बिहार के भोजपुर जिले में ज़मीन विवाद ने एक बार फिर से हिंसक रूप ले लिया है। आयर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भेड़री गांव में धान की रोपनी के दौरान दो पक्षों के बीच पुराना विवाद इतना बढ़ गया कि गोलीबारी हो गई। इस फायरिंग में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को आरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
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खेत में रोपनी करते समय शुरू हुआ झगड़ा, बन गई हत्या की वजह
जानकारी के अनुसार, भेड़री गांव में दो परिवारों के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। घटना के दिन एक पक्ष खेत में धान की रोपनी कर रहा था, तभी दूसरा पक्ष भी वहां पहुंच गया। पहले कहासुनी हुई और फिर देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच तनाव इतना बढ़ा कि बात गोली चलाने तक पहुंच गई।
इसी गोलीबारी में गांव के ही निवासी भगवान सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, इसी गांव के ददन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आनन-फानन में पुलिस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है और डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
पुलिस मौके पर पहुंची, छानबीन शुरू
गोली चलने की खबर मिलते ही आयर थाना की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। गांव में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है ताकि दोबारा कोई झड़प न हो।
पुलिस ने इस मामले में प्राथमिक जांच शुरू कर दी है और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से चल रहा था, जिसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को भी थी। अब इस घटना के बाद पुलिस हत्या और हथियार रखने के आरोपों के तहत केस दर्ज करने की तैयारी में है।
ग्रामीणों में दहशत, पूरे इलाके में तनाव का माहौल
इस घटना के बाद भेड़री गांव और आस-पास के इलाकों में तनाव का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और खेतों में काम करने से भी हिचकिचा रहे हैं। कई ग्रामीणों ने पुलिस से अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
गांववालों का कहना है कि यदि समय रहते इस विवाद को सुलझा लिया गया होता, तो आज यह खून-खराबा नहीं होता। मृतक के परिवार ने सरकार से मुआवज़े और त्वरित न्याय की मांग की है। वहीं, घायलों के परिजन इलाज की व्यवस्था और अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
गांवों में बढ़ते जमीन विवाद बन रहे हैं हिंसा की जड़
भोजपुर की यह घटना कोई पहली नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि ग्रामीण इलाकों में जमीन को लेकर विवाद तेजी से बढ़े हैं। कहीं बंटवारे को लेकर झगड़ा, तो कहीं दस्तावेजों के अभाव में विरोध। कई बार ये विवाद फसल की बुआई या कटाई के समय भड़क उठते हैं, जब दोनों पक्ष जमीन पर कब्जे का दावा करते हैं।
इन झगड़ों में अब अवैध हथियारों का इस्तेमाल आम बात होती जा रही है। छोटे-छोटे विवाद कुछ ही मिनटों में गोलीबारी में तब्दील हो जाते हैं, जिससे जान-माल की हानि होती है और पूरे इलाके में असुरक्षा का माहौल बनता है।
प्रशासन पर उठे सवाल, रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था की मांग
इस हादसे ने एक बार फिर स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पहले ही इस विवाद को सुलझा लिया गया होता, तो शायद आज एक जान नहीं जाती और दूसरी मौत से जूझ नहीं रही होती।
भोजपुर जिला प्रशासन पर अब दबाव है कि वह इस मामले में सख्त और तेज कार्रवाई करे। पुलिस ने बताया है कि शूटरों की पहचान की जा रही है और जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी। गांव में हालात को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
समाधान की दिशा में उठने चाहिए ठोस कदम
ऐसी घटनाओं से साफ है कि सिर्फ कानूनी कार्रवाई ही काफी नहीं है। ज़रूरत है कि गांव स्तर पर ही भूमि विवादों के निपटारे के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। रिकॉर्ड की पारदर्शिता, समय पर फैसला और पंचायत स्तर पर सुलह—ये सभी मिलकर ही इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है।
खेती करने वाले किसान, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उन्हें खून और संघर्ष की ज़मीन नहीं, उपज और शांति की ज़मीन चाहिए।
भेड़री गांव की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक व्यवस्था पर गहरी चोट है। ज़मीन, जो अन्न पैदा करने का जरिया है, वही अब हिंसा और मौत का कारण बन रही है।
इस घटना के ज़रिए प्रशासन, पुलिस और समाज को यह समझना होगा कि समय रहते हल न निकाला जाए, तो विवाद बंदूक की नली तक पहुंच सकते हैं।
सरकार को चाहिए कि वह न सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई करे, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए नीतिगत बदलाव भी लाए।



