2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में मुजफ्फरपुर जिले के परिणामों ने सभी को चौंका दिया। यहां एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले की 11 सीटों में से 10 सीटें जीत लीं। हालांकि, एक महत्वपूर्ण सीट, पारू विधानसभा, एनडीए के हाथ से निकल गई, जिसे पहले भाजपा ने अपने कब्जे में रखा था। यह सीट राजद ने छीन ली, लेकिन एनडीए का प्रदर्शन पूरे जिले में मजबूत बना रहा।
जदयू की बढ़ी ताकत और ऐतिहासिक जीत
इस चुनाव में जदयू की बढ़ी हुई ताकत को साफ तौर पर देखा गया। पिछले चुनाव में जहां जदयू को केवल एक सीट मिली थी, वहीं इस बार उसने सभी चार सीटें जीत लीं। पार्टी ने कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत हासिल की, जो कि उसकी मजबूती को दिखाता है। खासकर दोनों मंत्रियों के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण था, जिन्होंने अपनी-अपनी सीटों को बचाए रखा। पंचायती राज मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने अपनी सीट को बचाने में सफलता पाई, जबकि मंत्री राजू कुमार सिंह भी अपनी सीट पर काबिज रहे।
रमा निषाद की सबसे बड़ी जीत
सबसे बड़ा ध्यान औराई से रमा निषाद की जीत पर गया, जिन्होंने वीआईपी के भोगेंद्र सहनी को 57,000 से अधिक वोटों से हराया। यह जिले की सबसे बड़ी जीत रही। रमा निषाद के पति, अजय निषाद, जिन्होंने कुछ दिन पहले कांग्रेस से भाजपा में प्रवेश किया था, ने उनकी चुनावी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी जीत ने यह साबित कर दिया कि महिला उम्मीदवार भी बिहार में बड़ी राजनीतिक शक्ति बन सकती हैं।
मुजफ्फरपुर में भाजपा की वापसी
मुजफ्फरपुर सीट पर भाजपा के रंजन कुमार ने कांग्रेस के विजयेंद्र चौधरी को 32,657 वोटों के भारी अंतर से हराया। यह सीट पहले भाजपा के पास थी, लेकिन पिछले चुनाव में यह सीट भाजपा से छिन गई थी। रंजन कुमार की इस जीत ने भाजपा की स्थिति को फिर से मजबूत किया और पार्टी की उपस्थिति को जिले में स्थापित किया।
सकरा में जदयू की जीत
सकरा विधानसभा सीट पर जदयू के आदित्य कुमार ने कांग्रेस के उम्मीदवार को 15,050 वोटों के अंतर से हराया। आदित्य कुमार के लिए यह जीत खास रही क्योंकि पिछले चुनाव में वह कांग्रेस के उम्मीदवार से केवल 1,300 वोटों से हार गए थे। इस बार उन्होंने न केवल अपनी हार का बदला लिया, बल्कि अपनी पार्टी के लिए एक बड़ी जीत भी सुनिश्चित की।
जदयू का मजबूत प्रदर्शन
जदयू ने इस चुनाव में अपनी खोई हुई जमीन को वापस हासिल किया। पिछले चुनाव में तीन सीटों पर हार झेलने के बाद इस बार उसने चार सीटों पर जीत हासिल की। गायघाट सीट पर कोमल सिंह ने राजद के निरंजन राय को हराया और मां वीणा देवी की विरासत को आगे बढ़ाया। इसके अलावा, अजय कुमार और अजीत कुमार जैसे उम्मीदवारों ने भी राजद के दिग्गज नेताओं को हराया।
पश्चिमी क्षेत्र में एनडीए का दबदबा
पश्चिमी मुजफ्फरपुर क्षेत्र में एनडीए ने अपनी पकड़ मजबूत रखी। बरूराज से अरुण कुमार सिंह ने वीआईपी के राकेश कुमार को 29,052 वोटों से हराया। यह उनकी लगातार दूसरी जीत थी, जिसने एनडीए के लिए इस क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत किया।
लोजपा (आर) की पहली जीत
बोचहां से लोजपा (आर) ने पहली बार जीत दर्ज की। बेबी कुमारी, जिन्हें 2015 में टिकट से वंचित किया गया था, ने यह सीट जीती। उन्होंने राजद के अमर पासवान को 20,000 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह लोजपा (आर) के लिए एक ऐतिहासिक पल था, और पार्टी की बढ़ती राजनीतिक ताकत को दिखाता है।
भा.ज.पा और जदयू पर बढ़ी जिम्मेदारी
एनडीए की जीत ने भाजपा और जदयू दोनों के लिए नई जिम्मेदारी पैदा की है। अब दोनों पार्टियों पर यह दबाव है कि वे पिछली बार से कहीं अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करें और लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। इन चुनावों ने यह साबित कर दिया कि एनडीए को महागठबंधन से मुकाबला करने में कोई खास कठिनाई नहीं हुई, लेकिन आगामी चुनावों में और भी कठिन चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
मुजफ्फरपुर विधानसभा चुनाव के परिणामों ने बिहार की राजनीति में नई दिशा दिखाई। एनडीए के शानदार प्रदर्शन और जदयू की जबरदस्त वापसी ने यह साफ कर दिया कि राज्य में भाजपा और जदयू का गठबंधन एक मजबूत राजनीतिक ताकत बन चुका है। लोजपा (आर) की पहली जीत और जदयू के उम्मीदवारों की सफलता यह भी दर्शाते हैं कि बिहार की राजनीति में छोटे दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
आने वाले समय में इन पार्टियों के पास यह सुनहरा अवसर होगा कि वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाए और राज्य के विकास के लिए काम करें।
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