावाट आवर) बिजली उत्पन्न होगी। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में सोलर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए खेतों में सोलर पंप लगाए जा रहे हैं।
बिहार के लिए यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है
पश्चिम चंपारण में स्थापित होने वाली इस 500 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह परियोजना राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके माध्यम से बिहार न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी राज्य का योगदान बढ़ेगा।
इस परियोजना के जरिए बिहार को एक स्थिर और सस्ती ऊर्जा आपूर्ति मिल सकेगी। इसके अलावा, सौर ऊर्जा से उत्पादन होने वाली बिजली पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर होगी, जिससे राज्य में प्रदूषण की समस्या में कमी आएगी।
बिहार में सौर ऊर्जा आधारित बिजली घर की स्थापना राज्य के ऊर्जा सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि हो सकती है। कोल इंडिया और बिहार सरकार के सहयोग से यह परियोजना राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में, इस परियोजना का राज्य की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। बिहार सरकार और कोल इंडिया का यह साझा प्रयास न केवल राज्य को बिजली की स्थिर आपूर्ति देगा, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार को एक नई पहचान दिलाएगा।
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