बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, सरकार की ओर से रोज़ नए ऐलान हो रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक अगस्त की सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। इस घोषणा में शिक्षा विभाग से जुड़े कई कर्मियों की मानदेय राशि को दोगुना किए जाने की बात कही गई है।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने स्कूलों में कार्यरत रसोइयों, रात्रि प्रहरियों और शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने के दृष्टिकोण से लिया गया है और इसे तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा।
मिड डे मील कुक को मिलेगा अब ₹3300 प्रति माह
नीतीश कुमार ने जानकारी दी कि Mid Day Meal Cooks यानी मध्याह्न भोजन योजना के तहत काम करने वाले रसोइयों का मासिक मानदेय ₹1650 से बढ़ाकर ₹3300 कर दिया गया है। यह कदम लंबे समय से चली आ रही उनकी मांगों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
राज्य सरकार की Mid Day Meal Scheme न केवल पोषण के उद्देश्य से चल रही है, बल्कि इसके ज़रिये स्कूलों में उपस्थिति दर भी बढ़ी है। इन रसोइयों का काम छात्रों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, जिससे बच्चों की सेहत और पढ़ाई दोनों में सुधार आता है। यह निर्णय उनके कार्य की महत्ता को स्वीकार करने का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रसोइयों की मेहनत के बावजूद उन्हें लंबे समय से उचित मानदेय नहीं मिल रहा था। अब इस बढ़ोतरी के साथ उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
स्कूलों में तैनात नाइट गार्ड को अब ₹10000 वेतन
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत Night Guard यानी रात्रि प्रहरियों का मानदेय अब ₹5000 से बढ़ाकर ₹10000 किया गया है। इन कर्मियों की ज़िम्मेदारी स्कूल भवन और सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, विशेष रूप से रात के समय।
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में स्कूल भवनों का तेजी से निर्माण हुआ है। कंप्यूटर लैब, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य आधारभूत ढांचे विकसित किए गए हैं। ऐसे में इन परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए रात्रि प्रहरियों की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
सरकार का यह निर्णय इन सुरक्षाकर्मियों की भूमिका को स्वीकार करने के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मंशा को भी दर्शाता है।
फिजिकल एजुकेशन और हेल्थ इंस्ट्रक्टर को ₹16000 मानदेय
शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों को अब ₹16000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा, जो पहले ₹8000 था। इसके अलावा, उनकी वार्षिक वेतन वृद्धि भी अब ₹200 से बढ़ाकर ₹400 कर दी गई है।
Physical Education Instructors स्कूलों में खेलकूद, योग, स्वास्थ्य जागरूकता और अनुशासन को बढ़ावा देते हैं। इनकी भूमिका बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। राज्य सरकार के इस फैसले से ऐसे प्रशिक्षकों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा और योग्य व्यक्तियों की नियुक्ति भी संभव हो सकेगी।
नीतीश कुमार ने कहा कि यह बढ़ोतरी सिर्फ आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि शिक्षा के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में यह नीति मददगार सिद्ध होगी।
2005 से अब तक शिक्षा में व्यापक निवेश
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में 2005 से शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2005 में राज्य का शिक्षा बजट ₹4366 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹77690 करोड़ हो गया है। यह वृद्धि राज्य सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस दौरान राज्य में शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यालय भवनों का निर्माण और आधारभूत ढांचे में व्यापक सुधार किए गए हैं। लेकिन इसके साथ ही, सरकार ने उन कर्मियों को भी महत्व दिया है जो स्कूलों की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करते हैं।
नीतीश कुमार ने कहा कि रसोइयों, रात्रि प्रहरियों और शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में इन कर्मियों के मानदेय में दोगुनी वृद्धि का फैसला उन्हें सम्मान देने का प्रतीक है।
सम्मानजनक वृद्धि और बेहतर भविष्य की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह बढ़ोतरी केवल चुनावी घोषणा नहीं है, बल्कि उनके द्वारा लंबे समय से की जा रही सुधार योजनाओं का हिस्सा है। उन्होंने इसे एक “सम्मानजनक वृद्धि” बताया, जो इन कर्मियों की सेवा को सराहने के उद्देश्य से की गई है।
सरकार की यह नीति स्पष्ट रूप से यह संकेत देती है कि वह शिक्षा व्यवस्था को केवल इमारतों या किताबों तक सीमित नहीं मानती, बल्कि उन लोगों को भी महत्व देती है जो उसे जीवंत बनाते हैं।
चुनाव पूर्व रणनीति का हिस्सा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र की गई है। इन वर्गों से जुड़े हज़ारों परिवारों को इस फैसले से सीधा लाभ मिलेगा, जो सरकार की जमीनी पकड़ को और मज़बूत कर सकता है।
हालांकि, विपक्ष इस पर सवाल उठा सकता है और इसे एक चुनावी स्टंट कह सकता है, लेकिन इस निर्णय का लाभ वास्तविक है। रसोइयों, प्रहरियों और अनुदेशकों को लंबे समय से इस तरह की राहत की प्रतीक्षा थी, और अब उन्हें आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा व्यवस्था में समावेशी दृष्टिकोण
बिहार की शिक्षा व्यवस्था में कई चुनौतियां रही हैं। शिक्षक की कमी, आधारभूत सुविधाओं का अभाव और छात्रों की कम उपस्थिति जैसे मुद्दों से सरकार को लगातार जूझना पड़ा है। लेकिन बीते दो दशकों में सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से काफी बदलाव देखने को मिले हैं।
इस मानदेय वृद्धि के ज़रिए सरकार यह संकेत देना चाहती है कि शिक्षा सिर्फ कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हर एक कर्मी की अहम भूमिका होती है। यह एक Inclusive Education Policy की ओर बढ़ता हुआ कदम है।
जैसे-जैसे बिहार चुनाव की ओर बढ़ रहा है, सरकार की प्राथमिकताएं साफ़ दिख रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं में सुधार को केंद्र में रखते हुए नई घोषणाएं की जा रही हैं। यह मानदेय वृद्धि निश्चित रूप से हजारों कर्मियों के लिए राहत की खबर है, लेकिन अब असली चुनौती इसके समय पर कार्यान्वयन की है।
इस निर्णय से यह उम्मीद की जा रही है कि अन्य संविदा कर्मियों और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों को भी भविष्य में ऐसी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह कदम, प्रशासनिक निर्णय के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी है, जिसमें विकास और सम्मान दोनों को प्राथमिकता दी गई है।



