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पटना और सीतामढ़ी में हत्या से बिहार दहला, तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार को घेरा

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बिहार में एक बार फिर से कानून व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। राजधानी पटना और सीमावर्ती जिले सीतामढ़ी में हुई दो अलग-अलग हत्याओं ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। जहां पटना में बीजेपी नेता सुरेंद्र केवट की गोली मारकर हत्या कर दी गई, वहीं सीतामढ़ी में एक व्यापारी को भी गोली से भून दिया गया। इन दोनों घटनाओं ने न सिर्फ आम जनता को डरा दिया है, बल्कि विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका भी दे दिया है।

इन हत्याओं पर राजद नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में इंसानी जान अब कीड़ों-मकोड़ों से भी सस्ती हो गई है, और सरकार केवल जाति खोजने में लगी है।

पटना में बीजेपी नेता की हत्या: अपराधियों के हौसले बुलंद

पटना में बीजेपी किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र केवट की हत्या ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि केवट की हत्या दिनदहाड़े की गई और अपराधी फरार हो गए। अभी तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है।

यह हत्या अकेली नहीं है। इससे पहले भी गोपल खेमका (व्यवसायी), रामानंद यादव (बालू कारोबारी), और विक्रम झा (मार्ट के मालिक) की हत्याएं हो चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से यह साफ हो गया है कि राजधानी पटना अपराधियों के लिए सुरक्षित अड्डा बनता जा रहा है।

सीतामढ़ी में भी हत्या: व्यापारी को मारी गोली

पटना की घटना के महज कुछ घंटों बाद ही खबर आई कि सीतामढ़ी जिले में एक व्यापारी की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई है। व्यापारियों के संगठन और स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अगर व्यापारी और नेता तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?

तेजस्वी यादव का तंज: “सरकारी गुंडों की गोलियाँ और नेताओं की बोलियाँ”

इन घटनाओं पर तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा:

“अब पटना में बीजेपी नेता की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। किससे कहें, कौन सुनेगा? एनडीए सरकार में सच्चाई सुनने वाला कोई नहीं है। ये सरकार अपनी गलती स्वीकार नहीं करती।”

तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि जब सबको मुख्यमंत्री की सेहत के बारे में जानकारी है, तो बीजेपी के दो-दो उपमुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं?

तेजस्वी ने तंज कसते हुए भाजपा की सहयोगी पार्टी को “भ्रष्ट भूजा-DK पार्टी” कहा और पूछा कि इन जघन्य हत्याओं पर उनका कोई बयान क्यों नहीं आया।

“हत्याओं की गिनती भी मुश्किल हो गई है” – तेजस्वी

तेजस्वी यादव ने आगे लिखा कि बिहार में इस कदर हत्याएं हो रही हैं कि अब उन्हें गिन पाना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने कई हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए लिखा:

  • सीतामढ़ी में व्यापारी की हत्या

  • पटना में दुकानदार की हत्या

  • नालंदा में नर्स को गोली मारकर हत्या

  • खगड़िया में युवक की हत्या

  • गया और नालंदा में दो-दो हत्याएं

तेजस्वी का आरोप है कि ये सभी हत्याएं सरकारी संरक्षण प्राप्त अपराधियों द्वारा की जा रही हैं, और सरकार के नेता सिर्फ अपराधियों की जाति खोजने में लगे हैं, न कि उन्हें पकड़ने में।

जनता में डर, विपक्ष में आक्रोश

इन हत्याओं के बाद राज्य भर में डर और असुरक्षा का माहौल है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं और कह रहे हैं कि बिहार में जंगलराज की वापसी हो गई है। वहीं विपक्ष इन घटनाओं को आधार बनाकर सरकार की कानून व्यवस्था पर विफलता को जनता के सामने ला रहा है।

#BiharCrime, #PatnaMurder, #SitamarhiKilling, #NitishKumarFail जैसे हैशटैग्स सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।

नीतीश सरकार पर बढ़ता दबाव

तेजस्वी यादव के बयान और जनता के बढ़ते गुस्से के बीच नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर भारी दबाव बन रहा है। मुख्यमंत्री की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई सख्त कार्रवाई या बयान सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो इसका असर 2025 के आगामी विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है।

क्या बिहार फिर से अपराध के दौर में लौट रहा है?

पिछले कुछ वर्षों में बिहार सरकार ने दावा किया था कि राज्य अपराध मुक्त हो रहा है और विकास की ओर बढ़ रहा है। लेकिन हाल की घटनाएं दर्शाती हैं कि अपराधी अब बेखौफ होकर हत्या कर रहे हैं, और प्रशासन उन्हें रोक पाने में असफल साबित हो रहा है।

अगर यही हालात बने रहे, तो निवेश, पर्यटन और औद्योगिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

पटना और सीतामढ़ी की ये हत्याएं सिर्फ दो आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ये बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था का प्रतिबिंब हैं। अगर सरकार ने इस पर जल्द सख्त कदम नहीं उठाए, तो जनता का भरोसा टूट जाएगा और राज्य की छवि को गहरा नुकसान पहुंचेगा।

अब जरूरत है कि नीतीश कुमार और उनके सहयोगी दल मिलकर इस अपराध की लहर को रोके और जनता को यह भरोसा दिलाएं कि बिहार सुरक्षित है और रहेगा।

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