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बिहार ने दूध, अंडा और मांस उत्पादन में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ा, दर्ज की अभूतपूर्व प्रगति

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बिहार ने इस वर्ष अपने पशुपालन क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है, जिसमें राज्य ने दूध, अंडा और मांस उत्पादन में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ते हुए महत्वपूर्ण वृद्धि की है। केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि बिहार का पशुपालन क्षेत्र 2024-25 में तेजी से बढ़ा है, और राज्य ने कई श्रेणियों में शीर्ष रैंक हासिल किए हैं।

दूध, अंडा और मांस उत्पादन में अद्वितीय वृद्धि

बिहार ने इस वर्ष दूध, अंडा और मांस उत्पादन में अपनी प्रगति का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। राज्य ने अंडा उत्पादन में 9.99% की वृद्धि दर्ज की, जो राष्ट्रीय औसत 4.44% से कहीं अधिक है। दूध उत्पादन में बिहार ने 4.24% की वृद्धि हासिल की है, जो राष्ट्रीय वृद्धि दर 3.58% से अधिक है। मांस उत्पादन में भी राज्य ने 4.03% की वृद्धि की है, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि दर 2.46% रही है।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि बिहार ने पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और यह भारतीय कृषि क्षेत्र में एक प्रमुख योगदानकर्ता बन गया है। राज्य ने इन क्षेत्रों में लगातार वृद्धि की है, जो बिहार की आर्थिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रति व्यक्ति उपलब्धता में वृद्धि

पशुपालन उत्पादन में इन बढ़ोतरी का प्रभाव अब प्रति व्यक्ति उपलब्धता में भी दिखने लगा है। 2023-24 में बिहार में औसत दैनिक दूध उपलब्धता 277 ग्राम थी, जो अब बढ़कर 285 ग्राम हो गई है। अंडों की वार्षिक प्रति व्यक्ति उपलब्धता 27 से बढ़कर 29 हो गई है, जबकि मांस की उपलब्धता 3.19 किलो से बढ़कर 3.27 किलो हो गई है। ये सुधार यह दर्शाते हैं कि बिहार अपने लोगों को बेहतर पोषण देने में सफल हो रहा है।

सरकारी कार्यक्रमों का प्रभाव

डॉ. एन विजयलक्ष्मी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पशुपालन और मत्स्य संसाधन विभाग, ने कहा कि राज्य के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन का कारण सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं में निरंतर निवेश और लक्षित प्रयास हैं। उन्होंने इसे “असाधारण प्रगति” के रूप में वर्णित किया, जो विशेष रूप से पशुपालन और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने वाले योजनाओं के परिणामस्वरूप हुआ है।

बिहार में विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर किसानों और पशुपालकों को मिल रहा है। इन योजनाओं ने उत्पादन को बढ़ाया है, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित किए हैं, और किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है।

मत्स्य उत्पादन में भी सुधार

पशुपालन क्षेत्र में बिहार की सफलता केवल दूध, अंडा और मांस तक सीमित नहीं है। राज्य ने मत्स्य उत्पादन में भी महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। 2013-14 में बिहार राष्ट्रीय स्तर पर नौवें स्थान पर था, लेकिन अब राज्य चौथे स्थान पर पहुंच गया है। बिहार अब मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है, जो इसकी खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी सफलता है।

डॉ. विजयलक्ष्मी ने बताया कि मछली उत्पादन में वृद्धि से ग्रामीण आय में सुधार होगा और नए अवसर सृजित होंगे। यह किसानों और मछली पालकों के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है, जो उनकी आय में विविधता और स्थिरता लाएगा।

बिहार की पशुपालन अर्थव्यवस्था की लचीलापन

बिहार की पशुपालन अर्थव्यवस्था की वृद्धि यह साबित करती है कि राज्य ने अपने कृषि और पशुपालन क्षेत्रों में मजबूती से निवेश किया है। अधिकारियों का मानना है कि राज्य की निरंतर वृद्धि राज्य सरकार द्वारा चलाए गए प्रभावी कार्यक्रमों और योजनाओं का परिणाम है। इन योजनाओं के माध्यम से बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है, जिससे किसानों और पशुपालकों को बेहतर जीवन स्तर प्राप्त हुआ है।

बिहार का पशुपालन क्षेत्र न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप बिहार का कृषि क्षेत्र मजबूती से विकसित हो रहा है, जो अब एक प्रमुख योगदानकर्ता बन गया है। राज्य की इस सफलता से यह स्पष्ट हो गया है कि एक सशक्त और समृद्ध कृषि नीति से राज्य की अर्थव्यवस्था में समग्र सुधार संभव है।

भविष्य में सतत वृद्धि और अवसरों का विस्तार

बिहार ने पिछले कुछ वर्षों में पशुपालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, और राज्य सरकार की निरंतर निवेश योजनाओं के तहत यह और अधिक वृद्धि की ओर अग्रसर है। भविष्य में, राज्य सरकार की योजनाएं और भी प्रभावी होंगी, जो दूध, अंडे और मांस उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन के अन्य क्षेत्रों में भी निरंतर वृद्धि को सुनिश्चित करेंगी।

सरकार का ध्यान न केवल पशुपालन उत्पादकता में सुधार लाने पर है, बल्कि यह राज्य के किसानों और पशुपालकों के लिए अधिक अवसरों का निर्माण करने पर भी केंद्रित है। इसके अलावा, बिहार सरकार कृषि अवसंरचना और विपणन नेटवर्क में भी सुधार करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि राज्य के उत्पादकों को बेहतर बाजार तक पहुंच मिले।

बिहार ने दूध, अंडा और मांस उत्पादन में शानदार प्रगति की है और राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ते हुए महत्वपूर्ण वृद्धि हासिल की है। अंडा उत्पादन में 9.99% की वृद्धि, दूध उत्पादन में 4.24% की वृद्धि और मांस उत्पादन में 4.03% की वृद्धि ने बिहार को इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख स्थान दिलाया है। सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभाव इन परिणामों में स्पष्ट रूप से दिख रहा है, और ये योजनाएँ राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर को सुधारने में मदद कर रही हैं।

भविष्य में, बिहार के पशुपालन क्षेत्र को और अधिक वृद्धि और सफलता की दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए निरंतर समर्थन और रणनीतिक निवेश की आवश्यकता होगी। इस सफलता से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार अपने पशुपालन क्षेत्र के जरिए देश के कृषि क्षेत्र में एक मजबूत योगदान दे रहा है।

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